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विस चुनाव: पहाड़ पर कभी टिक नहीं पाया तीसरा मोर्चा, ये रही वजह

Mon, 30 Oct 2017 10:34 AM IST
प्रखर दीक्षित/अमर उजाला, शिमला
प्रखर दीक्षित/अमर उजाला, शिमला Updated Mon, 30 Oct 2017 10:34 AM IST
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himachal assembly election 2017 Third Front in Himachal

हिमाचल में अभी तक भाजपा-कांग्रेस की राजनीति ही हावी रही है। दोनों दलों के अलावा तीसरा मोर्चा पहाड़ पर अपने पैर नहीं जमा पाया है। देश की राजनीति की धुरी मानी जाने वाली भाजपा और कांग्रेस को छोड़ दें तो अन्य कोई भी राष्ट्रीय या क्षेत्रीय दल प्रदेश की जनता के सामने मजबूत विकल्प नहीं बन पाया है। यही कारण है कि इस बार राष्ट्रीय या क्षेत्रीय दलों को हिमाचल की हर सीट के लिए उम्मीदवार तक नहीं मिले हैं। 

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प्रदेश के विधानसभा चुनाव में 338 प्रत्याशी मैदान में ताल ठोक चुके हैं। इनमें भाजपा-कांग्रेस के 68-68 उम्मीदवार हैं। कुछ बागी भी निर्दलीय के तौर पर चुनाव मैदान में हैं। करीब आधा दर्जन राष्ट्रीय और एक दर्जन से ज्यादा क्षेत्रीय दल भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन भाजपा-कांग्रेस को छोड़ अन्य राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दल सभी सीटों के लिए प्रत्याशी खड़े नहीं कर पाए हैं।
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चुनावी समर में उतरने वाले नेता भाजपा-कांग्रेस के अलावा किसी भी राष्ट्रीय या क्षेत्रीय दल से टिकट लेने में ज्यादा रुचि नहीं दिखाते। वे आजाद प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरना ज्यादा उचित समझते हैं। इस विस चुनाव में भी 111 प्रत्याशी बतौर निर्दलीय मैदान में हैं, जबकि इन दलों को कुल मिलाकर 68 प्रत्याशी भी नहीं मिले हैं।

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1990 में बना था सबसे बड़ा विकल्प

himachal assembly election 2017 Third Front in Himachal

1990 से पहले तक प्रदेश में कांग्रेस की एकमात्र दल सत्ता पर काबिज रहता था। 1990 के चुनाव में पहली बार ऐसा दौर आया, जब भाजपा-कांग्रेस के अलाव जनता दल एक तीसरा बड़ा विकल्प बनकर उभरा। प्रदेश में सरकार भले ही इस चुनाव में भाजपा की बनी, लेकिन मुख्य विपक्ष के रूप में जनता दल ही उभरकर सामने आया।

उस दौरान कांग्रेस तीसरे नंबर की पार्टी बन गई। हालांकि, यह तीसरा विकल्प भी ज्यादा दिन नहीं टिका और जनता दल के ज्यादातर नेता कांग्रेस में शामिल हो गए। इसके बाद से अब तक कई बार छोटे बड़े दलों ने तीसरा विकल्प बनने का प्रयास किया, लेकिन कुछ एक सीटों तक ही उनका प्रभाव सीमित रह गया।

राष्ट्रीय स्तर के दल भी रहे संघर्षरत

himachal assembly election 2017 Third Front in Himachal

सूबे में इस चुनाव में भी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दल अपने अस्तित्व के लिए संघर्षरत ही दिख रहे हैं। दिल्ली और पंजाब में जबरदस्त प्रभाव डालने वाली आम आदमी पार्टी करीब दो साल तक कोशिश के बाद एन चुनाव से पहले सूबे से गायब हो गई।

66 सीटों पर पिछला चुनाव लड़ने वाली बसपा के झंडे तले सिर्फ 41 प्रत्याशी ही चुनाव मैदान में हैं। समाजवादी पार्टी से केवल एक सीट पर उम्मीदवार उतरा है।

माकपा के 13 प्रत्याशी और आल इंडिया फारवर्ड ब्लॉक ने केवल दो प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे हैं। चुनाव मैदान में उतरे कुल 338 प्रत्याशियों में से 140 निर्दलीय के रूप में मैदान में हैं।

क्षेत्रीय दल हुए नदारद

himachal assembly election 2017 Third Front in Himachal

क्षेत्रीय दल के रूप में पंडित सुखराम और महेश्वर सिंह ने प्रदेश की जनता को तीसरा विकल्प देने का प्रयास किया। दोनों ने कई कई सीटों पर पिछले विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी भी उतारे, लेकिन जीतने वालों की संख्या कम होने के चलते ये दल भी समय के किनारा कर गए।

यही नहीं, नेताओं ने कांग्रेस और भाजपा में खुद को शामिल कर तीसरे विकल्प की उम्मीद को खत्म कर दिया। 2017 के विस चुनावों में सभी 68 विधानसभा क्षेत्रों में अपने प्रत्याशियों के लिए चुनाव आयोग से समान चुनाव चिन्ह मांगने वाले क्षेत्रीय तथा गैर मान्यता प्राप्त पंजीकृत दलों को भी एक तिहाई सीटों पर प्रत्याशी मिल पाए। समान चुनाव चिन्ह मांगने वाले 13 दल कुल मिलाकर भी 27 प्रत्याशी ही उतार सके। 

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