कहीं दिल का रोगी न बना दे खानपान में आया बदलाव, इन बातों का रखें ध्यान
तकनीक के इस युग में हर व्यक्ति आगे रहना चाहता है, लेकिन ध्यान रहे खानपान में आने वाला बदलाव कहीं आपको दिल का रोगी न बना दे। तनाव और काम का दबाव छोटी उम्र में ही हृदयरोग जैसी बीमारियों का कारण बन रहा है।
पहले 50 से 60 साल आयु वर्ग के लोग हृदयरोग जैसी बीमारियों की चपेट में आते थे, लेकिन अब लाइफ स्टाइल में आए बदलाव के चलते 30 से 40 साल तक आयु वर्ग के लोगों को भी हृदयरोग जैसी बीमारी की चपेट में आने लगे हैं।
क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला में हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. अखिल गौतम ने छोटी उम्र में हृदयरोग जैसी बीमारियों के लिए लाइफ स्टाइल में आए बदलाव को जिम्मेदार बताया है।
उनके मुताबिक सिटिंग जॉब, तनाव और काम के दबाव के चलते छोटी उम्र के लोग भी इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि धूम्रपान और शराब का सेवन करना इसका सबसे बड़ा कारण है। उन्होंने कहा कि सिटिंग जॉब वाले हर रोज सुबह आधा से पौना घंटा सैर अवश्य करें।
इन कारणों से बढ़ रहे हृदयरोगी
- खाने का टाइम टेबल न होना।
- शरीर की अन्य बीमारियों को हल्के में लेना।
- खेल, मैदान से दूरी बनाने के कारण।
- छोटी आयु में काम का तनाव, दबाव।
- सिटिंग जॉब से भी हृदयरोग बढ़ रहे हैं।
इन बातों का रखें खास ध्यान
- हर रोज आधा से पौना घंटे व्यायाम या कोई खेल खेलें।
- सब्जी, फल का अधिक सेवन करें।
- तेल युक्त चीजों का कम ही सेवन करें।
- शराब और धूम्रपान का सेवन न करें।
- किसी भी बीमारी की दवा खाते हों तो उसे रूटीन में खाएं।
हृदयरोग को हल्के में न लें
अकसर व्यक्ति को हृदय रोग के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती है। इसके चलते लोग इसे हल्के में ले लेते हैं। कई बार व्यक्ति बिना जांच किए दवाई खाना शुरू कर देता है, जो घातक हो सकता हैं।
महीने में आ रहे हैं 55 से 60 मरीज : अखिल
हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. अखिल गौतम ने कहा कि महीने में 55 से 60 मरीज अस्पताल में आ रहे हैं। इसमें कम आयु वर्ग वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। लाइफ स्टाइल में बदलाव हृदयरोग बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है।
भोजन करने के बाद अवश्य टहलें : डॉ कुलदीप
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ कुलदीप ने कहा कि भोजन के करने बाद हर व्यक्ति को टहलना चाहिए। इससे हृदयरोग होने की कम संभावना रहती है। इसके अलावा सुबह के समय व्यायाम, प्राणायाम भी अवश्य करें। खानपान में तेल युक्त खाद्य वस्तुओं से परहेज ही रखें।