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टेक्नोमैक घोटाला: 6000 करोड़ किसने डकारा, ये अफसर CID के रडार पर

Mon, 26 Mar 2018 01:22 PM IST
संजय भारद्वाज, अमर उजाला, नाहन (सिरमौर)
संजय भारद्वाज, अमर उजाला, नाहन (सिरमौर) Updated Mon, 26 Mar 2018 01:22 PM IST
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Technomac company 6000 crore scam Himachal CID eyes on excise revenue and bank officers

इंडियन टेक्नोमैक कंपनी से जुड़े लगभग 6000 करोड़ रुपये के घोटाले में कई अधिकारी भी सीआईडी के रडार पर आ गए हैं। इनमें आबकारी, राजस्व और बैंक अधिकारी शामिल हैं, जिन्हें सीआईडी ने चिह्नित किया है। माना जा रहा है कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से ही कंपनी ने इतने बड़े घोटाले को अंजाम दिया।

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जल्द ही घोटाले से संबंधित कई बड़े अफसरों की गिरफ्तारियां हो सकती हैं। सीआईडी की एक टीम ने डीआईजी वीके धवन के नेतृत्व में सील हुई कंपनी के परिसर का निरीक्षण किया। शनिवार को कंपनी के दफ्तर से कुछ जले हुए बिल भी बरामद किए हैं। आशंका है कि घोटाले से संबंधित सुबूतों को मिटाने का प्रयास किया गया है।
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सीआईडी ने मौके से मिट्टी के सैंपल लेकर जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेज दिए हैं। गौरतलब है कि टेक्नोमैक कंपनी पर 2175 करोड़ रुपये के आबकारी टैक्स की चोरी का आरोप है। बैंकों से भी 2300 करोड़ रुपये के ऋण लेकर कंपनी के कर्ताधर्ता गायब हो चुके हैं। 

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बिलों को भी जला दिया

Technomac company 6000 crore scam Himachal CID eyes on excise revenue and bank officers

इसके अलावा बिजली बोर्ड, आयकर विभाग, ईपीएफ को जोड़कर यह कुल घपला लगभग 6000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इस मामले में सीआईडी ने पहले ही मामला दर्ज किया है, जबकि माजरा थाने में भी एफआईआर दर्ज हुई है। पुलिस ने यह मामला भी सीआईडी के सुपुर्द किया है। पूर्व आईएएस के बेटे विनय कुमार की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में कई खुलासे हो रहे हैं।

अब सीआईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि कंपनी ने वर्ष 2008 से लेकर 2014 तक के कई बिलों को कंपनी परिसर में ही जला दिया था। कंपनी के 70 से 80 फीसदी बिल फर्जी होने की आशंका जताई जा रही है। लिहाजा सीआईडी मामले में फूंक-फूंककर कदम रख रही है। मामले की गहन छानबीन के लिए जल्द ही कुछ टीमें बनाई जाएंगी, जो राज्य से बाहर कंपनी से जुड़े ठिकानों पर दबिश देकर छानबीन कर सकती हैं।

20 हजार की नौकरी करता था विनय

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जल्द ही मामले की जांच को टीमें गठित होंगी। मुख्य आरोपियों की तलाश के लिए यह जरूरी है। घोटाले में कई सफेदपोश भी शामिल हो सकते हैं। मामले में आबकारी एवं कराधान विभाग, राजस्व विभाग, बैंक से जुड़े लोगों की पहचान की गई है। - वीके धवन, डीआईजी, सीआईडी

जांच में खुलासा हुआ है कि गिरफ्तार विनय कंपनी में महज 20 हजार रुपये प्रति माह की नौकरी करता था। बाद में उसे कंपनी का निदेशक बनाया गया। ऐसे में सीआईडी यह भी जांच कर रही है कि कहीं विनय को निदेशक बनाकर उसके नाम से तो यह घपला नहीं किया गया। उसकी इस मामले में संलिप्तता है या उसे फंसाया गया।

मुख्य आरोपी के परिवार से होगी पूछताछ 
टेक्नोमैक घोटाले का मुख्य आरोपी अभी पकड़ से दूर है। आशंका जताई जा रही है कि वह विदेश चला गया है। उसके परिवार के लोगों को ट्रेस किया जा रहा है। परिवार के लोगों से पूछताछ होगी, जिससे पता चल सकेगा कि वह कहां पर है।

जांच के दौरान फर्जी मुहरें बरामद

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करीब बाइस सौ करोड़ के कथित टैक्स चोरी और चार हजार करोड़ से ज्यादा लोन लेने के मामले से जुड़े टेक्नोमैक घोटाले की जांच कर रही सीआईडी के हाथ रविवार को बड़ी कामयाबी लगी है।

जांच टीम ने कंपनी के पांवटा स्थित परिसर से आबकारी एवं कराधान विभाग, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर जैसे कई महकमों के वरिष्ठ अधिकारियों की मुहरें बरामद की है।

सूत्रों का कहना है कि इन्हीं मुहरों के जरिये कंपनी के अधिकारियों ने माल के आने और जाने के दस्तावेजों व फर्जी बिलों को तैयार किया। इसके बाद इन्हीं दस्तावेजों को बैंक में लोन के लिए इस्तेमाल किया गया। 

कंपनी ने कई बैंकों से लोन लिया था। इसी लोन को हासिल करने के बाद कंपनी के एमडी व अन्य अधिकारी गायब हो गए। जांच कर रही टीम इसे बड़ी उपलब्धि मान रही है। अब इन मुहरों और कंपनी द्वारा इस्तेमाल किए बिलों का मिलान कराया जाएगा।

सूत्रों का कहना है कि विनय शर्मा की गिरफ्तारी और उसके जांच में सहयोग करने के बाद जांच टीम को कई और अहम सुराग हाथ लगने की उम्मीद है। बैंक से भारी-भरकम लोन लिया गया, इसी वजह से प्रवर्तन निदेशालय ने भी मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका को देखते हुए सीआईडी से जांच से जुड़े दस्तावेज देने के लिए पत्र लिख चुकी है। 

अब सीआईडी ने शुरू की फैक्ट्री की जमीन की पैमाइश
सीआईडी ने फैक्ट्री परिसर व कंपनी की पूरी जमीन की पैमाइश का काम भी शुरू करा दिया है। इसमें राजस्व से जुड़े अधिकारियों की मदद ली जा रही हैै। विभागीय सूत्रों की मानें तो पैमाइश के बाद जमीन खरीद में हुए खेल की तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी।

चूंकि जांच टीम को जानकारी मिली थी कि आधी जमीन कंपनी के नाम थी और बाकी अब भी अन्य लोगों के नाम ही थी, जिसमें से कुछ जमीन को बेचा भी जा चुका है। ऐसे में सीआईडी इस मामले में फर्जी तरीके से जमीन की खरीद-फरोख्त की भी आशंका पर जांच कर रही है।

अफसरों ने एमडी से जुर्माना लिया न जांच की

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प्रदेश के बहुचर्चित इंडियन टेक्नोमैक घोटाले की जांच कर रही सीआईडी अब कंपनी के एमडी राकेश शर्मा की आबकारी अफसरों की नजदीकियों की जांच कर रही है। माना जा रहा है कि एमडी की फरारी में आबकारी अफसरों का हाथ रहा है। सूत्रों की मानें तो राकेश ने कर चोरी की जांच करने के लिए तत्कालीन आबकारी अफसरों से संपर्क किया।

जुर्माना भरने की भी बात कही, लेकिन अफसरों ने किन्हीं कारणों से न तो जुर्माने की रकम ली और न ही मामले की जांच आगे बढ़ाई। नाम न लिखने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि उस समय तक राकेश कंपनी के कामकाज को और बढ़ाने पर विचार कर रहा था।

चूंकि कंपनी की क्षमता कम थी, इसलिए लोन लेने के लिए फर्जी बिलों का सहारा लिया, जिसमें विनय ने उसका साथ दिया। अब सीआईडी इस बात को जानने का प्रयास कर रही है कि अगर राकेश जुर्माना भरना चाहता था तो क्यों अफसरों ने उसके मामले की सुनवाई नहीं की।

टीम अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या राकेश ने अपनी फैक्ट्री को बंद कर बैंक का पैसा लेकर जाने से पहले किसी आबकारी अफसर से संपर्क किया था। इसके अलावा कर चोरी के आरोप सामने आने के बाद क्या अफसरों और राकेश के बीच किसी तरह का संवाद हुआ था। सीआईडी की यह सारी कवायद कंपनी के निदेशक विनय शर्मा से पूछताछ में मिली जानकारी के बाद शुरू हुई है।

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