{"_id":"606c466339f55d32fe6c4bce","slug":"embezzlement-case-high-court-seeks-clarification-from-agriculture-directorate-on-giving-minimum-punishment-to-convict","type":"story","status":"publish","title_hn":"गबन मामला: दोषी को न्यूनतम सजा देने पर हाईकोर्ट ने कृषि निदेशालय से मांगा स्पष्टीकरण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गबन मामला: दोषी को न्यूनतम सजा देने पर हाईकोर्ट ने कृषि निदेशालय से मांगा स्पष्टीकरण
Tue, 06 Apr 2021 05:00 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Tue, 06 Apr 2021 05:00 PM IST
विज्ञापन
हिमाचल हाईकोर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लाखों रुपये का गबन करने के बावजूद दोषी को न्यूनतम सजा दिए जाने पर प्रदेश हाईकोर्ट ने कृषि निदेशालय से स्पष्टीकरण मांगा है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सीबी बारोवालिया की खंडपीठ ने याचिका की सुनवाई के दौरान कहा कि रिकॉर्ड से पता चलता है कि नियोक्ता कृषि निदेशालय इस विषय पर दृढ़ निष्कर्ष पर पहुंचा था कि याचिकाकर्ता ने एक बड़ी राशि का गबन किया था। मामले पर आगामी सुनवाई 18 मई को होगी।
विज्ञापन
दोषी ने बिक्री से होने वाली आय के 26,69,447 रुपये का गबन करने के बाद अपने वरिष्ठ अधिकारियों के बार-बार निर्देश के बावजूद भी इस राशि को सरकारी कोषागार में जमा नहीं करवाया। फिर भी कृषि निदेशक ने याचिकाकर्ता पर बड़ा जुर्माना लगाने के बजाय केवल परीनिंदा यानी सेंसुअर जैसी मामूली सजा दी। खंडपीठ ने कहा कि कोर्ट यह समझने में असफल रही है कि विशेष रूप से सिद्ध कदाचार या गबन के मामले में परीनिंदा का आदेश पारित करने के लिए कृषि निदेशक की शक्ति या प्राधिकार का क्या स्रोत था। न्यायालय ने कृषि निदेशक को सुनवाई की अगली तारीख पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने आदेश दिए। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि कोर्ट ने इस मामले की खूबियों पर कोई राय व्यक्त नहीं की है और केवल रिकॉर्ड के आधार पर इस आदेश को पारित किया गया है।
विज्ञापन