विस चुनाव: हिमाचल में साल दर साल बढ़े कुर्सी के दावेदार, ये रहे आंकड़े
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हिमाचल प्रदेश के सियासी समर में हर बार विजेता भले ही 68 हों, लेकिन विजेता की इस कुर्सी पर बैठने के लिए हर चुनाव में बड़ी संख्या में प्रत्याशी उतरते हैं। महज 68 सीटों वाली हिमाचल विधानसभा के सदस्य बनने के लिए चुनावों में साढ़े तीन सौ से चार सौ और कभी-कभी साढ़े चार सौ तक प्रत्याशी मैदान में उतरते हैं।
खास बात यह है कि इनमें से साठ फीसदी से ज्यादा प्रत्याशी तो अपनी जमानत तक नहीं बचा पाते, लेकिन जमानत जब्त और किरकिरी होने के बावजूद चुनावी समर में कूदने का सियासतदानों का क्रेज कम होने का नाम नहीं ले रहा। साल 2012 के ही चुनाव की बात करें तो इसमें छोटे बड़े दलों के अलावा निर्दलीय मिलाकर कुल 459 प्रत्याशियों ने भाग लिया।
इनमें 304 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। जमानत जब्त होने वालों में राष्ट्रीय दल से लेकर प्रादेशिक और पंजीकृत के अलावा निर्दलीय शामिल हैं। यही हाल इससे पहले के चुनावों में रहा। साल 2007 के चुनावों में 336 प्रत्याशी मैदान में उतरे, जिनमें 187 की जमानत जब्त हो गई।
इसी तरह साल 2003 में 408 में से 241, 1993 में उतरे 369 में से 212, 1990 में 454 में 312, 1982 में 441 में से 289 ने अपनी जमानत गंवा दी। इनमें सबसे ज्यादा निर्दलीय तथा छोटी पार्टियों के प्रत्याशी होते हैं, जिनकी जमानत जब्त हो जाती है। बड़े राजनीतिक दलों के प्रत्याशी अपनी जमानत बचाने में सफल रहते हैं।
1977 में थे सबसे ज्यादा कुर्सी के चाहवान
कुर्सी की तमन्ना रखने वालों की संख्या सबसे ज्यादा 1977 के विधानसभा के चुनावों में थी। इस चुनाव में कुल 671 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। इनमें राष्ट्रीय दलों के 191, राज्य स्तरीय दलों के 31 और 439 निर्दलीय प्रत्याशी थे।
हालांकि, इनमेें 477 प्रत्याशी ऐसे थे, जिनकी जमानत जब्त हो गई। इसके अलावा 1982 के चुनाव में भी 441 प्रत्याशियों ने अपनी किस्मत आजमाई, लेकिन इनमें भी 289 की जमानत जब्त हो गई।
नुकसान पहुंचाने के चक्कर में बढ़ जाता है निर्दलीयों का कुनबा
हिमाचल में लोग आम तौर पर बड़े राजनीतिक दलों में ही प्रदेश का भविष्य तलाशते हैं। लोगों की इसी इच्छा के चलते बड़े राजनीतिक दलों से टिकट पाने की तमन्ना काफी संख्या में लोगों के मन में रहती है।
जिन्हें टिकट मिलता है वह भी पर्चा भरते हैं और जिन्हें नहीं मिलता, वे अकसर उसी दल के प्रत्याशी को हराने के मकसद से चुनाव मैदान में उतर जाते हैं। नतीजतन, नुकसान पहुंचाने का मकसद अकसर निर्दलीय प्रत्याशियों का कुनबा बढ़ा देता है।
कुर्सी के चाहवानों के हाल
साल कुल प्रत्याशी जमानत जब्त
2012 459 304
2007 336 187
2003 408 241
1993 369 212
1990 454 312
1985 294 159
1982 441 289
1977 671 477