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Shimla News: सरकारी ठेकेदार की लचर कार्य प्रणाली पर हिमाचल हाईकोर्ट सख्त, दिए ये आदेश

Fri, 23 Jun 2023 07:31 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 23 Jun 2023 07:31 PM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी ठेकेदार की लचर कार्य प्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता ठेकेदार को 66 निर्माण कार्य के ठेके दिए गए हैं। इनमें से अधिकांश कार्य शुरू नहीं हुए हैं और यदि शुरू हुए हैं तो पूरे नहीं हुए हैं।

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Himachal High Court strict on poor working system of government contractor, gave this order
हिमाचल हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी ठेकेदार की लचर कार्य प्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिए कि ठेकेदार के कोई भी बिल पास न किए जाए और उसे किसी भी प्रकार की राशि जारी न की जाए। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने ठेकेदार संजीव कुमार भंडारी को आदेश दिए कि वह अधूरे कार्य को पूरे करने के बारे में अपना हलफनामा दायर करें। अदालत ने ठेकेदार के पक्ष में पारित अंतरिम आदेशों को भी निरस्त कर दिया। मामले की सुनवाई 13 जुलाई को निर्धारित की गई है।

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अदालत ने लोक निर्माण विभाग के प्रधान सचिव को आदेश दिए है कि वह दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करें, जिन्होंने ठेकेदार को पुराने कार्य पूरे न होने पर भी नए कार्य सौंपे। अदालत ने प्रधान सचिव से पूछा है कि कार्य पूरा न करने की स्थिति में ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई। अदालत ने अपने आदेशों की प्रति मुख्य सचिव, प्रमुख अभियंता लोक निर्माण विभाग और जल शक्ति विभाग को भेजने के आदेश दिए हैं। अदालत ने प्रधान सचिव लोकनिर्माण विभाग से ठेकेदार को दिए गए 66 ठेकों की जानकारी तलब की है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि ठेकेदार को मंडी जिले में दोसा-रा-थारू-पुतलीफाल्ड, लोअर ब्रह्मफाल्ड झारेड गलू, चनौता सड़क के निर्माण का काम उनके पक्ष में दिया गया था।
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लेकिन अभी तक उसे सौंपे गए अधिकांश कार्य शुरू नहीं किए गए हैं और यदि शुरू किए गए हैं, तो पूरे नहीं किए गए हैं। 4 सितंबर 2021 को कार्यकारी अभियंता लोक निर्माण विभाग, धर्मपुर मंडल, जिला मंडी ने उपरोक्त कार्य के लिए दोबारा से निविदाएं आमंत्रित की। इन निविदाओं को याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष चुनौती दी और इन निविदाओं को आमंत्रित करने वाले आदेश को खारिज करने की गुहार लगाई। 24 सितंबर 2021 को अदालत ने नई निविदाएं आमंत्रित करने वाले आदेशों पर रोक लगा दी थी। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता ठेकेदार को 66 निर्माण कार्य के ठेके दिए गए हैं। इनमें से अधिकांश कार्य शुरू नहीं हुए हैं और यदि शुरू हुए हैं तो पूरे नहीं हुए हैं।
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मनरेगा में लोकपाल के भत्ते अदा न करने पर केंद्र से जवाब तलब

 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मनरेगा में लोकपाल के भत्ते अदा न करने पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने राज्य सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने मामले की सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित की है। याचिकाकर्ता डॉ. राकेश कपूर, सेवानिवृत कर्नल कृष्ण चंद, दुला राम हासटा और अंजला कुमारी ने हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दायर की है। अदालत को बताया गया कि उन्होंने हमीरपुर, बिलासपुर, कांगड़ा और मंडी में बतौर मनरेगा लोकपाल का कार्य किया है। उन्हें मिलने वाला यात्रा, महंगाई और अन्य भत्ते नहीं दिए जा रहे हैं। उन्होंने सितंबर 2022 से मई 2023 तक के भत्तों को जारी करने की गुहार लगाई है। इस मामले में केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव सहित मुख्य सचिव हिमाचल प्रदेश सरकार, मनरेगा के आयुक्त और प्रदेश ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव को प्रतिवादी बनाया गया है।

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