शिमला के लक्कड़ बाजार में लकड़ी डिपो कार्यालय और उसके साथ बने नगर निगम के लेबर हास्टल में मंगलवार सुबह करीब 11 बजे लगी आग में लाखों की नकदी और भवन जलकर राख हो गया। आगजनी से हास्टल में रह रहे 150 से अधिक मजदूरों की लाखों की जमा पूंजी के साथ कपड़े, खाने पीने का सामान भी जलकर राख हो गया।
आग की सूचना मिलने पर करीब साढ़े ग्यारह बजे मौके पर पहुंचे अग्निशमन के जवानों ने आग बुझाने का कार्य शुरू किया। आग की लपटें इतनी भयंकर थी, उसे शांत करते करते अग्निशमन विभाग को भी चार से पांच घंटे का समय लग गया। लेबर हास्टल में मजदूरों का सारा सामान जल गया, उनके पास सिर्फ तन पर पहने कपड़े ही बच पाए।
अग्निशमन अधिकारी डीसी शर्मा ने माना कि आग से लेबर हास्टल मकान, लकड़ी डिप्पो की लकड़ी मजदूरों के जले समान और नकदी सहित करीब 50 लाख का नुकसान हुआ है। आग उस समय लगी जब हास्टल में एक दो ही मजदूर और खान बनाने वाले मजदूर ही थे। इनमें से एक मजदूर अबुल सलाम सिलेंडर को बाहर निकालते हुए हल्का झुलस गया।
दूध सप्लाई का कार्य करने वाले अशरफ, निसार अहमद, शबीर अहम, और मजफर अहमद के इस आग में ढाई लाख और तीन लाख तक पांच सौ और दो-दो हजार के नोट भी जल गए।इन दोनों ने सप्लाई के दौरान ये पैसा जमा किया था। मजदूरों का कहना है कि आग में उनका सब कुछ तबाह हो गया।
लेबर हास्टल में रहने वाले मजदूरों ने कहा कि उनकी कई महीनों की कमाई और दूध, गैस ऐजेंसी तक के लाखों रुपये आग में जल गए। वे बेघर हो गए हैं। पहनने तक को कपड़े नहीं बचे है। उन्होंने जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार से मांग की है उनके रात गुजारने और खाने के लिए राशन की व्यवस्था की जाए।