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हाईकोर्ट का सरकार को झटका: जल शक्ति विभाग में जूनियर की पदोन्नति पर सीनियर स्वतः होंगे पात्र

Wed, 23 Sep 2026 04:30 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 23 Sep 2026 04:30 AM IST
सार

 प्रदेश हाईकोर्ट ने जल शक्ति विभाग में वरिष्ठता और पदोन्नति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता कनिष्ठ अभियंताओं को उनके जूनियर अधिकारियों (एग्जीक्यूटिव इंजीनियर) की पदोन्नति तिथि से ही अधिशासी अभियंता के पद पर पदोन्नत कर सभी परिणामी लाभ प्रदान किए जाएं।

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High Court Setback for Govt from High Court: Seniors Automatically Eligible for Promotion Over Juniors
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जल शक्ति विभाग में वरिष्ठता और पदोन्नति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता कनिष्ठ अभियंताओं को उनके जूनियर अधिकारियों (एग्जीक्यूटिव इंजीनियर) की पदोन्नति तिथि से ही अधिशासी अभियंता के पद पर पदोन्नत कर सभी परिणामी लाभ प्रदान किए जाएं। न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की अदालत ने केशव चंद्र शर्मा और अन्य की याचिका पर फैसला सुनाते हुए सरकार की 8 वर्ष की सेवा शर्त संबंधी दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया।

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राज्य सरकार की इस दलील को अदालत ने पूरी तरह खारिज कर दिया कि याचिकाकर्ता वर्ष 2013-14 में 8 साल की सेवा शर्त पूरी नहीं करते थे। अदालत ने भर्ती एवं पदोन्नति नियम 1997 के नियम 11 को स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि किसी कैडर में कोई जूनियर अधिकारी कुल सेवा अवधि के आधार पर पदोन्नति के लिए पात्र हो जाता है, तो उस कैडर में उससे वरिष्ठ सभी अधिकारी स्वतः ही पदोन्नति के विचार-क्षेत्र में पात्र माने जाएंगे और उन्हें जूनियर से ऊपर रखा जाएगा। अदालत ने कहा कि जब राज्य सरकार ने 2015 में ही वरिष्ठता सूची को ठीक कर दिया था, तो याचिकाकर्ताओं को उनके जूनियरों से पहले पदोन्नत न करना अवैध, मनमाना और संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है।

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हाईकोर्ट ने कैचअप नियम का पालन करते हुए कहा कि यदि सामान्य वर्ग का वरिष्ठ अधिकारी आरक्षित वर्ग के जूनियर के अगले पद पर जाने से पहले पदोन्नत होकर उसी स्तर पर पहुंच जाता है, तो उसकी मूल वरिष्ठता पुनः बहाल मानी जाएगी। निर्देश दिए हैं यदि अधिशासी अभियंता के पद खाली न हों, तो अतिरिक्त पद सृजित किए जाएं। पदोन्नति प्रक्रिया 3 महीने में पूरी की जाए। बकाया वित्तीय लाभों का भुगतान 6 महीने के भीतर किया जाए। तय सीमा में भुगतान न होने पर 6 फीसदी वार्षिक दर से ब्याज देना होगा। ऑगौरतलब है कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति 1978 में हुई थी और वे वरिष्ठता सूची में ऊपर थे। हालांकि, आरक्षण लाभ के कारण उनके कनिष्ठ सहयोगियों को 2004-05 में ही सहायक अभियंता बना दिया गया, जबकि याचिकाकर्ताओं को यह पदोन्नति 2008 में मिली।

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वक्फ बोर्ड पुनर्गठन मामले में जनहित याचिका का निपटारा
प्रदेश हाईकोर्ट ने एचपी राज्य वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन और इसके सदस्यों के नामांकन से जुड़ी एक जनहित याचिका का निपटारा कर दिया है। न्यायाधीश संदीप शर्मा और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने राज्य सरकार की ओर से वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन के लिए 12 मुस्लिम सदस्यों के नामांकन की अधिसूचना जारी किए जाने के बाद इस कार्यवाही को बंद कर दिया है। यह मामला राज्य वक्फ बोर्ड के गठन, बोर्ड के सदस्यों के मनोनयन और इसके बाद बोर्ड के अध्यक्ष के चुनाव की कानूनी प्रक्रिया से संबंधित था। प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव (राजस्व) की ओर से हस्ताक्षरित 18 सितंबर 2026 की अधिसूचना अदालत के समक्ष पेश की गई। अधिसूचना के अनुसार राज्यपाल ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 की धारा 12 और मूल वक्फ अधिनियम 1995 की धारा 14 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए मुस्लिम समुदाय के 12 सदस्यों को राज्य वक्फ बोर्ड के सदस्य के रूप में नामांकित किया है। उल्लेखनीय है कि जनहित याचिका में वक्फ अधिनियम के तहत राज्य वक्फ बोर्ड की स्थापना करने और मुस्लिम समुदाय से इसके वैधानिक सदस्यों को नामांकित करने की मांग की गई थी।

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