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हर घड़ी 10:15 ही बजा रही हैं क्राइस्ट चर्च पर लगी घड़ियां
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शिमला। राजधानी के ऐतिहासिक रिज मैदान स्थित क्राइस्ट चर्च पर लगी तीन घड़ियां दिसंबर माह से 10:15 ही बजा रही हैं। खराब हो चुकी इन घड़ियों को अभी तक ठीक नहीं करवाया गया।
रिज मैदान पर हर रोज सैकड़ों की संख्या में सैलानी घूमने आते हैं। स्थानीय लोग और सैलानी क्राइस्ट चर्च देखने भी जाते हैं। लेकिन चर्च पर लगी घड़ियों को देखकर उन्हें मायूसी होती है। इन घड़ियों को कई बार ठीक करवाया गया लेकिन एक से दो माह चलने के बाद यह बंद हो जाती हैं। लोगों का कहना है कि ऐतिहासिक चर्च पर लगी इन घड़ियों को ठीक करवाना चाहिए ताकि लोगों को सही समय की जानकारी मिल सके या फिर इन्हें उतारकर नई घड़ियां लगानी चाहिए।
अक्तूबर 2022 में घड़ियों की मरम्मत करवाई गई थी लेकिन दिसंबर में यह बंद हो गईं। चर्च के पादरी के अनुसार यह घड़ियां सौ साल से अधिक पुरानी हैं। पंजाब से शिमला घूमने आए मनप्रीत सिंह और उनके साथियों ने कहा कि वह चार से पांच बार शिमला घूमने आ चुके हैं लेकिन हर बार यह घड़ियां बंद मिलती हैं। क्राइस्ट चर्च के पदाधिकारियों ने इसके लिए शिमला, चंडीगढ़, दिल्ली में इंजीनियर ढूंढ़े लेकिन यह घड़ी ठीक नहीं हो पाई।
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1873 में लगाई गईं थी घड़ियां
क्राइस्ट चर्च के पादरी सोहन लाल ने बताया कि घड़ियों को 1873 में चर्च पर लगाया था। वर्तमान समय में यह जंग का शिकार हो चुकी हैं। यही कारण है कि घड़ियां बार-बार खराब हो जाती हैं। क्राइस्ट चर्च के सामने, बाईं और दाईं ओर यह तीन घड़ियां लगी हैं। इसकी खास बात यह है कि तीनों घड़ियां एक साथ चलती हैं। पहले यह घड़ियां सामान्य (मैकेनिकल) घड़ियों की तरह चलती थीं। अब यह बिजली से चलती हैं। इसमें एक बैटरी डाली गई है। यह घड़ियां फाइबर की बनी हैं। इन्हें ठीक करवाने का प्रयास जारी है।
1857 में बना था क्राइस्ट चर्च
शिमला का क्राइस्ट चर्च सन 1857 में नियोे गौथिक शैली में बना था। कर्नल जेटी बोयलियो ने 1844 में इसका डिजाइन बनाया था। इसका निर्माण 13 साल बाद किया गया। चर्च पर लगी बड़ी घंटी 1860 में कर्नल डमबेल्टन ने दान की थी।
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रिज मैदान पर हर रोज सैकड़ों की संख्या में सैलानी घूमने आते हैं। स्थानीय लोग और सैलानी क्राइस्ट चर्च देखने भी जाते हैं। लेकिन चर्च पर लगी घड़ियों को देखकर उन्हें मायूसी होती है। इन घड़ियों को कई बार ठीक करवाया गया लेकिन एक से दो माह चलने के बाद यह बंद हो जाती हैं। लोगों का कहना है कि ऐतिहासिक चर्च पर लगी इन घड़ियों को ठीक करवाना चाहिए ताकि लोगों को सही समय की जानकारी मिल सके या फिर इन्हें उतारकर नई घड़ियां लगानी चाहिए।
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अक्तूबर 2022 में घड़ियों की मरम्मत करवाई गई थी लेकिन दिसंबर में यह बंद हो गईं। चर्च के पादरी के अनुसार यह घड़ियां सौ साल से अधिक पुरानी हैं। पंजाब से शिमला घूमने आए मनप्रीत सिंह और उनके साथियों ने कहा कि वह चार से पांच बार शिमला घूमने आ चुके हैं लेकिन हर बार यह घड़ियां बंद मिलती हैं। क्राइस्ट चर्च के पदाधिकारियों ने इसके लिए शिमला, चंडीगढ़, दिल्ली में इंजीनियर ढूंढ़े लेकिन यह घड़ी ठीक नहीं हो पाई।
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1873 में लगाई गईं थी घड़ियां
क्राइस्ट चर्च के पादरी सोहन लाल ने बताया कि घड़ियों को 1873 में चर्च पर लगाया था। वर्तमान समय में यह जंग का शिकार हो चुकी हैं। यही कारण है कि घड़ियां बार-बार खराब हो जाती हैं। क्राइस्ट चर्च के सामने, बाईं और दाईं ओर यह तीन घड़ियां लगी हैं। इसकी खास बात यह है कि तीनों घड़ियां एक साथ चलती हैं। पहले यह घड़ियां सामान्य (मैकेनिकल) घड़ियों की तरह चलती थीं। अब यह बिजली से चलती हैं। इसमें एक बैटरी डाली गई है। यह घड़ियां फाइबर की बनी हैं। इन्हें ठीक करवाने का प्रयास जारी है।
1857 में बना था क्राइस्ट चर्च
शिमला का क्राइस्ट चर्च सन 1857 में नियोे गौथिक शैली में बना था। कर्नल जेटी बोयलियो ने 1844 में इसका डिजाइन बनाया था। इसका निर्माण 13 साल बाद किया गया। चर्च पर लगी बड़ी घंटी 1860 में कर्नल डमबेल्टन ने दान की थी।