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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shilai 52 villages Major decision: No more than 100 people to attend wedding processions; dowry and alcohol p

52 गांवों का बड़ा फैसला: बरात में 100 से ज्यादा लोग नहीं होंगे शामिल, दहेज और शराब पर प्रतिबंध

Thu, 22 Oct 2026 08:59 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिलाई (सिरमौर)।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिलाई (सिरमौर)। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 22 Oct 2026 08:59 PM IST
सार

अब विवाह समारोहों में बरातियों की संख्या 100 तक सीमित रहेगी। दहेज प्रथा पर रोक के साथ दूल्हा-दुल्हन सहित अन्य लोगों के नाचने पर पैसे देने की रस्म भी बंद करने का निर्णय लिया गया है।

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Shilai 52 villages Major decision: No more than 100 people to attend wedding processions; dowry and alcohol p
शिलाई खत (परगना) के 52 गांवों की बैठक। - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के सिरमाैर जिले के गिरिपार के शिलाई खत (परगना) के 52 गांवों ने शादी-विवाह में बढ़ती फिजूलखर्ची और दिखावे पर अंकुश लगाने के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं। अब विवाह समारोहों में बरातियों की संख्या 100 तक सीमित रहेगी। दहेज प्रथा पर रोक के साथ दूल्हा-दुल्हन सहित अन्य लोगों के नाचने पर पैसे देने की रस्म भी बंद करने का निर्णय लिया गया है। बरात में शराब ले जाने और परोसने पर भी प्रतिबंध रहेगा। इन नियमों का उल्लंघन करने पर 52 हजार रुपये दंड का प्रावधान किया है। शिलाई गांव स्थित माता ठारी के सांझा प्रांगण में खत के जेलदार दिनेश तोमर की अध्यक्षता में हुई बैठक में सर्वसम्मति से ये निर्णय लिए गए। 

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सामाजिक आयोजनों में सादगी को बढ़ावा देने पर सहमति
बैठक में विवाह समारोहों में अनावश्यक खर्च कम करने, गरीब और मध्य वर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ घटाने और पारंपरिक संस्कृति को संरक्षित रखने पर चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने सामाजिक आयोजनों में सादगी को बढ़ावा देने और अनावश्यक आर्थिक दबाव डालने वाली रस्मों को सीमित करने पर सहमति जताई। शिलाई खत में बेला, बाली कोटी, मानल, चामरा मोहराड, ग्वाली, शिलाई और नाया सहित क्षेत्र की पंचायतें शामिल हैं। इन 52 गांवों में नंबरदार राजस्व कर यानी मामला एकत्रित करता है।

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बरात में 100 से अधिक लोग नहीं होंगे शामिल

बैठक में तय किया कि शादी में बरातियों की संख्या 100 से अधिक नहीं होगी। लकड़ी कटाई की रस्म में भी केवल 20 से 25 लोग शामिल हो सकेंगे। इस अवसर पर अन्य लोगों और मेहमानों को आमंत्रित नहीं किया जाएगा। इसके अलावा समारोह में मीट खाने की प्रथा बंद करने का निर्णय लिया गया। विवाह समारोहों में टेंट और डीजे की व्यवस्था सीमित रखने पर सहमति बनी। डीजे केवल दो दिन चलाने की अनुमति होगी। लड़की की शादी में महिला संगीत के दिन भी डीजे लगाया जा सकेगा। बरात में शराब ले जाने और परोसने पर भी प्रतिबंध रहेगा।
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दहेज पर रोक, गहनों की संख्या भी निर्धारित
खत के प्रतिनिधियों ने दहेज प्रथा पूरी तरह बंद करने का फैसला लिया। पारंपरिक रीति-रिवाजों के तहत केवल निर्धारित सोबो-पाईतो (बर्तन देने की परंपरा) देने की बात कही गई। निर्णय के अनुसार, दुल्हन के लिए कानों के गहने, नाक का गहना, मंगलसूत्र, पैरों की पायल और चुटकी सहित पांच प्रकार के गहने निर्धारित किए हैं। गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी गहनों की यही सीमा तय की गई है। भांजे-भांजी की शादी में कपड़े और जूते देने की रस्म भी सीमित की गई है। अब ये वस्तुएं केवल दूल्हा, दुल्हन और उनकी माता को दी जाएंगी। परिवार या कुड़बे की धींटियों (बेटियों) एवं भांजियों को केवल लिफाफा दिया जाएगा, जबकि गांव की अन्य धींटियों एवं भांजियों को दान नहीं देने का निर्णय लिया गया।

नेवदा में 10 और मामा के ढंग में 501 रुपये तय
बैठक में नेवदा रस्म को पुरानी परंपरा के रूप में जारी रखने पर सहमति बनी। इसके तहत नेवदे के रूप में 10 रुपये और मामा के ढंग के रूप में 501 रुपये निर्धारित किए गए हैं। मामा के स्वागत की रस्म में भी बदलाव किया है। पहले दिन केवल बरतवारे यानी सगे मामा और मामी को शामिल किया जाएगा। अन्य मामाओं का स्वागत अगले दिन शाम पांच बजे होगा। इसी दिन दूल्हे के परिवार के सदस्य भी भोजन में शामिल होंगे।

दशूठन और दशराता में गांव से एक-एक सदस्य को न्योता
सामाजिक रस्मों को लेकर भी अहम निर्णय लिए गए। दशूठन और दशराता (बच्चे के जन्म पर समारोह) में गांव से केवल एक-एक सदस्य को आमंत्रित किया जाएगा। विवाह समारोह में दूल्हा-दुल्हन या अन्य लोगों के नाचने पर पैसे देने की प्रथा भी बंद होगी। बैठक में स्पष्ट किया कि शादी शिलाई क्षेत्र में हो या क्षेत्र से बाहर, शिलाई खत की ओर से निर्धारित नियम लागू रहेंगे। इसके अतिरिक्त शिलाई क्षेत्र में मनाए जाने वाले त्योहारों की तिथियां शिलाई से निर्धारित करने और पूरे खत में एक ही दिन त्योहार मनाने का निर्णय लिया गया। इससे क्षेत्र की पारंपरिक संस्कृति और सामाजिक एकरूपता बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा।

नियम तोड़ने पर 52 हजार रुपये दंड
बैठक में नियमों का उल्लंघन करने पर 52 हजार रुपये दंड तय किया है। इसके साथ ही पूरे खत के लिए सामूहिक भोज करने का भी प्रावधान है। प्रतिनिधियों ने इन निर्णयों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। बैठक में पहुंचे गणमान्य व्यक्तियों का आयोजकों और ग्रामीणों ने आभार व्यक्त किया। एसडीएम शिलाई जसपाल सिंह ने कहा कि  शिलाई में खत की बैठक में लिए निर्णयों की जानकारी मिली है। सामाजिक सुधार को लेकर लिए इस प्रकार के निर्णय सराहनीय हैं। पंचायतें इस प्रकार के निर्णय और जुर्माने लगा सकती हैं।

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