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Shimla News: वन विभाग के मुख्यालय में तीन घंटे किया प्रदर्शन
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वन अधिकार कानून का विरोध
बोले, नए संशोधन से लोगों में पैदा हो रहा असमंजस संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सीपीआई (एम) की प्रदेश कमेटी ने वीरवार को टाॅलैंड स्थित वन विभाग के प्रधान मुख्य अरण्यपाल कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। तीन घंटे तक चले प्रदर्शन में वन अधिकार कानून के क्रियान्वयन को लेकर जारी पत्र को वापस लेने की मांग की गई।
दोपहर साढ़े तीन बजे के करीब सीपीआईएम की राज्य कमेटी के कार्यकर्ता प्रधान मुख्य अरण्यपाल के कार्यालय पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने इस दौरान वन अधिकार कानून के क्रियान्वयन को लेकर पैदा हुए असमंजस को लेकर नारेबाजी करना शुरू कर दी। प्रदर्शन के माध्यम से पूर्व माकपा विधायक राकेश सिंघा ने बताया कि विभाग ने 11 अप्रैल को जो पत्र जारी किया है, उसे वापस लिया जाए। सीटू के राज्य सचिव मंडल सदस्य विजेंद्र मेहरा ने कहा कि इस पत्र ने वनाधिकार कानून के क्रियान्वयन को लेकर असमंजस पैदा हो गया है। उधर करीब तीन घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद सीपीआईएम के नेताओं को प्रधान मुख्य अरण्यपाल ने अन्य वन अधिकारियों के साथ बैठक के लिए बुलाया। राज्य सचिव मंडल सदस्य विजेंद्र मेहरा ने बताया कि डेढ़ घंटे तक चली इस बैठक के बाद इस पत्र को वापस लेने का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर डॉ. कुलदीप तंवर और जगत राम समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
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बोले, नए संशोधन से लोगों में पैदा हो रहा असमंजस संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सीपीआई (एम) की प्रदेश कमेटी ने वीरवार को टाॅलैंड स्थित वन विभाग के प्रधान मुख्य अरण्यपाल कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। तीन घंटे तक चले प्रदर्शन में वन अधिकार कानून के क्रियान्वयन को लेकर जारी पत्र को वापस लेने की मांग की गई।
दोपहर साढ़े तीन बजे के करीब सीपीआईएम की राज्य कमेटी के कार्यकर्ता प्रधान मुख्य अरण्यपाल के कार्यालय पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने इस दौरान वन अधिकार कानून के क्रियान्वयन को लेकर पैदा हुए असमंजस को लेकर नारेबाजी करना शुरू कर दी। प्रदर्शन के माध्यम से पूर्व माकपा विधायक राकेश सिंघा ने बताया कि विभाग ने 11 अप्रैल को जो पत्र जारी किया है, उसे वापस लिया जाए। सीटू के राज्य सचिव मंडल सदस्य विजेंद्र मेहरा ने कहा कि इस पत्र ने वनाधिकार कानून के क्रियान्वयन को लेकर असमंजस पैदा हो गया है। उधर करीब तीन घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद सीपीआईएम के नेताओं को प्रधान मुख्य अरण्यपाल ने अन्य वन अधिकारियों के साथ बैठक के लिए बुलाया। राज्य सचिव मंडल सदस्य विजेंद्र मेहरा ने बताया कि डेढ़ घंटे तक चली इस बैठक के बाद इस पत्र को वापस लेने का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर डॉ. कुलदीप तंवर और जगत राम समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
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