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सुलह से विवादों का हल होने पर कोर्ट में कम आएंगे मामले: जोसेफ
Sun, 02 Jun 2019 06:24 PM IST
अरविन्द ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कुल्लू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कुल्लू
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sun, 02 Jun 2019 06:24 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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मध्यस्थता एवं सुलह से विवादों के समाधान की सबसे बड़ी खूबसूरती है कि इस व्यवस्था से न्यायालयों में मामलों का दबाव कम होता है। दोनों पक्षों में सौहार्द और प्रेम भाव कायम रहता है। सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने यह बात कही। उन्होंने शनिवार को ढालपुर के अटल सदन कुल्लू के सभागार में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र रेफरल व मध्यस्थता प्रक्रिया विषय पर आयोजित सम्मेलन में संबोधित किया।
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सम्मेलन में प्रदेश के सात जिलों के वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों तथा मध्यस्थता के लिए प्रशिक्षित अधिवक्ताओं ने भाग लिया। जस्टिस कुरियन जोसेफ ने कहा कि मध्यस्थता से प्राय सिविल मामलों का ही निपटारा करने की धारणा है। इसके कार्यक्षेत्र को और अधिक बढ़ाया जाना चाहिए। इस व्यवस्था को जिला व उपमंडल स्तरों पर कार्यकारी दंडाधिकारियों की ओर से अपनाकर अधिक से अधिक राजस्व तथा अन्य सिविल मामलों का समाधान करने की आवश्यकता है। कार्यकारी दंडाधिकारियों को इस संबंध में प्रशिक्षण प्रदान किया जाना चाहिए।
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इससे न्यायालयों का अनावश्यक बोझ कम होगा और न्याय प्राप्त करने वालों की कतार में इंतजार करने वालों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि हालांकि देशभर में मध्यस्थता से निपटान का प्रयास बेहद सफल रहा है और हजारों विवादों का समाधान इसी प्रक्रिया के माध्यम से किया जा रहा है। इसके लिए न्यायपालिका के पास प्रशिक्षित अधिकारी व अधिवक्ता मौजूद हैं।
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मध्यस्थता से करें विवादों का समाधान : न्यायमूर्ति धर्म चंद चौधरी
प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति धर्म चंद चौधरी ने अटल सदन कुल्लू में सेमिनार के दौरान कहा कि वैकल्पिक विवाद समाधान की विविध प्रक्रिया मौजूद है। इसमें मध्यस्थता, लोक अदालतें तथा आपसी सुलह विशेष तौर पर चलन में हैं और रोज सैकड़ों विवादों का समाधान किया जा रहा है।
मध्यस्थता से विवाद समाधान के दौरान पक्षकर तीसरे व्यक्ति के हस्तक्षेप तथा न्यायालय का सहारा लिए बिना आपसी झगड़ों का निवारण करते हैं। मध्यस्थ दोनों पक्षों को सुनने के पश्चात अर्द्ध-न्यायिक ढंग से मामले का निर्णय करता है। जस्टिस चौधरी ने कहा कि हमारे देश में विवाद सुलझाने की यह प्रक्रिया कोई नई नहीं है। सदियों से ग्रामीण स्तर पर पंच अथवा सर्वमान्य व्यक्ति दो पक्षों के बीच के झगड़ों का निपटारा करते आ रहे हैं।
कहा कि दूसरा सम्मेलन राज्य के शेष पांच जिलों के लिए निकट भविष्य में शिमला में करवाया जाएगा। न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर ने कहा कि विवाद सुलझाने की वैकल्पिक व्यवस्था आधुनिक है और आपसी संवाद का मौका देती है, संरचनात्मक है। सबसे बड़ी बात त्वरित, सरल व कम लागत की है।
न्यायाधीश चंद्र भूषण बारोवालिया ने कहा कि मध्यस्थता विवाद समाधान का एक प्रभावी माध्यम है और इससे समाज में शांति भी स्थापित होती है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण पुरेंद्र वैद्य ने स्वागत भाषण में कहा कि न्यायालयों में बड़ी संख्या में मुकद्दमों की भरमार के चलते विवादों के समाधान की वैकल्पिक व्यवस्था आज की जरूरत है।
इस मौके पर राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सदस्य सचिव प्रेम पाल रांटा, प्राधिकरण के प्रशासनिक अधिकारी गौरव महाजन, रजिस्ट्रार जनरल वीरेंद्र सिंह, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की पत्नी प्रोमिला चौधरी, सहायक महाधिवक्ता सत्येन वैद्य, उपायुक्त कुल्लू यूनुस, न्यायिक अधिकारी व बार एसोसिएशनों के पदाधिकारी भी मौजूद रहे।