'आप' के विधायक की तरह पांच साल एमएलए बने रहेंगे अनिल शर्मा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल प्रदेश कैबिनेट में ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा पांच साल विधायक बने रहेंगे। अगर अनिल शर्मा से मंत्री पद छीना जाता है तब भी वे विधायक बने रहेंगे। अगर भाजपा उन्हें पार्टी से निकालती है तो वे प्रदेश विधानसभा में निर्दलीय विधायक के तौर पर बैठेंगे।
आप पार्टी के बागी विधायक कपिल मिश्रा हैं सबसे बड़े उदाहरण
आम आदमी पार्टी (आप) के बागी विधायक और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा भी इसी तरह का उदाहरण हैं। वे अब भी आम आदमी पार्टी से ही विधायक हैं।
बीते वर्ष दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने मिश्रा को दिल्ली सरकार से बाहर निकाल दिया था। मिश्रा ने केजरीवाल और दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे लेकिन अब भी वे पार्टी के ही विधायक हैं। उन्हें पार्टी से नहीं निकाला गया है। अगर पार्टी उन्हें निकालती है तो वे निर्दलीय विधायक माने जाएंगे।
गौर हो कि अनिल शर्मा के बेटे आश्रय को मंडी संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस से लोकसभा चुनाव लड़ने को टिकट मिला है। उल्लेखनीय है कि बीते दिनों पूर्व केंद्रीय संचार राज्य मंत्री पंडित सुखराम ने कांग्रेस में घर वापसी की है और वह अपने पौत्र आश्रय को भी कांग्रेस का सदस्य बना चुके हैं। सुखराम ने हाईकमान के समक्ष शर्त रखी थी कि अगर उनके पौत्र आश्रय को मंडी से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस टिकट दिया जाता है तो वह कांग्रेस में आने को तैयार हैं।
कांग्रेस हाईकमान ने सुखराम की शर्त मानी और आश्रय को मंडी से टिकट दे दिया। इससे पहले सुखराम भाजपा से अपने पौत्र आश्रय को मंडी से टिकट दिलाने के लिए दबाव बना रहे थे परंतु भाजपा हाईकमान ने इस दिशा में कोई खास रुचि नहीं दिखाई। मंडी संसदीय क्षेत्र से आश्रय शर्मा के कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर एलान के बाद जयराम सरकार में ऊर्जा मंत्री व आश्रय के पिता अनिल शर्मा ने अपना स्टैंड क्लीयर कर दिया है।
अनिल शर्मा ने कहा कि पार्टी अगर मंडी से बाहर कहीं भी कोई जिम्मेदारी देती है तो वे उसे निभाने के लिए तैयार हैं। इस्तीफे की बात पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अभी भी सरकार में हैं और अगर पार्टी हाईकमान चाहेगी या मांगेगी तो इस्तीफा दे दूंगा। प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने कहा कि शर्मा ने अपनी बात रखी है। केंद्रीय नेतृत्व से इस संबंध में चर्चा के बाद निर्णय लिया जाएगा।