पहाड़ों की रानी शिमला में ढाई मंजिल से ऊंचे भवन निर्माण पर एनजीटी की रोक का प्रदेश सरकार ने नया तोड़ निकाल लिया है। एनजीटी के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के साथ सरकार अब अध्यादेश लाकर लोगों को राहत देने के विकल्प पर भी गंभीरता से विचार कर रही है।
स्वतंत्र तकनीकी कमेटी से सरकार करा रही अध्ययन
सरकार इस मामले में अब देरी नहीं चाहती है इसीलिए एक्ट में संशोधन करने की तैयारी भी की जा रही है। इसमें शीत सत्र में संशोधन विधेयक या बाद में अध्यादेश लाया जा सकता है। इस मामले में विधि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से विचार मंथन शुरू हो गया है।
प्रदेश सरकार पहले एनजीटी के फैसले खिलाफ कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में थी, लेकिन विधि विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि विधानसभा में अतिशीघ्र संशोधन विधेयक लाकर प्रभावित लोगों को राहत दी जा सकती है।
सूत्रों के अनुसार सरकार ने ढाई के बजाय साढे़ तीन मंजिल तक निर्माण को अनुमति देने का प्रस्ताव भी तैयार कर लिया है। एनजीटी फैसले के बाद शिमला प्लानिंग एरिया में आम लोगों को भवन बनाने में तो मुश्किल हो ही रही है सरकार के भी कई प्रोजेक्ट अटक गए हैं।
राज्य सरकार ने शिमला में ढाई मंजिल भवनों के संबंध में एक स्वतंत्र कमेटी गठित की है। इस कमेटी में वाडिया इंस्टीट्यूट के तकनीकी विशेषज्ञों के अलावा इंजीनियरों को शामिल किया है। यह कमेटी शिमला के अलावा मनाली, कुल्लू, धर्मशाला, मैकलोडगंज आदि शहरों में भवन निर्माण के विभिन्न पहलुओं को लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। यह कमेटी तकनीकी पहलुओं को देखेगी कि नए बहुमंजिला भवन पहाड़ी शहरों में कितने सुरक्षित हैं। सरकार इस रिपोर्ट को भी आधार बनाएगी।