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Shimla News: सदन से पारित प्रस्ताव सरकारी दफ्तरों की अलमारियों में बंद, अब निगम लेगा जवाब
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साल 2023 से अब तक 22 से ज्यादा प्रस्ताव पर नहीं आया जवाब, शहर की जनता को मिलनी हैं सुविधाएं
छोटी बसें चलाने, सस्ती बिजली-पानी की सुविधा देने से जुड़े प्रस्ताव लंबित, निगम हर महीने लेगा अब रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में जनता को सुविधाएं देने के लिए नगर निगम सदन से पारित किए गए प्रस्ताव अब सरकारी महकमों की अलमारियों में बंद नहीं रहेंगे। नगर निगम हर महीने सदन से भेजे प्रस्तावों पर संबंधित विभागों से जवाब लेगा। किस प्रस्ताव पर क्या काम हुआ, इस पर अब पूरी निगरानी रहेगी। साल 2023 से अगस्त 2026 तक नगर निगम सदन की ओर से कुल 22 प्रस्ताव शहरी विकास विभाग को भेजे गए। विभाग से यह प्रस्ताव आगे सरकार और संबंधित विभागों को भेजे गए। इनमें से ज्यादातर पर वापस नगर निगम को जवाब नहीं मिला कि इन पर क्या काम हुआ है। इनकी फाइलें संबंधित विभागों की अलमारियों में बंद पड़ी हैं। इन पर संबंधित विभागों ने न नगर निगम को जवाब दिया और न ही इन्हें मंजूरी देते हुए धरातल पर उतारा।
अब नगर निगम सदन में जब इस पर सवाल उठे तो निगम प्रशासन इस पर गंभीरता दिखाने जा रहा है। फैसला लिया गया है कि अब सदन से पारित होने वाले हर प्रस्ताव की प्रगति रिपोर्ट तैयार होगी। जनता को सुविधा देने से जुड़ा सदन से भेजा हर प्रस्ताव कब किस विभाग के पास पहुंचा, इस पर कितने दिन में काम हुआ, फाइल कहां तक आगे पहुंची, इसकी मासिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। निगम आयुक्त सचिन कंवल ने सभी संबंधित विभागों से इसकी रिपोर्ट लेने के निर्देश दिए हैं।
शहर की जनता को मिलेगा फायदा
सदन से आमतौर पर जन सुविधा से जुड़े उन प्रस्तावों को आगे सरकार को भेजा जाता है जिन पर नगर निगम खुद अंतिम फैसला नहीं ले पाता। हालांकि, अब तक सदन से भेजे गए प्रस्तावों पर कोई रिपोर्ट नहीं ली जाती थी। जवाबदेही न होने के कारण ज्यादातर प्रस्ताव सरकारी महकमों के पास महीनों तक पड़े रहते हैं। अब हर माह रिपोर्ट लेने से इन प्रस्तावों की फाइलें रफ्तार पकड़ेंगी और जनता को जल्द सुविधाएं मिलेंगी। महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि सदन से भेजे जाने वाले हर प्रस्ताव की रिपोर्ट तैयार होगी। किस पर कितना काम हुआ, इसका पूरा ब्योरा लिया जाएगा।
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सरकारी महकमों में पास अटके हैं ये प्रस्ताव
तीन साल में कांग्रेस शासित नगर निगम के सदन से कुल 22 प्रस्ताव सरकार और विभागों को भेजे गए हैं। इनमें संकरी सड़कों से जुड़े, उपनगरों के लिए छोटी 30 सीटर एचआरटीसी बसें चलाने, उपायुक्त कार्यालय परिसर में पार्षदों के लिए पार्किंग, नगर निगम की संपत्तियां कंपनी को न सौंपने, पंचायती राज अधिनियम के तहत निगम को शक्तियां देने, शहर में बिजली बिल घरेलू दरों पर जारी करने, सस्ता पानी देने जैसे प्रस्ताव सरकारी महकमों के पास लंबित हैं।
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छोटी बसें चलाने, सस्ती बिजली-पानी की सुविधा देने से जुड़े प्रस्ताव लंबित, निगम हर महीने लेगा अब रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में जनता को सुविधाएं देने के लिए नगर निगम सदन से पारित किए गए प्रस्ताव अब सरकारी महकमों की अलमारियों में बंद नहीं रहेंगे। नगर निगम हर महीने सदन से भेजे प्रस्तावों पर संबंधित विभागों से जवाब लेगा। किस प्रस्ताव पर क्या काम हुआ, इस पर अब पूरी निगरानी रहेगी। साल 2023 से अगस्त 2026 तक नगर निगम सदन की ओर से कुल 22 प्रस्ताव शहरी विकास विभाग को भेजे गए। विभाग से यह प्रस्ताव आगे सरकार और संबंधित विभागों को भेजे गए। इनमें से ज्यादातर पर वापस नगर निगम को जवाब नहीं मिला कि इन पर क्या काम हुआ है। इनकी फाइलें संबंधित विभागों की अलमारियों में बंद पड़ी हैं। इन पर संबंधित विभागों ने न नगर निगम को जवाब दिया और न ही इन्हें मंजूरी देते हुए धरातल पर उतारा।
अब नगर निगम सदन में जब इस पर सवाल उठे तो निगम प्रशासन इस पर गंभीरता दिखाने जा रहा है। फैसला लिया गया है कि अब सदन से पारित होने वाले हर प्रस्ताव की प्रगति रिपोर्ट तैयार होगी। जनता को सुविधा देने से जुड़ा सदन से भेजा हर प्रस्ताव कब किस विभाग के पास पहुंचा, इस पर कितने दिन में काम हुआ, फाइल कहां तक आगे पहुंची, इसकी मासिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। निगम आयुक्त सचिन कंवल ने सभी संबंधित विभागों से इसकी रिपोर्ट लेने के निर्देश दिए हैं।
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शहर की जनता को मिलेगा फायदा
सदन से आमतौर पर जन सुविधा से जुड़े उन प्रस्तावों को आगे सरकार को भेजा जाता है जिन पर नगर निगम खुद अंतिम फैसला नहीं ले पाता। हालांकि, अब तक सदन से भेजे गए प्रस्तावों पर कोई रिपोर्ट नहीं ली जाती थी। जवाबदेही न होने के कारण ज्यादातर प्रस्ताव सरकारी महकमों के पास महीनों तक पड़े रहते हैं। अब हर माह रिपोर्ट लेने से इन प्रस्तावों की फाइलें रफ्तार पकड़ेंगी और जनता को जल्द सुविधाएं मिलेंगी। महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि सदन से भेजे जाने वाले हर प्रस्ताव की रिपोर्ट तैयार होगी। किस पर कितना काम हुआ, इसका पूरा ब्योरा लिया जाएगा।
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सरकारी महकमों में पास अटके हैं ये प्रस्ताव
तीन साल में कांग्रेस शासित नगर निगम के सदन से कुल 22 प्रस्ताव सरकार और विभागों को भेजे गए हैं। इनमें संकरी सड़कों से जुड़े, उपनगरों के लिए छोटी 30 सीटर एचआरटीसी बसें चलाने, उपायुक्त कार्यालय परिसर में पार्षदों के लिए पार्किंग, नगर निगम की संपत्तियां कंपनी को न सौंपने, पंचायती राज अधिनियम के तहत निगम को शक्तियां देने, शहर में बिजली बिल घरेलू दरों पर जारी करने, सस्ता पानी देने जैसे प्रस्ताव सरकारी महकमों के पास लंबित हैं।