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शिमला: सरकार को झटका, हाईकोर्ट ने हिमुडा में सीईओ पद पर नियुक्ति की रद्द, पात्र अधिकारी चुनने का दिया निर्देश

Fri, 04 Sep 2026 05:07 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 04 Sep 2026 05:07 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने हिमुडा में वरिष्ठता और नियमों को दरकिनार कर दी गई पदोन्नति और नियुक्ति पर राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने हिमुडा के सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी-सह सचिव) पद से संबंधी 27 मई, 2025 की अधिसूचना को तत्काल निरस्त करते हुए नियुक्ति को गैरकानूनी ठहराकर रद्द कर दिया है। 

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Appointment to the post of CEO at HIMUDA cancelled due to a seniority dispute; eligible officer to be selected
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमुडा में वरिष्ठता और नियमों को दरकिनार कर दी गई पदोन्नति और नियुक्ति पर राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने हिमुडा के सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी-सह सचिव) पद से संबंधी 27 मई, 2025 की अधिसूचना को तत्काल निरस्त करते हुए नियुक्ति को गैरकानूनी ठहराकर रद्द कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार और हिमुडा को निर्देश दिया है कि वे 2012 के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के मुताबिक सीईओ कम सेक्रेटरी के पद के लिए याचिकाकर्ता अंजोरी कपूर समेत पात्र अधिकारियों के नाम पर दो सप्ताह के भीतर विचार करें।

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न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने प्रतिवादी सुरेंद्र कुमार की ओर से इस पद पर रहते अब तक प्राप्त वित्तीय लाभों को उनसे वापस न लेने का निर्देश दिया है। प्रदेश सरकार ने जूनियर अधिकारी को सीईओ बना दिया था और उनसे वरिष्ठ अंजोरी कपूर के लिए सलाहकार का नया पद सृजित किया था। अंजोरी ने सरकार के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उल्लेखनीय है कि याचिकाकर्ता और प्रतिवादी सुरेंद्र कुमार वशिष्ठ दोनों हिमुडा में कार्यरत हैं।

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सेवा रिकॉर्ड के अनुसार याचिकाकर्ता प्रतिवादी से वरिष्ठ हैं। 9 दिसंबर, 2022 को याचिकाकर्ता को हिमुडा के एकमात्र नियमित कैडर पद पर मुख्य अभियंता के रूप में पदोन्नत किया गया था। इसके बाद प्रतिवादी (जो उस समय अधीक्षण अभियंता थे) के पद को उनके व्यक्तिगत स्तर पर अपग्रेड करके मुख्य अभियंता का दर्जा दे दिया गया, जिसे पद खाली होने पर स्वतः डाउनग्रेड होना था। मई 2025 में हिमुडा के पुनर्गठन का हवाला देते हुए वरिष्ठ अधिकारी (अंजोरी कपूर) को सलाहकार (नीति एवं रणनीति) के पद पर री-डेजिग्नेट कर दिया, जबकि कनिष्ठ अधिकारी प्रतिवादी को हिमुडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी-सह-सचिव के पद पर नियुक्त कर दिया।

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कनिष्ठ को लाभ के लिए प्रशासनिक पुनर्गठन का प्रस्ताव एक ही दिन में कर दिया तैयार
अदालत ने कहा कि मुख्य अभियंता का कैडर केवल एक ही नियमित पद का है। किसी अधिकारी के पद को व्यक्तिगत उपाय के रूप में अपग्रेड करने से नया नियमित पद सृजित नहीं होता। अदालत ने कहा कि प्रतिवादी की पदोन्नति को नियमित कैडर पद के समकक्ष नहीं माना जा सकता। अधिकारी सह-सचिव के पद के लिए निर्धारित भर्ती एवं पदोन्नति नियम, 2012 के तहत शर्तों को पूरा नहीं करते थे, इसलिए उनकी नियुक्ति अवैध और नियमों के विपरीत है। प्रशासनिक पुनर्गठन का प्रस्ताव एक ही दिन में बदलकर इस प्रकार तैयार किया गया जिससे कनिष्ठ अधिकारी को अनुचित लाभ मिले और वरिष्ठ अधिकारी को उनके अधिकार से वंचित किया जा सके। की अदालत ने प्रतिवादी सुरेंद्र कुमार की ओर से इस पद पर रहते हुए अब तक प्राप्त किए गए वित्तीय लाभों को उनसे वापस नहीं लेने का निर्देश दिया गया है। सरकार ने जूनियर एवं अपात्र अधिकारी को सीईओ बना दिया था और वरिष्ठ अंजोरी कपूर के लिए एडवाइजर की नई पोस्ट क्रिएट की थी। अंजोरी कपूर ने सरकार के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उल्लेखनीय है कि याचिकाकर्ता और प्रतिवादी सुरेंद्र कुमार वशिष्ठ दोनों हिमुडा में कार्यरत हैं। सेवा रिकॉर्ड के अनुसार याचिकाकर्ता, प्रतिवादी से वरिष्ठ हैं।

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