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हाईकोर्ट के बड़े फैसले: हिमाचल सचिवालय में 20 फीसदी स्टेनोग्राफर पद प्रतिनियुक्ति से भरना वैध

Sat, 03 Oct 2026 04:30 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 03 Oct 2026 04:30 AM IST
सार

न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश योगेश जसवाल की अदालत ने दोहराया कि कैडर का गठन, पदों का सृजन और भर्ती के तरीके या स्रोत (सीधी भर्ती, पदोन्नति या प्रतिनियुक्ति) तय करना पूरी तरह राज्य सरकार का नीतिगत अधिकार है। 

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Filling 20 percent of stenographer posts in the Secretariat via deputation is valid; High Court dismisses pe
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सचिवालय में स्टेनो टाइपिस्ट के पदों पर 20 फीसदी प्रतिनियुक्ति (सेकंडमेंट बेसिस) के प्रावधान को पूरी तरह सांविधानिक और वैध ठहराया है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश योगेश जसवाल की अदालत ने दोहराया कि कैडर का गठन, पदों का सृजन और भर्ती के तरीके या स्रोत (सीधी भर्ती, पदोन्नति या प्रतिनियुक्ति) तय करना पूरी तरह राज्य सरकार का नीतिगत अधिकार है। जब तक कोई नियम संविधान का स्पष्ट उल्लंघन न करे, अदालतें नियोक्ता के इस अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं। खंडपीठ ने जितेन्द्र ठाकुर एवं अन्य की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला दिया है।

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गौरतलब है कि बेरोजगार अभ्यर्थियों ने कार्मिक विभाग (सचिवालय प्रशासन सेवा-I) भर्ती नियम, 2026 के नियम 8(बी) को चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि स्टेनो टाइपिस्ट के सभी पद 100 फीसदी सीधी भर्ती से भरे जाने चाहिए और 20 फीसदी कोटा प्रतिनियुक्ति के लिए आरक्षित करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि सीधी भर्ती और प्रतिनियुक्ति दोनों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता समान है। इसलिए 20 फीसदी पदों का कोटा अलग रखना मनमाना है।

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हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल किसी पद की आवश्यक योग्यता (स्नातक, टाइपिंग एवं आशुलिपि) रखने मात्र से कोई अभ्यर्थी सरकार की ओर से बनाए गए सेवा नियमों को इस आधार पर चुनौती नहीं दे सकता कि पद 100 फीसदी सीधी भर्ती से क्यों नहीं भरे जा रहे हैं। अदालत ने माना कि सीधी भर्ती से आने वाले अभ्यर्थी नए और बिना अनुभव के हो सकते हैं, जबकि प्रतिनियुक्ति से आने वाले कर्मचारी हिमाचल सरकार के विभागों, बोर्डों या निगमों में कम से कम 5 वर्ष का नियमित या तदर्थ सेवा अनुभव रखते हैं। प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और कार्यालय में अनुभवी कर्मचारी तैनात करने के लिए यह वर्गीकरण पूरी तरह न्यायसंगत है।

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पिता को स्वतः नहीं मिलती कस्टडी, बच्चे का कल्याण सर्वोपरि: हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बच्चे की कस्टडी से जुड़े एक मामले में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि भले ही हिंदू कानून के तहत पिता प्राकृतिक संरक्षक होता है। लेकिन बच्चे की कस्टडी का फैसला करते समय उसका सर्वांगीण कल्याण, भावनात्मक लगाव, मानसिक संतुलन, पढ़ाई की निरंतरता और उसकी अपनी इच्छा ही सर्वोपरि मानी जाएगी। खंडपीठ ने जैविक पिता की ओर से दायर अपील को खारिज करते हुए एडिशनल प्रिंसिपल जज, फैमिली कोर्ट अंब (जिला ऊना) के उस आदेश को पूरी तरह सही ठहराया, जिसमें नाबालिग बच्चे की कस्टडी उसकी नानी के पास बनाए रखने का फैसला सुनाया गया था। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल एवं न्यायाधीश योगेश जसवाल की खंडपीठ ने पाया कि बच्चा मां के निधन के बाद से नानी के पास रह रहा है। नानी ही उसकी स्कूली शिक्षा तथा परवरिश का सारा खर्च खुद वहन कर रही हैं।

बच्चे ने बिना किसी झिझक नानी के साथ ही रहने की स्पष्ट और दृढ़ इच्छा जताई
बच्चे को अचानक पिता के अलग पारिवारिक माहौल में स्थापित करना उसके मानसिक संतुलन, शैक्षणिक प्रगति और समग्र विकास पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। मामले की सुनवाई के दौरान बच्चा स्वयं अदालत के समक्ष उपस्थित हुआ। खंडपीठ से व्यक्तिगत बातचीत के दौरान बच्चे ने बिना किसी झिझक नानी के साथ ही रहने की स्पष्ट और दृढ़ इच्छा जताई। वहीं पिता की ओर से पेश अधिवक्ता ने तर्क दिया कि हिंदू अल्पसंख्यक एवं संरक्षकता अधिनियम, 1956 की धारा 6 के तहत जैविक पिता होने के नाते पहला अधिकार उनका है। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अधिनियम के तहत पिता का प्राकृतिक संरक्षक होने का कानूनी अधिकार स्वतः ही उसे शारीरिक कस्टडी का हकदार नहीं बनाता। जब बच्चे का सर्वांगीण कल्याण किसी अन्य व्यवस्था में सुरक्षित हो, तो पिता का विधिक अधिकार बच्चे के हित के आगे गौण हो जाता है। पिता के इस तर्क को भी खारिज कर दिया गया कि कस्टडी न मिलने से बच्चे के साथ उसका भावनात्मक जुड़ाव नहीं बन पाएगा। इस पर अदालत ने कहा कि पिता पूर्व में दिए गए मुलाकात के अधिकार का उपयोग करके या नई याचिका दायर करके समय-समय पर बच्चे से मिल सकते हैं और धीरे-धीरे भावनात्मक रिश्ता मजबूत कर सकते हैं।

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