सांसद की करोड़ों की बेनामी संपत्ति होगी सरकार के हवाले
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राजधानी शिमला से सटे छराबड़ा में एक कंपनी अलकेमिस्ट के चेक पर खरीदी गई जमीन हिमाचल सरकार के नाम होगी। उपायुक्त शिमला की कोर्ट ने जमीन को बेनामी घोषित करते हुए प्रदेश सरकार में निहित करने के आदेश दे दिए हैं। करीब 30 बीघा यह जमीन मौजूदा समय में सोलन के एक व्यक्ति के नाम पर है लेकिन वर्ष 2010 में जब इस जमीन का सौदा छह करोड़ में हुआ तो पैसे का भुगतान अलकेमिस्ट इंफ्रा रियलिटी लिमिटेड कंपनी ने किया था। यह कंपनी टीएमसी के राज्यसभा सांसद केडी सिंह के परिवार से जुड़ी बताई जाती है।
इस संपत्ति के बेनामी होने की शिकायत पर जिला प्रशासन ने इसकी जांच की थी। इसके बाद मामला उपायुक्त शिमला की कोर्ट में आया। सभी पहलुओं और तथ्यों को जांचने के बाद अब उपायुक्त ने फैसला दिया कि यह संपत्ति बेनामी है, लिहाजा इसे सरकार में निहित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही जमीन के खरीदार पर स्टांप ड्यूटी चोरी के मामले में कोर्ट ने 11 लाख की रिकवरी का नोटिस भी जारी किया है।
अलकेमिस्ट कंपनी ने किया था जमीन के लिए करोड़ों का भुगतान
इस जमीन पर छराबड़ा इंटरनेशनल स्कूल का भवन भी है। मामले की जांच में सामने आया कि रेवेन्यू रिकार्ड में यह जमीन कोटी रियासत में थी। इसके बाद ब्रिटिशकाल में यह पट्टे पर अंग्रेज अफसर सर एडवर्ड बक के पास चली गई। वर्ष 1955 में अंग्रेज अफसर की बेटी लोरना ने इसे दरभंगा की एक रानी को आगे पट्टे पर दिया।
इसके बाद वर्ष 1977 में जगजीत सिंह ने एग्रीमेंट कर जमीन ले ली। जगजीत सिंह गैर हिमाचली व गैर कृषक थे, लिहाजा धारा 118 के तहत वह हिमाचल में जमीन नहीं ले सकते थे। 2005 में उन्होंने इस जमीन की जीपीए लेकर ऊना के दो लोगों के साथ सेल डीड कर दी। वर्ष 2010 में इस जमीन को आगे सोलन के एक व्यक्ति को 6 करोड़ में बेच दिया गया।
इसका भुगतान अलकेमिस्ट कंपनी ने किया। तहसीलदार शिमला मंजीत शर्मा (ग्रामीण) ने कहा कि इस मामले में उपायुक्त के आर्डर की कॉपी अभी उनके पास नहीं पहुंची है। कॉपी मिलने के बाद आगामी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इस संबंध में अमर उजाला ने सांसद केडी सिंह का पक्ष लेने का प्रयास किया लेकिन उनसे संपर्क न हो सका।
उपायुक्त शिमला दिनेश मल्होत्रा ने बताया कि छराबड़ा में इस संपत्ति की खरीद मामले में हिमाचल भू राजस्व कानून 1972 की धारा 118 का उल्लंघन किया गया। बेनामी सौदे की यह जांच एडीएम (पी) ने की थी। सभी तथ्यों को देखने के बाद इस जमीन को सरकार के नाम करने के आदेश तहसीलदार को जारी कर दिए गए हैं।