हिमाचल में नियुक्त होंगे मुख्य सचेतक और उप मुख्य सचेतक, मिलेगा इतना वेतन
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हिमाचल सरकार अब मुख्य सचेतक और उप मुख्य सचेतक की नियुक्ति करने जा रही है। इसके लिए सरकार ने बुधवार को बहुमत प्राप्त दल से इन दोनों पदों पर नियुक्ति और उनके वेतन-भत्तों से संबंधित विधेयक सदन के पटल पर रखा।
इस विधेयक के मुताबिक मुख्य सचेतक को कैबिनेट और उप मुख्य सचेतक को कैबिनेट राज्य मंत्री का दर्जा मिलेगा। वेतन, भत्तों समेत तमाम सुविधाएं भी मंत्रियों के समान ही रहेंगी।
मंत्री पद की दौड़ से बाहर रहे विधायकों की इन पदों पर ताजपोशी होगी, जिस पर खींचतान तेज हो गई है। इसके लिए जल्द ही अधिसूचना जारी होगी। विधानसभा की कार्यवाही के लिए यह व्यवस्था पहली बार बनाई जा रही है।
विपक्षी दल कांग्रेस ने किया विरोध
विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए विधेयक वापस लेने की मांग उठाई है। सरकार की ओर से सदन में बिल पेश करते समय कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने इसका विरोध किया।
इस पर विधानसभा अध्यक्ष राजीव बिंदल ने कहा कि मामले को वह वीरवार को चर्चा के दौरान उठाएं। बावजूद इसके मुकेश ने अपनी आपत्ति दर्ज करवाते हुए सरकार से इस विधेयक को वापस लेने की मांग की। विपक्ष की आपत्ति पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि कई राज्यों में यह व्यवस्था है।
उसी के मुताबिक यह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने नौ सीपीएस बनाए थे, लेकिन सरकार अभी उनकी तैनाती नहीं कर रही है। यह समन्वय बनाने के लिए किया जा रहा है और इसमें कोई बुराई नहीं है।
यह होगा सचेतकों का काम
मुख्य सचेतक और उप मुख्य सचेतक का काम सदन में सरकारी कार्य का खाका तैयार करना होगा। सदन की गतिविधियों पर निरंतर नजर रखने और सदन में होने वाली घटनाओं के संबंध में सदन के नेता को अवगत करवाना के अलावा विपक्षी दल के नेताओं से समन्वय बनाने की भी जिम्मेदारी इन्हीं की होगी।
ये मिलेंगी सुविधाएं
- हिमाचल प्रदेश अधिनियम 2000 में मंत्रियों के लिए तय वेतन ही मुख्य सचेतक को मिलेगा
- उप मुख्य सचेतक को अधिनियम के तहत राज्य मंत्रियों को देय सुविधाएं मिलेंगी
- मंत्रियों के बराबर दैनिक भत्ता, प्रतिपूरक भत्ता, सत्कार भत्ता, वाहन भत्ता और यात्रा भत्ता मिलेगा
- नि:शुल्क हवाई सेवा, रियायती मोटर कार और गृह निर्माण ऋण, टेलीफोन और आवासीय सुविधा
पोस्ट नहीं पार्टी पद होते हैं : मुकेश
कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने विरोध स्वरूप सदन में कहा कि यह नई परिपाटी डाली जा रही है। यह सरकार की पोस्ट नहीं, बल्कि पार्टी के पद होते हैं।
बकौल मुकेश मुख्यमंत्री कब से इतने कमजोर हो गए कि उन्हें सब पर नजर रखने के लिए दो-दो सचेतकों की जरूरत पड़ने लगी। संसदीय कार्य मंत्री होने के बावजूद दो सचेतक रखना सरकार के खजाने पर बोझ डालना है।
कोर्ट में जा सकता है मामला : विपक्ष
प्रदेश में मुख्यमंत्री समेत 12 मंत्री ही बनाए जा सकते हैं। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार तय सीमा से ज्यादा मंत्री बना रही है। विपक्ष ने चेताया कि सीपीएस की तरह यह मामला भी कोर्ट में जा सकता है। लाभ के पद से बचने और विधायकों को एडजस्ट करने का रास्ता सरकार ने निकाला है।
एफएसएल के अधीन होगा अंगुली छाप ब्यूरो
प्रदेश सरकार ने बुधवार को विधानसभा में हिमाचल प्रदेश पुलिस एक्ट में संशोधन का विधायक सदन में पेश किया। संशोधन विधेयक पारित होने के बाद अंगुली छाप ब्यूरो (फिंगर प्रिंट) अब फोरेंसिक साइंस लैब के अधीन कार्य करेगा।
अभी तक यह ब्यूरो सीआईडी का हिस्सा होता था। अब वैज्ञानिक आधार वाले सभी ब्यूरो को फोरेंसिक लैब के अधीन करने के उद्देश्य से इसे सीआईडी से हटा दिया गया है। अब वीरवार को संशोधन को मंजूरी के बाद यह लागू हो जाएगा।
संशोधन के बाद इस ब्यूरो का संचालन सीआईडी या फोरेंसिक लैब करेगी, इसको लेकर संशय बना हुआ है। दरअसल, पंजाब पुलिस एक्ट से लेकर हिमाचल पुलिस एक्ट लागू होने तक अंगुली छाप ब्यूरो सीआईडी का हिस्सा होता था।
इस ब्यूरो के जिम्मे सभी सजायाफ्ता मुजरिमों की अंगुलियों के रिकार्ड को अपने पास रखना होता है। इस ब्यूरो की मदद से ही घटना के बाद घटनास्थल से मिले अंगुलियों के निशानों का मिलान कर आरोपी को चिह्नित किया जाता था।
साथ ही संदिग्धों का भी डाटाबेस तैयार किया जाता था। अब यह काम एफएसएल के अधीन होगा। लैब ही डाटा तैयार करेगी और जरूरत पड़ने पर पुलिस या सीआईडी से साझा करेगी।
हिमाचल में सेंट्रल रियल इस्टेट एक्ट को मंजूरी
हिमाचल में सेंट्रल रियल इस्टेट एक्ट लागू होगा। बुधवार को विधानसभा में इस नगर व ग्राम योजना विधेयक 2018 को लागू करने की मंजूरी दी गई। इसके तहत हिमाचल में सरकारी भवन निर्माण तथा लोगों के भवनों के नक्शे पास हो सकेंगे।
वर्तमान में प्रदेश में ग्राम योजना अधिनियम - 1977 चल रहा था। केंद्र सरकार ने सभी देशों मेें एक ही एक्ट लागू करने का फैसला लिया। हिमाचल में अब इस एक्ट को अब मंजूरी दी गई है।
पूरे देश में कॉलोनियां और अन्य प्रोजेक्ट का निर्माण अब केंद्रीय रियल इस्टेट नियम के तहत होगा। केंद्रीय बिल पारित होने से सरकार का इस्टेट बिल चैप्टर - 9 खत्म हो जाएगा। टीसीपी से मिली जानकारी के मुताबिक बिल्डरों को नियमों के तहत भवनों का निर्माण करना होगा।
कुछ अपार्टमेंट गरीब लोगों के लिए भी आरक्षित रखने होंगे। अगर बिल्डर बेचे गए प्लॉट मालिकों के साथ हेराफेरी करता है तो उन्हें इस एक्ट में जेल तक का भी प्रावधान किया गया है।
भवन में आठ अपार्टमेंट बनाने को मंजूरी मिलेगी। इसके आधार पर ही बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं देनी होंगी। बिल्डरों को कॉलोनी बनाते वक्त सड़क तथा अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने का ध्यान रखना होगा।
एचपीयू कुलपति के पास रहेगी क्लस्टर विवि की कमान
प्रदेश में स्थापित किए जाने वाले पहले क्लस्टर विश्वविद्यालय मंडी की तीन माह के लिए प्रदेश विवि के कुलपति को कमान सौंपी जाएगी। बुधवार को सरकार ने सरकार वल्लभ भाई पटेल क्लस्टर विवि मंडी विधेयक 2018 पेश किया।
शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज द्वारा रखे गए इस विधेयक को वीरवार को पारित किया जाएगा। विधेयक के अनुसार प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति को क्लस्टर विवि का वीसी नियुक्त किया गया समझा जाएगा।
तीन माह के लिए या जब तक इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन प्रथम कुलपति नियुक्त नहीं किया जाता। 55 करोड़ खर्च कर क्लस्टर विवि का निर्माण होगा। इसके तहत चार कॉलेजों मंडी, सुंदरनगर, द्र्रंग और बासा को शामिल किया गया है।
मंडी कॉलेज को लीड कॉलेज बनाया है। केंद्र सरकार ने रूसा के तहत हिमाचल के लिए एक क्लस्टर विवि मंजूर करते हुए 27 करोड़ की पहली किस्त जारी कर दी है। इन चार कॉलेजों में विभिन्न नए कोर्स शुरू किए जाना प्रस्तावित है।
क्लस्टर विवि मंडी में अलग से कुलपति और रजिस्ट्रार की नियुक्ति की जाएगी। विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट और गवर्निंग बॉडी का गठन भी किया जाएगा। प्रदेश विश्वविद्यालय के अधिकारियों कोे भी क्लस्टर विवि में काम करने का विकल्प दिया जाएगा।