हिमाचल में एक और कोरोना संक्रमित की मौत, 118 नए पॉजिटिव, सक्रिय केस 1446
हिमाचल में कुल कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 202555 पहुंच गया है। इनमें से अब तक 197612 संक्रमित ठीक हो चुके हैं। सक्रिय कोरोना मामले 1446 हैं। प्रदेश में अब तक 3466 संक्रमितों की मौत हुई है।
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बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश में 243 मरीज ठीक हुए हैं। अब प्रदेश में कुल कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 202555 पहुंच गया है। इनमें से अब तक 197612 संक्रमित ठीक हो चुके हैं। सक्रिय कोरोना मामले 1446 हैं। प्रदेश में अब तक 3466 संक्रमितों की मौत हुई है। बीते 24 घंटों के दौरान कोरोना की जांच के लिए 12040 लोगों के सैंपल लिए गए।
किस जिले मे कितने सक्रिय मामले
कांगड़ा 256
शिमला 188
सोलन 64
मंडी 180
चंबा 240
सिरमौर 50
ऊना 103
बिलासपुर 85
हमीरपुर 103
कुल्लू 112
किन्नौर 53
लाहौल-स्पीति12
गर्भवती महिलाओं का कोविड-19 टीकाकरण के लिए दिशा-निर्देश जारी
उधर, टीकाकरण के लिए राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह की सिफारिशों के अनुसार भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने गर्भवती महिलाओं के कोविड-19 टीकाकरण को सशर्त मंजूरी दे दी है। कहा गया है कि गर्भवती महिलाओं को कोविड-19 संक्रमण के साथ-साथ देश में उपलब्ध कोविड-19 वैक्सीन से जुड़े जोखिमों और लाभ की जानकारी देनी होगी। स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि देश में वर्तमान में तीन वैक्सीन कोविशील्ड, कोवैक्सिन और स्पूतनिकवी को आपातकालीन स्थिति में उपयोग के लिए मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं को टीका लगाने का निर्णय लेने में मदद करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिला प्रशासन को कर्मचारियों, अग्रिम पंक्ति कार्यकर्ताओं और निजी चिकित्सा व्यवसायियों को प्रशिक्षित करने के निर्देश दिए हैं।
प्रवक्ता ने कहा कि अग्रिम पंक्ति कार्यकर्ताओं द्वारा घरों का दौरा किया जाएगा और उन्हें अस्पताल में प्रसव पूर्व जांच, आउटरीच टीकाकरण सत्र, ग्राम स्वास्थ्य और पोषण दिवस और शहरी स्वास्थ्य और पोषण दिवस आदि के बारे में परामर्श दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि गर्भवती महिलाएं टीकाकरण करवाने का निर्णय लेती हैं तो स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों द्वारा पंजीकरण की प्रक्रिया में उनकी मदद की जाएगी। गर्भवती महिला में एईएफआई के मामले में जिलों में एईएफआई समिति गठित की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रसूति रोग विशेषज्ञ और स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ या नवजात रोग विशेषज्ञ को एईएफआई समितियों में शामिल किया जाएगा।