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अध्ययन में खुलासा: हिमाचल के 37.1% बच्चों के दांतों में कैविटी, सॉफ्ट ड्रिंक और मीठे की बढ़ी लत बनी चिंता
Wed, 26 Aug 2026 12:00 PM IST
Ankesh Dogra
आदित्य सोफत, शिमला।
आदित्य सोफत, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Wed, 26 Aug 2026 12:00 PM IST
सार
हिमाचल प्रदेश में 12 से 15 वर्ष के बच्चों के दांतों की स्थिति को लेकर चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। दंत कॉलेज एवं अस्पताल शिमला के अध्ययन में 37.1 फीसदी बच्चों में कैविटी के लक्षण मिले हैं। अध्ययन में सॉफ्ट ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक, टॉफी, चॉकलेट और मीठे पदार्थों के अधिक सेवन को दंत स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बताया गया। 57.2 फीसदी बच्चे दिन में सिर्फ एक बार ब्रश करते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : Adobe stock Images
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विस्तार
सॉफ्ट ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक, टॉफी, चॉकलेट और अन्य मीठे खाद्य पदार्थों का लगातार सेवन हिमाचल प्रदेश के बच्चों के दांतों के लिए चिंता का कारण बन रहा है। दंत कॉलेज एवं अस्पताल शिमला के सार्वजनिक स्वास्थ्य दंत चिकित्सा विभाग के अध्ययन में 12 से 15 वर्ष की उम्र के 37.1 फीसदी बच्चों में दांतों में कैविटी यानी सड़न के लक्षण पाए गए हैं। अध्ययन में खान-पान में कार्बोहाइड्रेट और मीठे पदार्थों की अधिकता को बच्चों के दंत स्वास्थ्य के लिए अहम चिंता के रूप में सामने रखा गया है।
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अध्ययन में यह भी सामने आया कि बड़ी संख्या में बच्चे दांतों की नियमित और सही तरीके से सफाई नहीं कर रहे हैं। स्कूलों और अस्पताल में आने वाले बच्चों से मिली जानकारी के अनुसार 57.2 फीसदी बच्चे दिन में केवल एक बार ब्रश करते हैं। अध्ययन में लड़कियों के दिन में एक बार ब्रश करने का अनुपात लड़कों की तुलना में अधिक पाया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि दांतों की सफाई में लापरवाही और मीठे पदार्थों के बार-बार सेवन से कैविटी के साथ मसूड़ों से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है।
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यह अध्ययन दंत कॉलेज एवं अस्पताल शिमला के सार्वजनिक स्वास्थ्य दंत चिकित्सा विभाग ने मई 2024 से दिसंबर 2025 के बीच किया। इसमें अस्पताल में आने वाले और विभिन्न स्कूलों में पढ़ने वाले 12 से 15 वर्ष के बच्चों को शामिल किया गया। बच्चों के 24 घंटे के खान-पान और दंत स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं का आकलन किया गया। अध्ययन में डॉ. नीतिका नारियाल, डॉ. विनय भारद्वाज, डॉ. शैली फोतेदार, डॉ. अरुण सिंह ठाकुर, डॉ. शैलजा वशिष्ठ और डॉ. अतुल सांख्यान शामिल रहे। अध्ययन के निष्कर्ष जून में जर्नल ऑफ इंडियन एसोसिएशन ऑफ पब्लिक हेल्थ डेंटिस्ट में प्रकाशित हुए।
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एक बार ब्रश करने वालों में ज्यादा जोखिम
अध्ययन में बच्चों की ब्रशिंग की आदत और कैविटी के बीच संबंध का भी आकलन किया गया। 57.2 फीसदी बच्चों ने दिन में केवल एक बार ब्रश करने की जानकारी दी। इसके अलावा 27.2 फीसदी बच्चों में कैविटी का जोखिम 2.91 गुना अधिक दर्ज किया गया। वहीं, 30.3 फीसदी बच्चों में उत्कृष्ट श्रेणी की तुलना में कैविटी का जोखिम 1.54 गुना अधिक पाया गया। विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में सुबह और रात नियमित रूप से ब्रश करने की आदत विकसित करना बेहद जरूरी है।
आधे से ज्यादा बच्चे अंडरवेट
अध्ययन के दौरान बच्चों के वजन से जुड़े आंकड़े भी सामने आए। इसमें 50.2 फीसदी बच्चे अंडरवेट पाए गए। हालांकि अध्ययनकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि अंडरवेट होने का दांतों में कैविटी से सीधा संबंध नहीं माना गया है। अध्ययन में 37.9 फीसदी बच्चे सामान्य वजन के थे, जबकि 6.6 फीसदी बच्चे अत्यधिक वजन और 5.3 फीसदी मोटापे की श्रेणी में पाए गए। अभिभावकों को बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जरूरत के अनुसार जांच करवाने की सलाह दी गई है।
सॉफ्ट ड्रिंक और टॉफी का सेवन घटाने की सलाह
अध्ययनकर्ताओं ने बच्चों के दांतों को लंबे समय तक स्वस्थ रखने के लिए खान-पान पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। बच्चों को सॉफ्ट ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक, टॉफी, कैरेमल, चॉकलेट और अन्य मीठे पदार्थों का बार-बार सेवन करने से रोकने को कहा गया है। साथ ही भोजन में कार्बोहाइड्रेट और मीठे पदार्थों की निर्भरता कम करने पर जोर दिया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों को सुबह और रात फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से ब्रश करना चाहिए। ब्रश हल्के हाथों से वर्टिकल या कॉम्बिनेशन विधि से करना बेहतर है, ताकि दांतों की सभी सतहों की अच्छी तरह सफाई हो सके। नियमित ब्रशिंग दांतों पर बैक्टीरिया से बनने वाले एसिड के प्रभाव को कम करने में मदद करती है।
रोजाना मीठा खाने से बढ़ सकता है खतरा
डॉ. योगेश भारद्वाज, प्राचार्य, डेंटल कॉलेज एवं अस्पताल ने कहा कि सॉफ्ट ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक, मीठा, टॉफी और चॉकलेट का अधिक सेवन बच्चों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। यदि बच्चे रोजाना अधिक मीठा खाते हैं तो दांतों में सड़न और अन्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। अभिभावकों को बच्चों के खान-पान पर नजर रखने के साथ उन्हें दिन में दो बार ब्रश करने की आदत डालनी चाहिए।
अध्ययनकर्ताओं ने बच्चों के दांतों को लंबे समय तक स्वस्थ रखने के लिए खान-पान पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। बच्चों को सॉफ्ट ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक, टॉफी, कैरेमल, चॉकलेट और अन्य मीठे पदार्थों का बार-बार सेवन करने से रोकने को कहा गया है। साथ ही भोजन में कार्बोहाइड्रेट और मीठे पदार्थों की निर्भरता कम करने पर जोर दिया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों को सुबह और रात फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से ब्रश करना चाहिए। ब्रश हल्के हाथों से वर्टिकल या कॉम्बिनेशन विधि से करना बेहतर है, ताकि दांतों की सभी सतहों की अच्छी तरह सफाई हो सके। नियमित ब्रशिंग दांतों पर बैक्टीरिया से बनने वाले एसिड के प्रभाव को कम करने में मदद करती है।
रोजाना मीठा खाने से बढ़ सकता है खतरा
डॉ. योगेश भारद्वाज, प्राचार्य, डेंटल कॉलेज एवं अस्पताल ने कहा कि सॉफ्ट ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक, मीठा, टॉफी और चॉकलेट का अधिक सेवन बच्चों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। यदि बच्चे रोजाना अधिक मीठा खाते हैं तो दांतों में सड़न और अन्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। अभिभावकों को बच्चों के खान-पान पर नजर रखने के साथ उन्हें दिन में दो बार ब्रश करने की आदत डालनी चाहिए।