सिडार वुड ऑयल मामले में तीन पर एफआईआर, आरोपियों के ठिकानों से बरामद हुआ इतना तेल
लाखों रुपये की कीमत वाले सिडार वुड ऑयल की बरामदगी के बाद वन महकमे की ओर से तीन आरोपियों के खिलाफ थाना चौपाल में एफआईआर दर्ज करवाई गई है। इन तीन अलग-अलग मामलों में चौपाल इलाके के ही रहने वाले राकेश कुमार, मस्तराम और रमेश कुमार के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है।
वन महकमे की टीम ने इनके ठिकानों से अवैध तौर पर रखा सिडार वुड ऑयल बरामद किया था। अभी तक इन तीनों आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया है। पुलिस हर पहलू पर मामले की जांच कर रही है। इस पूरे प्रकरण में वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं। तेल के इस काले कारोबार का भंडाफोड़ होने से विभागीय अमला भी शक के घेरे में आ गया है।
बड़ा सवाल है कि सक्रिय वन माफिया का पता आखिर विभागीय कर्मियों को क्यों नहीं चला। अब तक की जांच में सामने आया है कि सिडार वुड ऑयल निकालने की प्रक्रिया लंबी है। जंगल में सूखे देवदार के पुराने तने व जड़ों को खोद कर जमा किया जाता है। इसमें कई महीने का समय लगता है। तेल निकालने की भट्टी एक स्थान पर तैयार होती है।
सराहां के जंगलों में अभी बनी हुई हैं ऐसी कई भट्टियां
सराहां के जंगलों में ऐसी कई भट्टियां अभी बनी हुई हैं। क्यारी कूहल के बाद पहला मामला जहां पर पकड़ा गया, उसकी दूरी सराहां चौपाल मुख्य सड़क से करीब दो किलोमीटर व गांव के संपर्क मार्ग से केवल 20 मीटर है। नाले में सड़क पर वाहनों की आवाजाही भट्ठी वाले स्थान के सामने से होती रहती है।
खास बात यह कि यहां पर भट्ठी कई साल पहले से बनी है। जाहिर है इस कारोबार के लिए कई मजदूर महीनों तक वहीं रहे होंगे। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है। प्रतिबंध के बाद भी दो साल पहले नाले में भट्ठी के पास सिडार ऑयल निकालने के लिए देवदार की लकड़ियों के ढेर लगे थे।
हालांकि विभाग ने मामला सामने आने के बाद लकड़ी नष्ट करने का दावा किया। लेकिन ऐसी नहीं हुआ। इस बार भी कई दिनों से प्लास्टिक के तिरपाल से लकड़ियां ढंकी पड़ी थीं। लेकिन वन विभाग ने न तो पहल की न ही दशकों पुरानी भट्टियों को नष्ट किया।
इस काम आता है सिडार ऑयल
सिडार ऑयल से चर्म रोग की कई दवाइयां बनती हैं। केरल में इसकी अधिक मांग है। वहां पर कई आयुर्वेदिक औषधि में इसका अधिक प्रयोग होता है। विदेशों में भी इसका निर्यात किया जाता है।क्यारी के समीप तेल बरामद होने पर अधिकारियों के मौके से गायब रहने का वीडियो वन विभाग के गार्ड ने वायरल किया था।
वीडियो वायरल होने के बाद विभाग के संबंधित रेंज आफिसर का तबादला कर दिया गया। डीएफओ चौपाल एमएस चंदेल ने कहा उनको इसके दाम की जानकारी नहीं है। जिन लोगों के पास सिडार वुड ऑयल पकड़ा गया, विभाग उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने कहा किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।
एसपी शिमला ओमापति जम्वाल का कहना है कि इस मामले में वन महकमे की शिकायत के आधार पर तीन लोगों के खिलाफ अलग-अलग एफआईआर थाना चौपाल में दर्ज कर ली गई है। आरोपियों को अभी गिरफ्तार नहीं किया गया है। मामले की जांच चल रही है।