आईपीएच में पाइप खरीद में गड़बड़ी की आशंका, सरकार करेगी मामले की जांच
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पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में तीन साल में पाइप खरीद मामले की जयराम सरकार जांच कराएगी। यह बात सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य (आईपीएच) मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने बुधवार को विधानसभा में कही।
उन्होंने वर्ष 2015-16 से 2017-18 तक पेयजल और सिंचाई योजनाओं के लिए पाइप खरीद में बड़े गड़बड़झाले की आशंका जताई। विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान ठाकुर ने कहा कि पूर्व में सरकार ने चहेतों को फायदा देने के लिए केंद्रीय विजिलेंस आयोग (सीवीसी) गाइडलाइन से भी छेड़छाड़ की।
इससे टेंडर में ज्यादा कंपनियां भाग नहीं ले पाईं। जयराम सरकार ने इस प्रक्रिया को बदलने का फैसला लिया है। अगर टेंडर में रेट कांट्रेक्ट ज्यादा होता है और खुले बाजार में पाइपों के दाम कम हैं तो सरकार ओपन मार्केट से पाइप खरीदने पर विचार करेगी।
मंत्री ने यह जानकारी विधायक बलवीर वर्मा के प्रश्न के उत्तर में दी। महेंद्र सिंह ने कहा कि पाइपों की खरीद के लिए मंडल से मुख्य अभियंता स्तर पर कमेटी बनी है। इनकी सिफारिशों के आधार पर प्रदेश स्तर पर मुख्य अभियंता की अध्यक्षता में बैठक होती है। इसमें पाइप खरीद का निर्णय लिया जाता है।
मंत्री बोले पाइप खरीद में अंतर होना जांच का विषय
आगामी वित्तीय वर्ष के लिए की जाने वाली पाइप खरीद के लिए 15 मार्च को विभागीय स्तर पर बैठक होगी, जिसमें सरकार सभी सुझावों पर अमल करेगी। विधायक सुरेश कश्यप, नरेंद्र ठाकुर, मुकेश अग्निहोत्री और बलबीर वर्मा ने इस मामले को लेकर अनुपूरक प्रश्न पूछे।
पिछले तीन वर्षों में पानी की विभिन्न व्यास की 44,013 मीट्रिक टन जीआई पाइप व 8,89,270 मीटर एचडीपीई पाइप का क्रय ओपन टेंडर से किया गया। तीन वर्षों में विभिन्न व्यास की 5,21,649 मीटर
एमएसईआरडब्ल्यू पाइप, 1,55,755 मीटर एचडीपीई पाइप 57,492 मीटर जीआई पाइप और 69,070 मीटर आरसीसी पाइप ठेकेदारों की ओर से खरीदे गए सीवीसी की गाइडलाइन में छेड़छाड़ से कई इंपेनल कंपनियां बाहर हो गईं और दो कंपनियां ही बचीं।
वर्ष, 2015-16 में 3,42,192 मीटर के करीब पाइप 105 करोड़ से खरीदे गए वर्ष, 2016-17 में 1,07,000 पाइप 312 करोड़ में खरीदे गए वर्ष 2017-18 में 72,327 मीटर पाइप 20 करोड़ से खरीदे गए