{"_id":"61435005c52607496d1e1dcb","slug":"excise-department-himachal-pradesh-tax-fraud-by-company-property-auction-recovered-fifty-lakh-rupee","type":"story","status":"publish","title_hn":"आबकारी विभाग: टैक्स फर्जीवाड़े में फर्म की चल संपत्ति नीलाम, 50 लाख वसूले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आबकारी विभाग: टैक्स फर्जीवाड़े में फर्म की चल संपत्ति नीलाम, 50 लाख वसूले
Thu, 16 Sep 2021 07:39 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, गगरेट (ऊना)
अमर उजाला नेटवर्क, गगरेट (ऊना)
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Thu, 16 Sep 2021 07:39 PM IST
सार
राज्य कर और आबकारी विभाग ऊना ने सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद नीलामी प्रक्रिया अपनाई। नियमानुसार कमेटी ने फर्म के परिसर में चल संपत्तियों की नीलामी करवाई। इसमें करीब 50 लाख की राशि एकत्रित की गई।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
13 करोड़ के जीएसटी फर्जीवाड़े में राज्य कर और आबकारी विभाग ने गगरेट की एक फर्म की चल संपत्ति को नीलाम कर दिया है। नीलामी प्रक्रिया गगरेट में पीठासीन अधिकारी एसडीएम गगरेट की अध्यक्षता में हुई। मामले में 30.40 करोड़ की वसूली की जानी थी। इसके लिए तीन माह का नोटिस दिया था। दावा किया जा रहा है कि हिमाचल प्रदेश में इस तरह की यह पहली कार्रवाई है।
विज्ञापन
राज्य कर और आबकारी विभाग ऊना ने सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद नीलामी प्रक्रिया अपनाई। नियमानुसार कमेटी ने फर्म के परिसर में चल संपत्तियों की नीलामी करवाई। इसमें करीब 50 लाख की राशि एकत्रित की गई। हालांकि, अभी कुछ और संपत्ति नीलाम होना बाकी है। फर्म की ओर से नीलामी प्रक्रिया की समाप्ति के बाद नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल चंडीगढ़ से स्टे भी पेश किया गया।
विज्ञापन
स्टे की प्रक्रिया समाप्ति के बाद पेश होने के बाद अब विभाग इस मामले को लेकर कानूनी राय भी ले रहा है। कर एवं आबकारी विभाग ऊना ने गगरेट स्थित एक फर्म को गलत तरीके से तीन अन्य फर्जी फर्मों से अपने लिए खरीद दिखाकर टैक्स चोरी के मामले में 4 करोड़ 35 लाख, 90 हजार रुपये ब्याज के साथ 13 करोड़ 2 लाख 41 हजार अस्वीकार्य आईटीसी और इतनी ही जुर्माना राशि सहित कुल लगभग 30 करोड़ 40 लाख 72355 राशि वसूल करने की बात कही है।
विज्ञापन
विभागीय निरीक्षण के दौरान पाया गया था कि जीएसटी पोर्टल से गगरेट की एक फर्म अनुचित तरीके से फर्जी फर्मों से अपने लिए खरीद दिखा रही है जो भौतिक रूप से अस्तित्व में थी ही नहीं। इस तथ्य को फर्म के सीईओ ने शपथ पत्र देकर कबूल कर लिया है कि यह तीनों फर्में उन्होंने अनुचित रूप से आईटीसी का लाभ लेने के लिए पंजीकृत करवाई हैं।
जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया था कि फर्जी तीनों फर्मों के एक निदेशक के नाम पर भूमि क्रय की गई, जिसकी जानकारी निदेशक को भी नहीं थी। संयुक्त आयुक्त राज्य कर और आबकारी मध्यम प्रवर्तन क्षेत्र ऊना राकेश भारतीय ने बताया कि इस मामले में नियमानुसार नीलामी प्रक्रिया अपनाई गई है।