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Shimla News: सर्वपितृ अमावस्या पर आज पितरों को दी जाएगी विदाई
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इस अमावस्या पर सभी पितरों का कर सकते हैं श्राद्ध, दोपहर में होगी तर्पण पूजा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। आश्विन मास की अमावस्या तिथि 10 अक्तूबर शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के रूप में मनाई जाएगी। इस अमावस्या के दिन उन पितरों का श्राद्ध किया जाता है जिन पितरों की पुण्य या मृत्यु तिथि पता नहीं होती है। इसके साथ ही सभी पितरों को प्रसन्न करने के लिए सर्वपितृ अमावस्या को बहुत शुभ माना गया है। इस दिन पितरों के नाम का तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर उन्हें विदाई दी जाती है।
राधाकृष्ण मंदिर के पुजारी सुशील ने बताया कि यदि किसी ने अपने पितरों का श्राद्ध नहीं किया हो तो वह इस दिन उनका श्राद्ध कर सकते हैं। इस शुभ अवसर पर काले तिल, काले वस्त्र या अन्य काली चीजों का दान करें। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की सर्वपितृ अमावस्या तिथि शुक्रवार रात 9:36 बजे से शुरू हो जाएगी और शनिवार रात 9:30 बजे तक यह तिथि रहेगी। उद्यातिथि के अनुसार शनिवार को ही सर्वपितृ अमावस्या की पूजा होगी। इस दौरान कुतुप मुहूर्त का समय सुबह 11:36 बजे से लेकर दोपहर 12:24 बजे तक रहेगा। तर्पण पूजा दोपहर में होती है। इस दौरान पिंडदान और अन्नदान सूर्योदय से सूर्यास्त तक कर सकते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से ग्रह-दोषों से राहत मिल सकती है और पितरों की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन किसी धार्मिक स्थल पर पूजा-अर्चना करने के बाद गाय को चारा खिलाना और उसकी सेवा करना पुण्यकारी माना जाता है। इससे पितरों और देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। मान्यताओं के अनुसार अमावस्या पर बाल और नाखून काटने से बचना चाहिए। इस दिन बाल धोना भी कई परंपराओं में शुभ नहीं माना गया है।
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इनसेट
श्राद्ध में पंचबलि कर्म का महत्व
सर्वपितृ अमावस्या में पंचबलि कर्म का विशेष महत्व माना जाता है। पंचबलि के रूप में गाय, कौआ, कुत्ता, देव, चींटी को श्राद्ध का भोजन दिया जाता है। मान्यता है कि पितर इन पंच रूपों में आकर भोजन ग्रहण करते हैं। इसके साथ ही तर्पण, पिंडदान, अन्नदान, ब्राह्मण भोजन, याचक और भिखारी को भी भोजन करवाना चाहिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। आश्विन मास की अमावस्या तिथि 10 अक्तूबर शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के रूप में मनाई जाएगी। इस अमावस्या के दिन उन पितरों का श्राद्ध किया जाता है जिन पितरों की पुण्य या मृत्यु तिथि पता नहीं होती है। इसके साथ ही सभी पितरों को प्रसन्न करने के लिए सर्वपितृ अमावस्या को बहुत शुभ माना गया है। इस दिन पितरों के नाम का तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर उन्हें विदाई दी जाती है।
राधाकृष्ण मंदिर के पुजारी सुशील ने बताया कि यदि किसी ने अपने पितरों का श्राद्ध नहीं किया हो तो वह इस दिन उनका श्राद्ध कर सकते हैं। इस शुभ अवसर पर काले तिल, काले वस्त्र या अन्य काली चीजों का दान करें। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की सर्वपितृ अमावस्या तिथि शुक्रवार रात 9:36 बजे से शुरू हो जाएगी और शनिवार रात 9:30 बजे तक यह तिथि रहेगी। उद्यातिथि के अनुसार शनिवार को ही सर्वपितृ अमावस्या की पूजा होगी। इस दौरान कुतुप मुहूर्त का समय सुबह 11:36 बजे से लेकर दोपहर 12:24 बजे तक रहेगा। तर्पण पूजा दोपहर में होती है। इस दौरान पिंडदान और अन्नदान सूर्योदय से सूर्यास्त तक कर सकते हैं।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से ग्रह-दोषों से राहत मिल सकती है और पितरों की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन किसी धार्मिक स्थल पर पूजा-अर्चना करने के बाद गाय को चारा खिलाना और उसकी सेवा करना पुण्यकारी माना जाता है। इससे पितरों और देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। मान्यताओं के अनुसार अमावस्या पर बाल और नाखून काटने से बचना चाहिए। इस दिन बाल धोना भी कई परंपराओं में शुभ नहीं माना गया है।
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श्राद्ध में पंचबलि कर्म का महत्व
सर्वपितृ अमावस्या में पंचबलि कर्म का विशेष महत्व माना जाता है। पंचबलि के रूप में गाय, कौआ, कुत्ता, देव, चींटी को श्राद्ध का भोजन दिया जाता है। मान्यता है कि पितर इन पंच रूपों में आकर भोजन ग्रहण करते हैं। इसके साथ ही तर्पण, पिंडदान, अन्नदान, ब्राह्मण भोजन, याचक और भिखारी को भी भोजन करवाना चाहिए।