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बहन के साथ रेप के प्रयास के दोषी को तीन साल की कैद

Thu, 19 May 2016 11:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 19 May 2016 11:47 AM IST
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three year imprisonment in attempt to rape case
सत्र न्यायाधीश ने आरोपी पर आरोप साबित न होने से उसे बरी कर दिया था।

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चचेरी बहन के साथ दुराचार के प्रयास में दोषी को तीन वर्ष का कारावास और पांच हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा दायर अपील को मंजूर करते हुए यह सजा सुनाई।

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न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश सीबी बारोवालिया की खंडपीठ ने सत्र न्यायाधीश बिलासपुर के फैसले के खिलाफ प्रदेश सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए पाया कि आरोपी वीर सिंह ने 19 मई 2007 को अपनी चचेरी बहन की आबरू लूटने की कोशिश की थी।
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मामले के अनुसार वीर सिंह ने आठ साल की अपनी चचेरी बहन जो तीसरी कक्षा में पढ़ती थी, से स्कूल से घर जाते समय दुराचार करने की कोशिश की थी। लेकिन पीड़ित और उसके भाई के शोर मचाने पर आरोपी अपने इरादे में सफल नहीं हो सका।
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पीड़ित ने आरोपी द्वारा किए गए कुकृत्य को अपने घर में बताने पर अभिभावकों ने आरोपी के खिलाफ सदर पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज करवाई। सत्र न्यायाधीश बिलासपुर ने आरोपी पर आरोप साबित न होने से उसे बरी कर दिया था। जिसके बाद प्रदेश सरकार ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

चरस रखने के दोषी को दस साल का कठोर कारावास

three year imprisonment in attempt to rape case
जेल

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर संजय शर्मा को दस साल के कठोर कारावास और एक लाख रुपये का जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर की खंडपीठ ने फास्ट ट्रैक कोर्ट मंडी द्वारा सुनाए गए फैसले को पलटते हुए यह आदेश दिए।

फास्ट ट्रैक कोर्ट मंडी ने दोषी को आरोपों से मुक्त कर दिया था। अभियोजन पक्ष द्वारा न्यायालय के समक्ष रखे तथ्यों के अनुसार सात दिसंबर 2009 को जब आरोपी सीली लारजी की तरफ से बैग सहित आ रहा था तो पुलिस ने उसे तलाशी के लिए रोका। बैग की तलाशी के दौरान पाया गया कि दोषी ने बैग में एक कंटेनर डाल रखा था।

कंटेनर में लग रहा था कि शहद डाला हुआ है लेकिन एक मादक पदार्थ की गंध दे रहा था। कंटेनर को खोलने के बाद पाया गया कि उसमें दोषी ने 12 पैकेट चरस के रखे हुए थे। जिनका कुल वजन 6 किलो 250 ग्राम था। दोषी के खिलाफ मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया गया। लारजी पुलिस स्टेशन द्वारा दोष साबित करने के लिए सत्र न्यायाधीश मंडी की अदालत के समक्ष चालान पेश किया गया।

मामले पर ट्रायल फास्ट ट्रैक कोर्ट मंडी की अदालत के समक्ष चला। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 11 गवाह अभियोग साबित करने के लिए पेश किए गए थे। संजय शर्मा साक्ष्यों के अभाव के कारण निचली अदालत से बरी हो गया था। जिसे राज्य सरकार ने अपील के माध्यम से हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी थी।

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