टांडा में 24 घंटे की भूख हड़ताल पर बैठे 60 डॉक्टर, ये है वजह
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केंद्र सरकार के राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक 2019 के विरोध में प्रशिक्षु और इंटर्नशिप कर रहे डॉक्टरों ने मोर्चा खोल दिया है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की नेशनल काउंसिल सदस्य डॉ. मनीला की अगुवाई में 60 चिकित्सकों ने बुधवार से भूख हड़ताल शुरू की। टांडा अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के बाहर के प्रशिक्षु और इंटर्नशिप कर रहे डॉक्टरों ने मास कैजुअल लीव लेकर प्रदर्शन शुरू किया है।
24 घंटे की भूख हड़ताल में 40 प्रशिक्षु और 20 इंटर्नशिप कर रहे डॉक्टर शामिल हैं। टीचर एसोसिएशन ऑफ मेडिकल कॉलेज टांडा ने भी समर्थन कर दिया है। डॉ. मनीला ने कहा कि हालांकि पिछले एनएमसी बिल से सिर्फ कॉस्मेटिक बदलाव हुए हैं, जिसका 2016 के बाद से पूरे देश में चिकित्सा परिषद ने कड़ा विरोध किया था। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बिल में सरकार ने धारा 32 को जोड़ा है, जो सामुदायिक स्वास्थ्य प्रदाताओं को एमबीबीएस के अलावा अन्य पाठ्यक्रमों से पेशेवरों को चिकित्सा व्यवसायी लाइसेंस प्रदान करके कानून को वैध बनाती है।
सिर्फ आपातकालीन ओपीडी में जारी रहीं सेवाएं
चिकित्सकों की हड़ताल से स्टाफ की कमी से मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं पर खासा असर देखने को नहीं मिला है। आपातकालीन ओपीडी सेवाएं जारी रहीं। उधर, टांडा पुलिस चौकी प्रभारी की टीम हड़ताल पर बैठे चिकित्सकों को समझाने के प्रयास में जुटी है।
टेमकोट के अध्यक्ष डॉ. आरएस जसवाल और उपाध्यक्ष डॉ. मिलाप शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण का हवाला देकर मेडिकल कमीशन बिल को लागू करने की बात कर रही है, लेकिन एक ही परीक्षा में एमबीबीएस के अंतिम वर्ष में बैठना कहां तक तर्कसंगत हैं। मेडिकल बिल चिकित्सा शिक्षा और आम जनता विरोधी है।