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वीरभद्र सिंह: अकेले हिमाचली नेता जिन पर गाए गए दर्जनों गीत
Fri, 09 Jul 2021 10:17 AM IST
Krishan Singh
विश्वास भारद्वाज, अमरर उजाला, शिमला
विश्वास भारद्वाज, अमरर उजाला, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Fri, 09 Jul 2021 10:17 AM IST
सार
नाटी किंग कुलदीप शर्मा का कहना है कि वीरभद्र सिंह के जाने से लोक कलाकारों का अभिभावक चला गया है। प्रदेश के अधिकतर नेताओं ने उनके गीतों पर नाटी की है लेकिन वीरभद्र सिंह को नाचने के लिए मंच पर बुलाने की उनकी कभी हिम्मत नहीं हुई। साल 2018 में गेयटी थियेटर में प्रस्तुति के दौरान वीरभद्र सिंह के चरण स्पर्श किए तो वह खुद ही मंच पर आ गए नाटी डाली।
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पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह(फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचली लोक संस्कृति के संरक्षक वीरभद्र सिंह के देहांत से प्रदेश के लोक कलाकार गमगीन हैं। वीरभद्र सिंह प्रदेश के एकमात्र ऐसे नेता थे, जिन पर दर्जनों गीत लिखे और गाए गए। वीरभद्र सिंह के निधन के बाद वीरवार को सोशल मीडिया पर उन पर गाए गए गीत और वीडियो जमकर वायरल हुए। लोक कलाकारों ने बताया कि वीरभद्र हमेशा से लोक संस्कृति और लोक कलाकारों के अभिभावक की भूमिका में रहे। शिमला समर फेस्टिवल में पहली बार वीरभद्र सिंह ने ही पहाड़ी सांस्कृतिक संध्या शुरू करवाई थी।
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नाटी किंग कुलदीप शर्मा का कहना है कि वीरभद्र सिंह के जाने से लोक कलाकारों का अभिभावक चला गया है। प्रदेश के अधिकतर नेताओं ने उनके गीतों पर नाटी की है लेकिन वीरभद्र सिंह को नाचने के लिए मंच पर बुलाने की उनकी कभी हिम्मत नहीं हुई। साल 2018 में गेयटी थियेटर में प्रस्तुति के दौरान वीरभद्र सिंह के चरण स्पर्श किए तो वह खुद ही मंच पर आ गए नाटी डाली। विक्की चौहान का कहना है कि पहाड़ी कलाकारों को रोजी रोटी लगाने का श्रेय वीरभद्र सिंह को जाता है।
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साल 2005 में पहली बार शिमला समर फेस्टिवल में पहाड़ी सांस्कृतिक संध्या की शुरूआत वीरभद्र सिंह ने ही करवाई थी। इससे पहले पहाड़ी कलाकार शाम छह बजे से पहले स्कूली बच्चों के साथ समर फेस्टिवल में प्रस्तुति देते थे। रामपुर के कैप्सन म्यूजिक के एमडी डॉ. कपिल शर्मा ने वीरभद्र सिंह पर 7 गीत और एक टेली फिल्म बनाई। 2013 में कैप्सन म्यूजिक ने ‘आवाज पहाड़ा री’ टेलेंट शो के ग्रैंड फिनाले में वीरभद्र सिंह को बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित करना चाहा तो वीरभद्र ने शर्त रखी कि कार्यक्रम पहाड़ी संस्कृति पर केंद्रित होगा तभी आएंगे। रोहड़ूू के लोक कलाकार नरेंद्र रंजन ने बताया कि वीरभद्र सिंह पहाड़ी कलाकारों को तरजीह देते थे।
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इन नाटियों में हुआ वीरभद्र सिंह का गुणगान
कुलदीप शर्मा ने वीरभद्र सिंह पर ‘जय भीमाकाली मैय्या तेरी जय जय हो, राजा जी पर तुसां री कृपा हो’, कुल्लू के लोक कलाकार इंद्रजीत ने ‘दिले सोबो रे बोसदा भीमाकाली माई रे, सदा मुखड़ूू होसदा, राजा शोभला मांणू’ डॉ. कपिल शर्मा ने ‘राजा साहिबा री शुणनी गाथा, ऐबे लोगुओ म्हारे हो’, नरेंद्र रंजन ने ‘माता भीमा काली लाकड़ा बीरो सराहना रो थानों, मुख्यमंत्री राजा साहिबा हिमाचला री शानो’, विनोद रांटा ने हिमाचलो री तरक्की करवाई रे, वीरभद्र रे, बड़े बड़े कामों कराए रे वीरभद्र रे’ विक्की चौहान ने ‘धानो रोपणा क्यारो रा लोगुओ रोपी लौणाओ रोपा, बांका सजो राजा साहिबो खे बशैहरो रा टोपा’ नाटियां गाई।