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बिजली संकट: बीबीएन में फिर तीन घंटे कट, पांच दिन में उद्योगों को 100 करोड़ का नुकसान

Sat, 30 Apr 2022 02:23 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, बद्दी (सोलन)
संवाद न्यूज एजेंसी, बद्दी (सोलन) Published by: Krishan Singh Updated Sat, 30 Apr 2022 02:23 AM IST
सार

बीबीएन में पिछले पांच दिनों से रोजाना उद्योगों में तीन घंटे का कट लग रहा है। शुक्रवार को भी सभी सब स्टेशनों में दोपहर 12 से तीन बजे तक बिजली गुल रहने से औद्योगिक इकाइयों में कामकाज ठप रहा। 

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electricity crisis: Three hours cut in BBN, loss of 100 crores to industries in five days
बीबीएन(फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र बद्दी, बरोटीवाला और नालागढ़ (बीबीएन) में बिजली संकट गहरा गया है। पिछले पांच दिनों से रोजाना उद्योगों में तीन घंटे का कट लग रहा है। शुक्रवार को भी सभी सब स्टेशनों में दोपहर 12 से तीन बजे तक बिजली गुल रहने से औद्योगिक इकाइयों में कामकाज ठप रहा। पांच दिन में बड़े उद्योगों को ही औसतन 100 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। उद्यमियों के अब हाथ खड़े होने लगे हैं। 

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बता दें कि हिमाचल के हाइडल प्रोजेक्टों से कम आपूर्ति और देश में कोयला संकट से उद्योगों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है। छोटे उद्योग जनरेटरों से काम चला रहे हैं। शुक्रवार को विद्युत बोर्ड के सब स्टेशन काठा, झाड़माजरी, आकांवाली, मलपुर, दवनी और नालागढ़ में बिजली कट लगे। इससे बीबीएन की दो हजार से अधिक औद्योगिक इकाइयों में बिजली बंद रही। दून के पहाड़ी क्षेत्र साई, पट्टा, चंडी, बुआसनी, गोयला, रामशहर के ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह 11 से लेकर सायं चार बजे तक बिजली बंद रही। 
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बीबीएनआईए के अध्यक्ष राजेंद्र गुलेरिया ने बताया कि प्रतिदिन बिजली कटों से यहां के उद्योगों को 30 से 40 फीसदी का नुकसान हो रहा है। लगातार चलने वाले उद्योगों में अगर तीन घंटे बिजली गुल रहती है तो इसमें लोहा ठंडा हो जाता है। उसे गर्म करने के लिए तीन घंटे फिर बिजली खर्च करनी पड़ती है। इन पांच दिनों से औद्योगिक इकाइयों को 100 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है। बीबीएन का साल का टर्नओवर 30 हजार करोड़ का है। अभी फार्मा कंपनियों को ज्यादा दिक्कत नहीं है।
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ये उद्योग जनरेटर से चल जाते हैं, लेकिन लोहा, तेल, धागा, साबुन आदि तैयार करने वाले उद्योग बिना बिजली के नहीं चल पाते। उधर, बिजली बोर्ड के अधिशासी अभियंता रोबिन बैंसल ने बताया कि कोयले की कमी के चलते बिजली का कम उत्पादन हो रहा है। हाइडल प्रोजेक्ट से भी बिजली उतनी नहीं बन रही है, जितनी उन्हें उम्मीद थी। बीते दिन बैठक में उद्योगपतियों से इस आपदा की घड़ी में सहयोग की अपील की है। जल्द हालात सुधरेंगे। 

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