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मानसून 2026: हिमाचल प्रदेश में कहर जारी, 63 सड़कें बंद; 286 मौतें और 1550 करोड़ से ज्यादा का नुकसान
Thu, 10 Sep 2026 10:38 AM IST
Ankesh Dogra
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Thu, 10 Sep 2026 10:38 AM IST
सार
हिमाचल प्रदेश में मानसून की बारिश और भूस्खलन से हालात लगातार चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। 10 सितंबर सुबह 10 बजे की राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 63 सड़कें बंद हैं। मंडी 33 बंद सड़कों के साथ सबसे ज्यादा प्रभावित जिला है।
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हिमाचल में मानसून का कहर।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
हिमाचल प्रदेश में मानसून का कहर लगातार जारी है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) की 10 सितंबर सुबह 10 बजे की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में बारिश और भूस्खलन के कारण 63 सड़कें बंद हैं। इसके अलावा दो बिजली वितरण ट्रांसफार्मर (DTR) और दो पेयजल आपूर्ति योजनाएं भी प्रभावित हैं। सबसे ज्यादा सड़कें मंडी जिले में बंद हैं, जहां अकेले 33 सड़कें यातायात के लिए बाधित हैं।
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जिला स्तर पर देखें तो मंडी में 33, कुल्लू में 11, कांगड़ा में 10, सिरमौर और ऊना में तीन-तीन, शिमला में दो और लाहौल-स्पीति में एक सड़क बंद है। शिमला में दो डीटीआर और दो जलापूर्ति योजनाएं भी प्रभावित बताई गई हैं। बिलासपुर, चंबा, हमीरपुर, किन्नौर और सोलन में सुबह की रिपोर्ट के मुताबिक कोई सड़क बंद नहीं थी।
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मानसून में 286 लोगों की जान गई
राजस्व विभाग के आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ की 30 जून से 9 सितंबर 2026 तक की संचयी रिपोर्ट हिमाचल में मानसून की भयावह तस्वीर सामने रखती है। रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में 286 लोगों की जान गई, जबकि 513 लोग घायल हुए और 1,144 पशु मारे गए। निजी और सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान का कुल आंकड़ा 1,55,032.82 लाख रुपये यानी करीब 1,550.33 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है।
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रिपोर्ट के अनुसार 114 मौतें आपदा से जुड़ी घटनाओं में हुईं। इनमें भूस्खलन, बाढ़, डूबने, करंट लगने, सांप के काटने और पेड़ या पहाड़ी से गिरने जैसी घटनाएं शामिल हैं। इसके अलावा 172 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई है। इस तरह मानसून सीजन में आपदा और सड़क दुर्घटनाओं को मिलाकर कुल 286 मौतें दर्ज हुई हैं। आपदा से हुई मौतों में भूस्खलन से 18, फ्लैश फ्लड से एक, डूबने से 15, आग से एक, सांप के काटने से 12, करंट लगने से 10, पेड़/खड़ी चट्टान से गिरने से 39 और अन्य कारणों से 18 मौतें दर्ज हैं।
मंडी सबसे ज्यादा प्रभावित
सड़क बंद होने के मामले में मंडी सबसे आगे है। यहां सराज में 28, सुंदरनगर में एक, सरकाघाट में तीन और थलौट में एक सड़क बंद है। कुल्लू में 11 और कांगड़ा में 10 सड़कें बाधित हैं। दूसरी ओर, सार्वजनिक उपयोगिताओं की सुबह की स्थिति शाम की तुलना में थोड़ी सुधरी है—9 सितंबर शाम को 64 सड़कें बंद थीं, जबकि 10 सितंबर सुबह यह संख्या 63 रही। हालांकि डीटीआर बाधित होने की संख्या एक से बढ़कर दो हो गई।
नुकसान का आंकड़ा 1,550 करोड़ के पार पहुंचना और प्रदेश में अभी भी 63 सड़कों का बंद रहना बताता है कि मानसून की चुनौती खत्म नहीं हुई है। खासकर मंडी, कुल्लू और कांगड़ा जैसे जिलों में सड़क संपर्क बहाल करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
सड़क बंद होने के मामले में मंडी सबसे आगे है। यहां सराज में 28, सुंदरनगर में एक, सरकाघाट में तीन और थलौट में एक सड़क बंद है। कुल्लू में 11 और कांगड़ा में 10 सड़कें बाधित हैं। दूसरी ओर, सार्वजनिक उपयोगिताओं की सुबह की स्थिति शाम की तुलना में थोड़ी सुधरी है—9 सितंबर शाम को 64 सड़कें बंद थीं, जबकि 10 सितंबर सुबह यह संख्या 63 रही। हालांकि डीटीआर बाधित होने की संख्या एक से बढ़कर दो हो गई।
नुकसान का आंकड़ा 1,550 करोड़ के पार पहुंचना और प्रदेश में अभी भी 63 सड़कों का बंद रहना बताता है कि मानसून की चुनौती खत्म नहीं हुई है। खासकर मंडी, कुल्लू और कांगड़ा जैसे जिलों में सड़क संपर्क बहाल करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।