हिमाचल सरकार के बुरे हाल, खजाना खाली, एक माह में लिया इतने करोड़ लोन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल सरकार का खजाना खाली हो गया है। कर्मचारियों के वेतन-भत्ते देने का संकट हो गया है। प्रदेश सरकार एक माह में दूसरी बार कर्ज लेने जा रही है। शनिवार को 300 करोड़ कर्ज लेने के आवेदन को अधिसूचित किया गया। इससे पहले छह अक्तूबर को राज्य सरकार ने 700 करोड़ कर्ज के लिए भारतीय रिजर्व बैंक से आवेदन किया था।
एक माह में 1000 करोड़ का कर्ज सरकार की मुश्किलें बढ़ा सकता है। वीरभद्र सरकार इससे पहले भी कई बार करोड़ों रुपये का लोन ले चुकी है। सूत्रों ने बताया कि कर्ज लेने की असल वजह कर्मचारियों को वेतन-भत्ते नहीं दे पाना है। हालांकि, ये कर्जा विकास कार्यक्रमों पर खर्च करने के नाम पर लिया जा रहा है।
सरकार को इस महीने कर्मचारियों और पेंशनरों को महंगाई भत्ता और इसका एरियर देना पड़ा है। इसी से ये आर्थिक संकट खड़ा हुआ है। अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त श्रीकांत बाल्दी का कहना है कि हिमाचल सरकार के खर्चे बढ़ गए हैं, इसीलिए कर्ज लेना पड़ रहा है। उन्होंने नया कर्ज लेने की अधिसूचना जारी करने की पुष्टि की।
36 हजार करोड़ के कर्ज में डूबी सरकार
हिमाचल सरकार पहले से ही लगभग 36 हजार करोड़ रुपये के कर्ज में डूबी हुई है। इस साल सरकार इस ऋण पर 3500 करोड़ रुपये तो ब्याज के ही चुका रही है। ऊपर से और कर्ज लेने पर जोर दिया गया है।
कोई भी सरकार नहीं रोक पाई कर्ज मुक्ति का सिलसिला
प्रदेश में चाहे भाजपा की सरकार रही हो या कांग्रेस की। कर्ज लेने का ये सिलसिला रुका नहीं है। अपने संसाधनों को कोई भी सरकार नहीं बढ़ा पाई है।
वर्ष 2012 में सत्ता में आने के बाद सरकार 200 से 700 करोड़ रुपये के कर्ज लेने केे कई आवेदन कर चुकी है। मौजूदा सरकार भी अपने संसाधनों को उस गति से विकसित नहीं कर पा रही है, जिससे कि कर्ज मुक्ति की राह पकड़ी जा सके ।