नई पोषण नीति: अब जांच के बाद ही आंगनबाड़ी, डिपो और स्कूलों में मिलेगा पोषणयुक्त राशन, बनेंगी प्रयोगशालाएं
प्रदेश की प्रस्तावित पोषण नीति-2026 के तहत भोजन में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता के साथ खाद्य सुरक्षा मानकों की भी निगरानी की जाएगी। इसका लाभ करीब 19.5 लाख राशनकार्ड धारकों और पांच लाख बच्चों तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
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हिमाचल प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों, राशन डिपो और सरकारी स्कूलों में वितरित होने वाली खाद्य सामग्री की गुणवत्ता जांचने की व्यवस्था मजबूत होगी। प्रदेश की प्रस्तावित पोषण नीति-2026 के तहत भोजन में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता के साथ खाद्य सुरक्षा मानकों की भी निगरानी की जाएगी। इसका लाभ करीब 19.5 लाख राशनकार्ड धारकों और पांच लाख बच्चों तक पहुंचाने का लक्ष्य है। सोलन जिले के कंडाघाट स्थित खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला का 8.5 करोड़ रुपये से आधुनिकीकरण किया जा रहा है। अगले चरण में मंडलीय स्तर पर आधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित करने की योजना है। खाद्य पदार्थों के नमूनों की मौके पर जांच के लिए मोबाइल वैन और पोषण संबंधी आंकड़ों की निगरानी के लिए राज्य पोषण पोर्टल का इस्तेमाल किया जाएगा।
नई नीति अगले दस वर्षों के लिए तैयार की जा रही: सीएम सुक्खू
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के अनुसार नई नीति अगले दस वर्षों के लिए तैयार की जा रही है। इसमें दो, पांच और दस साल के लक्ष्य निर्धारित कर योजनाओं की प्रगति का आकलन किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों, महिलाओं और किशोरियों में कुपोषण, एनीमिया तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी दूर करना है। इसके लिए स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, कृषि एवं बागवानी, जल शक्ति और ग्रामीण विकास विभाग मिलकर काम करेंगे। मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद नीति की अधिसूचना जारी होने की प्रक्रिया अपेक्षित है। निदेशक स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन जितेंद्र सांजटा के अनुसार, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मानकों को मजबूत किया जाएगा। कंडाघाट प्रयोगशाला के आधुनिकीकरण के बाद मंडलीय स्तर पर भी आधुनिक जांच सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
भोजन में पोषक तत्वों की मात्रा पर नजर
-आंगनबाड़ी केंद्रों के पूरक पोषाहार, राशन डिपो की खाद्य सामग्री और स्कूलों के मिड-डे मील की गुणवत्ता की निगरानी बढ़ाई जाएगी। प्रयोगशालाओं में पोषक तत्वों और खाद्य सुरक्षा मानकों की जांच होगी। मोबाइल वैन से मौके पर नमूनों की जांच और पोर्टल से पोषण संबंधी आंकड़ों का रिकॉर्ड रखने में मदद मिलेगी।
शुरुआती एक हजार दिन अहम
बच्चे के जीवन के शुरुआती एक हजार दिनों को नीति में विशेष महत्व दिया जाएगा। गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, शिशुओं और किशोरियों के पोषण पर ध्यान रहेगा। आंगनबाड़ी सेवाओं को मजबूत करने, पूरक पोषाहार उपलब्ध कराने और कुपोषण व एनीमिया की पहचान तथा रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान चलाने पर जोर होगा।
स्कूलों की थाली में स्थानीय अनाज
पीएम पोषण योजना के तहत सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में संतुलित भोजन को बढ़ावा दिया जाएगा। भोजन में स्थानीय अनाज, मौसमी फल, हरी पत्तेदार सब्जियां और दालें शामिल करने को प्रोत्साहित किया जाएगा। कोदरा, बाजरा और रागी जैसी पारंपरिक फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने पर भी ध्यान रहेगा।
साफ पानी और मिलावट पर भी निगरानी
पोषण नीति में सुरक्षित पेयजल, खाद्य पदार्थों में मिलावट की रोकथाम और स्वच्छता को भी शामिल किया जाएगा। पेयजल की नियमित जांच, राशन प्रणाली में सुरक्षित खाद्य सामग्री की उपलब्धता और दूरदराज व जनजातीय क्षेत्रों तक योजनाओं की पहुंच बेहतर बनाने के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा। पंचायत और जिला स्तर पर निगरानी को प्रभावी बनाने पर भी जोर रहेगा।