80 फीसदी बिल नकली, तो कैसे हुई 21 सौ करोड़ की कर चोरी
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हिमाचल प्रदेश को 21 सौ करोड़ से ज्यादा के राजस्व का चूना लगाने वाली टेक्नोमैक कंपनी के घोटाले की जांच में अब नए तथ्य सामने आने शुरू हो गए हैं। सीआईडी की अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि जिस कंपनी पर 21 सौ करोड़ के घोटाले का आरोप लगा, उसके द्वारा लोन के लिए इस्तेमाल किए गए अस्सी फीसदी बिल फर्जी थे।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आबकारी अफसरों ने बिना अपनने एंट्री बैरियर के डाटा के मिलान के ही फर्जी बिलों के आधार पर कैसे टैक्स असेसमेंट कर दिया।
यही नहीं, अगर असेसमेंट को सही भी मान लिया जाए तो करोड़ों के माल को तैयार करने के लिए आए कच्चे माल और बेचने के लिए प्रदेश से बाहर ले जाए गए बने हुए उत्पाद की जानकारी विभाग को कैसे नहीं लगी। सीआईडी अब पूरे मामले में आबकारी अफसरों की भूमिका की जांच में जुट गई है।
एजेंसी को मिले अहम सुराग
सूत्रों की माने तो कंपनी के बोर्ड में शामिल रहे पूर्व आईएएस के बेटे विनय शर्मा की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी को कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। चार दिन की रिमांड के दौरान जांच टीम को शर्मा से कई ऐसी जानकारियां मिली हैं जिनसे सीधे तौर पर आबकारी अफसरों के खेल का पता चल रहा है।
नाम न लिखने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा कि फर्जी बिल लगाकर बैंक से लोन उठाने पर तो कंपनी के खिलाफ मामला बनता है लेकिन जब माल आया और गया ही नहीं तो इतना बड़ा टैक्स चोरी का मामला कैसे बन गया, यह बड़ा सवाल है।
कहा कि जांच में अब आबकारी अफसरों को सख्ती से शामिल होने के लिए कहा जा रहा है। अगर अफसरों व कर्मचारियों ने जांच में सहयोग नहीं किया तो और गिरफ्तारी भी हो सकती है।