एक क्लिक में पढ़िए कैबिनेट के 10 बड़े फैसले
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हिमाचल पुलिस में कांस्टेबलों के 800 पद भरे जाएंगे। नियमित आधार पर 640 पुरुष और 160 महिला कांस्टेबल भर्ती होंगे। इसके अलावा विभिन्न विभागों में 50 और पद भरे जाएंगे। सरकारी स्कीमों का लाभ लेने के लिए आम लोगों के ऊपर से हलफनामे का झंझट खत्म कर दिया है। हलफनामे की जगह अब स्व सत्यापित सादा कागज काफी होगा। हलफनामा केवल वहीं लगेगा, जहां एक्ट या रूल्स में ही ये जरूरी हो।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में धर्मशाला में हुई कैबिनेट की बैठक में ये फैसले लिए गए। कैबिनेट ने शिक्षा विभाग के आईसीटी प्रोजेक्ट पर 48 महीनों के लिए मैसर्ज आईएल एंड एफएस एजूकेशन सर्विसिज लिमिटेड के साथ एग्रीमेंट को स्वीकृति दी। इसके लिए अतिरिक्त साफ्टवेयर एससीडीसी के माध्यम से लिया जाएगा।
अवैध खनन पर जुर्माने के साथ जेल
9 कैदियों को समय पूर्व छोड़ने और एक दया याचिका को मंजूरी दी है। प्रदेश में चल रहे सभी तकनीकी, वोकेशनल और प्रोफेशनल संस्थानों में प्रवेश यूजीसी के तय मानकों के अनुसार होगा। इसके लिए प्रवेश परीक्षा तकनीकी शिक्षा विश्वविद्यालय हमीरपुर लेगा। मंत्रिमंडल ने उद्योग विभाग के खनन नियमों को भी मंजूरी दे दी, जिसमें वैध खनन की रायल्टी को 50 फीसदी बढ़ाया गया है।
अवैध खनन पर जुर्माने के साथ जेल का प्रावधान किया गया है। पेंशन और फैमिली पेंशन लेने वाले पेंशनरों को अब 5, 10 और 15 फीसदी पेंशन भत्ता केवल उस पेंशन पर मिलेगा, जो अधिकतम होगी। आईटीआई में प्रिंसिपलों के 62 पद एनसीवीटी मानकों के अनुसार भरे जाएंगे। सुन्नी आईटीआई में फैशन टेक्नोलॉजी का नया ट्रेड शुरू होगा।
रोजगार के भी अवसर, नौकरी ही नौकरी
ढांचागत विकास के बड़े प्रोजेक्टों को प्राथमिकता सूची में डाला गया, ताकि इनमें आने वाली बाधाओं को जल्द दूर किया जा सके। सोलन के सायरी में पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस बनेगा। आबकारी एवं कराधान विभाग में स्टेनोग्राफर के 5, स्टेनो टाइपिस्ट के 8, इंस्पेक्टरों के 7 पद भरे जाएंगे। क्लास फोर के 8 पद सरप्लस पूल से और आईटी में 20 पद आउटसोर्सिंग से भरे जाएंगे।
तकनीकी शिक्षा विभाग में लॉ अफसर का एक पद सृजित किया गया। आवासीय आयुक्त दिल्ली में वरिष्ठ सहायकों के 3 पद सेकेंडमेंट पर भरे जाएंगे। हिमाचल पुलिस सेवा अफसरों के 5 पद लोक सेवा आयोग से भरे जाएंगे। मनाली माउंटेनियरिंग संस्थान में ट्रेनरों के खाली पद भरे जाएंगे।
इनके बारे में भी जरा पढ़ लीजिए
बाल कल्याण परिषद से अनुभाग अधिकारी का एक पद सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में भेजा गया। आईपीएच विभाग में उपनिदेशक का एक पद अभियोजन विभाग के डिप्टी जिला न्यायवादी और विधि अधिकारी का एक पद सहायक जिला न्यायवादी से भरा जाएगा। पांचवें राज्य वित्त आयोग में प्रधान सचिव शहरी विकास को सदस्य और सलाहकार योजना को सचिव लगाया गया।
राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक, संयुक्त निदेशक और उप निदेशक के मोबाइल फोन बिल सरकारी रिइंबर्स करेगी। किरतपुर-नेरचौक फोर लेन का काम कर रही कंपनी मैसर्ज जीएचवी को कनैड में स्टोन क्रशर लगाने के लिए स्कूल से दूरी की शर्त में छूट दी गई।
कैबिनेट में दूर हुए मैडम के शिकवे
मंत्रिमंडल बैठक के बहाने धर्मशाला आई आईपीएच एवं बागवानी मंत्री विद्या स्टोक्स के गिले शिकवे भी दूर हो गए। बैठक में उनके उस बयान की चर्चा भी हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि बागवानी निदेशक को दिए गए सेवा विस्तार की उन्हें जानकारी नहीं दी गई। बैठक में उन्हें बताया गया कि एचओडी की नियुक्ति या पुनर्नियुक्ति पर मुख्यमंत्री ही फैसला लेते हैं। ये रूटीन प्रक्रिया है।
बड़ोह कॉलेज का स्टाफ टेकओवर- कैबिनेट ने बड़ोह के पंडित अनंत राम डिग्री कॉलेज के टीचिंग एवं नान टीचिंग स्टाफ की सेवाएं टेक ओवर करने का फैसला लिया। इसके अलावा बड़ोह संस्कृत कॉलेज में प्रोफेसर का एक पद सृजित होगा। कांगड़ा के दरिणी और आलमपुर में सब तहसील खोलने को मंजूरी दी गई। ये घोषणा हाल ही में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने की थी।
इन्वेस्टर मीट से आएंगे इतने करोड़
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में 75वीं सिंगल विंडो की बैठक में 2500 करोड़ के औद्योगिक प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसके अलावा 1500 करोड़ के नए प्रस्तावों को सैद्धांतिक तौर पर स्वीकार किया गया। दस्तावेज पूरे न होने के कारण इन प्रस्तावों को संबंधित विभागों को भेजा गया है। उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने इसका श्रेय दो महीने पहले मुंबई, बंगलूरू और अहमदाबाद में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई इन्वेस्टर मीट को दिया है।
बैठक में 28 नए उद्योगों और 32 वर्तमान उद्योगों की विस्तार इकाइयों को सिंगल विंडो कमेटी ने क्लीयर किया। इन औद्योगिक प्रस्तावों के जमीन पर उतरने से करीब 8000 लोगों को रोजगार मिलेगा। नए प्रस्तावों में ज्यादातर सीए स्टोर, फार्मा, खाद्य प्रसंस्करण और वाइन के हैं।
ड्रग्स के उत्पादन पर लगी ये बंदिशें हटीं
इन्वेस्टर मीट के अनुभवों के आधार पर बैठक में एक बड़ा फैसला भी सरकार ने लिया है। अहमदाबाद के उद्योगपतियों के आग्रह पर राज्य में बल्क ड्रग्स के उत्पादन पर लगी बंदिशों को हटा दिया है। अब सरकार पर्यावरण संरक्षण के अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने वाली फार्मा कंपनियों को यहां दवाओं का कच्चा माल तैयार करने की अनुमति देगी। साथ ही मैसर्ज ल्यूपिन और मैसर्ज टॉरेंट फार्मा के कुल 450 करोड़ के निवेश प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई।
बैठक के बाद प्रेस वार्ता में उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि हमारे फार्मा उद्योग देश विदेश के लिए दवाएं बना रहे हैं, लेकिन यहां कच्चा माल न बनने के कारण अन्य राज्यों को लाभ हो रहा है। उन्होंने कहा कि दूसरे चरण में अब राज्य सरकार दिल्ली, लुधियाना, चेन्नई और हैदराबाद में इन्वेस्टर मीट करेगी, क्योंकि पहले चरण के परिणाम काफी अच्छे रहे हैं। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव वीसी फारका, प्रधान सचिव उद्योग आरडी धीमान, प्रधान सचिव वित्त डॉ. श्रीकांत बाल्दी, उद्योग विभाग के निदेशक राजेंद्र सिंह, उद्योग सलाहकार राजेंद्र चैहान शामिल थे।
मंजूर किए गए नए औद्योगिक प्रस्ताव
फर्म-उद्योग==============निवेश
क्रिस्पी बाइट्स============1857 लाख
फतेह एंटरप्राईजिज==========3950 लाख
माइक्रो सीमलेस===========7900 लाख
हैफको एग्रो इन्फ्रास्ट्रक्चर======5435 लाख
हिम हैल्दी फार्म फूड========5474 लाख
ल्यूपिन लिमिटेड===========34800 लाख
रॉक स्टॉर्म डिस्टिलरीज=======15000 लाख
पुराने उद्योगों के विस्तार के प्रस्ताव
फर्म-उद्योग==============निवेश
वर्धमान स्पीनिंग मिल्स========228 करोड़
इंदो रमा================250 करोड़
तिरूपति विल्लनेस==========29.54 करोड़
एक्वा विटोई फार्मासिटिकल=====17.78 करोड़
इंदोरमा उद्योग लिमिटेड=======250 करोड़
बेक्टर्ज फूड स्पेशियलिस्ट======32.67 करोड़
महले फीटर सिस्टम इंडिया=====13.70 करोड़
मेडिसेफ फार्मा============26.75 करोड़
खनन की रॉयल्टी और सजा दोनों बढ़ी
हिमाचल सरकार ने खनन नियमों में बदलाव कर अवैध खनन को अपराध की श्रेणी में ला दिया है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में धर्मशाला में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में नए नियमों को मंजूरी दी गई। 1971 के इन नियमों में अब 43 साल बाद बड़े बदलाव हुए हैं। कैबिनेट के बाद उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने प्रेस वार्ता में खनन नियमों के प्रावधानों की जानकारी दी।
सरकार ने वैध खनन की रॉयल्टी को 50 फीसदी बढ़ा दिया है। अवैध खनन पर अब जुर्माना और जेल दोनों सजाओं का पहली बार प्रावधान किया गया है। अवैध खनन पर गाड़ी पर पेनल्टी लगेगी। ये जब्त भी की जा सकेगी और 2 साल जेल का प्रावधान भी नियमों में किया गया है। बिना पंजीकरण क्रशर चलाने पर 50 हजार रुपये जुर्माना और एक साल जेल का प्रावधान किया है।
रेत-बजरी की डंपिंग या स्टोरेज पर इतना जुर्माना लगेगा
रेत-बजरी की डंपिंग या स्टोरेज पर 25 हजार जुर्माना होगा। अवैध ट्रांसपोर्टेशन पर गाड़ी को अब 10 के बजाय 15 हजार पेनल्टी और 2 साल जेल का प्रावधान किया गया है। खनन पट्टे की लीज डीड का उल्लंघन करने यानी गलत तरीके से खनन करने पर 50 हजार जुर्माना और एक साल जेल या दोनों सजाएं हो सकती हैं। माइनिंग लीज या क्रशर से दूरी को नए सिरे से तय किया गया है।
पुल के ऊपर 200 मीटर और नीचे 500 मीटर तक खनन नहीं होगा। नेशनल हाईवे पर 100 मीटर, स्टेट हाईवे पर 25 मीटर और संपर्क सड़क पर 10 मीटर तक खनन पर रोक रहेगी। नगर परिषद एरिया से 2 किमी और नगर पंचायत एरिया से ये दूरी 1 किमी होनी चाहिए।
माइनिंग लीज की बोली अब इतने अरसे के लिए
पानी की स्कीम से 200 मीटर दूरी जरूरी होगी। पर्यावरण मंजूरियों वाली माइनिंग लीज की बोली 10 साल के लिए और वन मंजूरियों वाली लीज की बोली 15 साल के लिए लगेगी। क्रशर या लीज के लिए उद्योग विभाग अब लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया करेगा। जेसीबी से खनन नहीं होगा। इसके लिए 2 लाख रुपये की सिक्योरिटी देकर मंजूरी लेनी होगी।
जब्त माल को बेचने के लिए विभाग शॉर्ट टर्म परमिट जारी करेगा। इसके लिए एक कमेटी बनेगी। माइनिंग लीज लेने वालों को अब माइनिंग प्लान के लिए एक तकनीकी अफसर की तैनाती करनी होगी, जो सुनिश्चित करेगा कि खनन जमा करवाए प्लान के अनुसार हो रहा है।
60 रुपये प्रति मीट्रिक टन होगी रॉयल्टी- उद्योग सचिव आरडी धीमान ने बताया कि नई रॉयल्टी अब 40 रुपये के बजाय 60 रुपये प्रति मीट्रिक टन होगी। सरकार खनन से हर साल करीब 150 करोड़ कमाती है। इस कमाई में 60 करोड़ की सालाना बढ़ोतरी का अनुमान है।
अफसर की मर्जी नहीं चलेगी
पंचायतें नहीं दबा सकेंगी एनओसी- वर्तमान में पंचायतों की एनओसी के बिना खनन पट्टा या क्रशर स्थापित नहीं हो सकता। कई पंचायतें ये एनओसी दबाए रखती हैं। अब एनओसी पर फैसले के लिए 3 महीने का वक्त होगा। इसके बाद पंचायत की मंजूरी समझी जाएगी।
बस बॉडी पर टैक्स कम करने का प्रस्ताव वापस- हिमाचल में बस बॉडी बनाने के उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए वैट को 13 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी करने के प्रस्ताव पर सहमति नहीं बनी। अंत में इसे वापस ले लिया गया। तय हुआ कि अब बजट सत्र के दौरान इस बारे में कोई फैसला होगा। हिमाचल में एचआरटीसी अब रेडिमेड बसें ले रहा है और निजी बस ऑपरेटर प्रदेश से बाहर ही बसें बनवा रहे हैं।