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इन चीजों से बचें अस्थमा के रोगी, डॉक्टर की सलाह के बाद ही लें दवा

Tue, 29 Jan 2019 05:00 AM IST
ashok chauhan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोलन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोलन Published by: ashok chauhan Updated Tue, 29 Jan 2019 05:00 AM IST
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doctors advice shimla: precaution for Asthmatic patient

बार-बार होने वाली खांसी, सांस लेते समय सीटी की आवाज, छाती में जकड़न, दम फूलना, खांसी के साथ कफ न निकलना अस्थमा हो सकता है। यह बीमारी किसी भी उम्र में यहां तक कि नवजात शिशुओं में भी हो सकती है।

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अस्थमा पीड़ितों के लिए बदलता मौसम खतरनाक है। मौसम बदलने के बाद जो धूल उड़ती है, उससे कीटाणुओं को फैलने-पनपने का मौका मिल जाता है। आज के समय में प्रदूषण के कारण भी अस्थमा के मरीज बढ़ रहे हैं। यह बीमारी अधिकतर ज्यादा ठंड लगने के कारण होती है। 
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अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति विशेष लक्षणों को महसूस नहीं कर सकता है। यदि इसमें किसी व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी हो या फिर बात करते या कुछ कार्य के दौरान खांसी आए तो इसकी जांच विशेषज्ञ डॉक्टर से आवश्यक करवाए।
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वहीं डाक्टर के बिना अनुमति से कोई दवाई का सेवन भी न करें। अस्थमा दूषित हवा, रासायनिक धुएं, धूल-कण, तापमान अधिक या कम होने से भी हो सकता है। 

बचाव, यह न करें  

doctors advice shimla: precaution for Asthmatic patient

धूल, मिट्टी, धुआं, प्रदूषण होने पर मुंह और नाक को कपड़े से ढकें। सिगरेट के धुएं से भी बचें। ताजा पेंट, कीटनाशक, स्प्रे, अगरबत्ती, मच्छर भगाने की कॉइल का धुआं, खुशबूदार इत्र आदि से यथासंभव बचाव करें। अधिक सर्दी से बचे रहें, ठंड में न घूमें। ठंड के दौरान गर्म वस्त्र पहनें, जिसमें सीने को ढककर रखें। पानी उबालकर पीएं, रात के समय सोने से पहले स्टीम ले। जितना अधिक हो सके, उतना पानी पीएं। हरी सब्जियों का अधिक सेवन करें।

छोटी से छोटी बीमारी होने पर भी डाक्टर से जांच करवाने के बाद ही दवाइयां खाएं। धूल वाले क्षेत्र में कम जाएं, धुएं से बचें। सुबह और शाम की सैर करने जाते हैं तो ठंड के समय इसका त्याग कर दें। यदि टहलने का मन करे तो दोपहर के समय धूप में टहले। शौच आदि के बाद हाथों को अच्छे से धोएं सहित कुछ भी कार्य करने के बाद अपने हाथों अच्छे से बार-बार धोएं। अधिक भीड वाले स्थान में जाने से बचे।  

क्या कहते हैं मेडिसन विशेषज्ञ

doctors advice shimla: precaution for Asthmatic patient

क्षेत्रीय अस्पताल सोलन के मेडिसन विशेषज्ञ डॉ. कमल अटवाल ने बताया कि बार-बार होने वाली खांसी, सांस लेते समय सीटी की आवाज, छाती में जकड़न, दम फूलना, खांसी के साथ कफ न निकल पाना, बेचैनी होना अस्थमा के लक्षण है। उन्होंने बताया कि अस्थमा से बचने के लिए संतुलित पौष्टिक आहार लेना चाहिए। इसके अलावा सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए। 

आयुर्वेद अस्पताल सोलन के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अरविंद गुप्ता का कहना है कि अस्थमा कफजन्य रोग है। जो कफ के बढ़ने से पैदा होता है। आयुर्वेद में इस रोग को तमकश्वास के नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद विधि से इस रोग का दो तरह से उपचार किया जाता है। जिसमें पंचकर्म विधि व औषद्यीय चिकित्सा शामिल है। डॉ. अरविंद गुप्ता के अनुसार इस बीमारी में मरीज को जल्द ठीक होने के लिए परहेज जरूरी हैं। आयुर्वेद विधि से 99.9 प्रतिशत मरीजों में अस्थमा की बीमारी पूरी तरह से ठीक हो सकती है।

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