{"_id":"6aa413b427b95a76d0061dea","slug":"cultural-news-shimla-shimla-news-c-19-sml1002-784993-2026-09-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: भक्ति का बीज अंकुरित हो जाए तो भगवान से कभी दूर नहीं होता जीव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: भक्ति का बीज अंकुरित हो जाए तो भगवान से कभी दूर नहीं होता जीव
विज्ञापन
राधा कृष्ण मंदिर में भागवत कथा में सुनाया पशु बलि निषेध का प्रसंग
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सनातन धर्म सभा की ओर से गंज बाजार में स्थित राधा कृष्ण मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन शुक्रवार को पशु बलि निषेध का प्रसंग सुनाया गया। इस दौरान कथा सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। कथावाचक दुर्गा दत्त शर्मा ने कहा कि जिस व्यक्ति के भीतर एक बार भक्ति का बीज अंकुरित हो जाता है, वह ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ या संन्यास किसी भी आश्रम में रहे, भगवान के चरणों से दूर नहीं होता। मनुष्य शरीर केवल खाने-पीने, हंसने और सोने के लिए नहीं मिला है। विषयों का भोग तो पशु भी करते हैं। इस दौरान कथा व्यास ने पुराणों की महिमा, भक्ति और जीवात्मा-परमात्मा के संबंध का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि पुराण एक ही है जिसके 18 प्रकरणों को 18 पुराण कहा जाता है। पुराण ने स्वयं को ब्रह्म स्वरूप माना है। उन्होंने विभिन्न पुराणों को भगवान के विराट स्वरूप के विभिन्न अंगों से जोड़कर उनकी महत्ता समझाई। उन्होंने गुरु और माता-पिता के कर्तव्य पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि वह गुरु नहीं जो शिष्य को सांसारिक बंधनों से मुक्त होने का मार्ग न दिखा सके। इसी प्रकार संतान को अच्छी शिक्षा और संस्कार न देने वाले माता-पिता भी उसके वास्तविक हितैषी नहीं हो सकते। सभा के प्रचार मंत्री सुमन पाल दत्ता ने बताया कि कथा 15 सितंबर तक प्रतिदिन शाम 4 से 6 बजे तक आयोजित की जाएगी।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सनातन धर्म सभा की ओर से गंज बाजार में स्थित राधा कृष्ण मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन शुक्रवार को पशु बलि निषेध का प्रसंग सुनाया गया। इस दौरान कथा सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। कथावाचक दुर्गा दत्त शर्मा ने कहा कि जिस व्यक्ति के भीतर एक बार भक्ति का बीज अंकुरित हो जाता है, वह ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ या संन्यास किसी भी आश्रम में रहे, भगवान के चरणों से दूर नहीं होता। मनुष्य शरीर केवल खाने-पीने, हंसने और सोने के लिए नहीं मिला है। विषयों का भोग तो पशु भी करते हैं। इस दौरान कथा व्यास ने पुराणों की महिमा, भक्ति और जीवात्मा-परमात्मा के संबंध का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि पुराण एक ही है जिसके 18 प्रकरणों को 18 पुराण कहा जाता है। पुराण ने स्वयं को ब्रह्म स्वरूप माना है। उन्होंने विभिन्न पुराणों को भगवान के विराट स्वरूप के विभिन्न अंगों से जोड़कर उनकी महत्ता समझाई। उन्होंने गुरु और माता-पिता के कर्तव्य पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि वह गुरु नहीं जो शिष्य को सांसारिक बंधनों से मुक्त होने का मार्ग न दिखा सके। इसी प्रकार संतान को अच्छी शिक्षा और संस्कार न देने वाले माता-पिता भी उसके वास्तविक हितैषी नहीं हो सकते। सभा के प्रचार मंत्री सुमन पाल दत्ता ने बताया कि कथा 15 सितंबर तक प्रतिदिन शाम 4 से 6 बजे तक आयोजित की जाएगी।