92 साल की शौंकू देवी ने किया ऐसा काम पुलिस ने दिया शांति दूत पुरस्कार
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चुनाव के दृष्टिगत कंडाघाट की 92 वर्षीय शौंकू देवी के बंदूक जमा करवाने पर पुलिस ने उसे शांतिदूत पुरस्कार से नवाजा। शौंकू ने अपनी बंदूक को कंडाघाट थाने में जमाकर समाज में एक मिसाल कायम की है।
शौंकू देवी कंडाघाट की बीशा पंचायत की रहने वाली हैं। वृद्ध महिला, नियमों और जिला प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए कंडाघाट थाने पहुंची और बंदूक को जमा करवाया।
एसपी मोहित चावला ने कहा कि वृद्ध महिला चुनाव के दृष्टिगत हथियारों को लेकर जिला प्रशासन की ओर से दिए दिशा-निर्देशों का पालन कर एक रोल मॉडल बन गई हैं।
1968 में बना है बंदूक का लाइसेंस
'बुजुर्ग महिला शौंकू देवी को उनके इस सराहनीय कार्य के लिए जिला पुलिस सलाम करती है। शौंकू देवी को इस कार्य के मद्देनजर शांतिदूत पुरस्कार से नवाजा गया।'
एसएचओ कंडाघाट संदीप शर्मा ने बताया कि उपमंडल कंडाघाट में 1000 के करीब बंदूकें लोगों के पास हैं जिनमें से 700 बंदूकें जमा हो चुकी है। हथियार जमा करने की अंतिम तिथि 30 अक्तूबर है।
इस बंदूक का लाइसेंस 1968 में बना है। 92 साल की बुजुर्ग महिला ने उम्र के इस पड़ाव पर भी थाने आकर बंदूक जमा कर प्रशासन के आदेशों का पालन ही नहीं किया बल्कि लोगों को भी शांतिपूर्वक जीवन जीने की प्रेरणा दी है।