यहां पार्थिव देह के साथ दो बार पार करनी पड़ती है उफनती खड्ड
मोदी सरकार ने भले ही कांगड़ा को दो फोरलेन और कई नेशनल हाईवे दे दिए लेकिन चंगर के गांवों में आज भी हालात बाबा आदम के जमाने जैसे हैं। शाहपुर विधानसभा क्षेत्र की पंचायत परगोड़ का नेरा गांव श्मशानघाट से सड़क संपर्क को तरस रहा है।
किसी की मौत हो जाए तो अंतिम संस्कार के लिए पानी से भरी खड्ड को दो बार पार करना पड़ता है। गांव में सड़क के अभाव में हालात को दर्शाते वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
सड़क की मांग उठाकर थक चुके लोग सोशल मीडिया पर फोटो और वीडियो वायरल कर सरकार को जमकर कोस रहे हैं। हालात की बानगी दर्शाता ताजा वीडियो प्रदेश कुश्ती संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राकेश सनैरिया की माता के अंतिम संस्कार का है।
18 अगस्त के वीडियो में लोग शव को उफनती खड्ड के बीच से श्मशानघाट ले जाते दिखाई दे रहे हैं। राकेश सनौरिया ने बताया कि उन्होंने गांव छोड़ दिया है। लेकिन, माता-पिता गांव को छोड़ने को तैयार नहीं थे। बिना सड़क पार्थिव देह को श्मशानघाट तक पहुंचाना आसान नहीं।
बरसात के दिनों में बढ़ जाती है मुश्किल
स्थानीय निवासियों अमी चंद, जोगिंद्र सिंह, रूमेल सिंह, लाल सिंह, शेर सिंह, चैन सिंह, गिरधारी लाल ने कहा कि पंचायत में आज तक कोई भी शमशानघाट नहीं बना है। पैतृक श्मशानघाट पर जाने के लिए सड़क तक नहीं है।
जंगल के रास्ते से होकर पार्थिव देह श्मशानघाट पहुंचनी पड़ती है। पार्थिव देह को श्मशानघाट तक पहुंचाने के लिए एक ही खड्ड को दो बार पार करना पड़ता है। अगर बरसात के दिनों में किसी की मृत्यु हो जाए तो उफनती खड्ड को पार करना पड़ता है।
निदेशालय को भेजा है सड़क का एस्टीमेट : धीमान
मंजूरी मिलने के बाद सड़क का निर्माण शुरू किया जाएगा। बता दें कि नेरा गांव के लोग पिछले कई साल से सड़क बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अभी तक सड़क नहीं बन पाई है। इसी साल 29 जनवरी को धर्मशाला में ग्रामीण सड़क की मांग को लेकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से भी मिले थे।