तारादेवी अवैध कटान के मास्टरमांइड ने किया सरेंडर
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तारादेवी के पास जंगल से 477 पेड़ों के कटान मामले में पुलिस से लुकाछिपी का खेल खेलने वाले होटलियर ने सोमवार को शिमला एसपी कार्यालय में सरेंडर कर दिया। अदालत से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद से पुलिस उसकी तलाश कर रही थी लेकिन वह लगातार पुलिस को गच्चा देता रहा।
मामले के तूल पकड़ने पर पुलिस ने आरोपी पर दबाव बनाया और उसे सरेंडर करने के लिए मजबूर कर दिया। आरोपी होटलियर अमरीक सिंह नागपाल को हिरासत में लेकर पुलिस स्टेशन बालूगंज भेज दिया है। आरोपी से पूछताछ चल रही है। इसकी पुष्टि एसपी डी डब्ल्यू नेगी ने की है।
तारादेवी में निजी भूमि से 477 पेड़ कटान का मामला सामने आने पर पुलिस को अमरीक सिंह की तलाश थी। अमरीक सिंह इस जमीन को खरीदने का इच्छुक था और उसने भूमि मालिक को तीन करोड़ बतौर बयाना भी दे दिया था।
पूछताछ में हो सकते हैं बड़े खुलासे
इससे पहले की वह जमीन से संबंधित दूसरी औपचारिकताएं पूरी कर सौदे को अंतिम रूप देता, पेड़ कटान का खुलासा हो गया। जमीन परमिंदर कौर के नाम से है। उन्होंने साफ कहा है कि पेड़ों के कटान से उनका कोई लेना देना नहीं। लिहाजा पुलिस की जांच होटलियर पर घूमी।
अब इसके गिरफ्त में आने के बाद ही सच्चाई का पता चल पाएगा कि पेड़ कटान के पीछे कौन हैं? किसकी शह पर सैकड़ों पेड़ों का कत्ल किया गया। हालांकि पुलिस की जांच का दायरा पेड़ कटान मामले में केवल दो लोगों पर घूम रहा है इनमें भूमि मालिक और उस व्यवसायी पर है जिसके साथ जमीन का सौदा हुआ।
तीसरे व्यक्ति को प्राइवेट लैंड से पेड़ काटने की जरूरत ही क्या थी जबकि आसपास सारा सरकारी जंगल है। प्राइवेट लैंड से लकड़ी काटकर क्या फिर वह मंदिर में दान करता? लिहाजा अब मुख्य आरोपी के हाथ में आने के बाद कुछ और अहम खुलासे होने का सभी को इंतजार है।
38 बीघा जमीन, 16 करोड़ में सौदा
38 बीघा जमीन का सौदा करीब 16 करोड़ में हुआ। पेशगी के तौर पर तीन करोड़ भी अदा किए हैं। अगले साल मई तक जमीन के खरीददार को 118 की मंजूरी के साथ अन्य औपचारिकताएं भी पूरी करने की शर्त रखी है। तय सीमा पर अगर यह शर्तें पूरी नहीं कर पाता तो सौदा रद समझा जाएगा। दावा है कि एग्रीमेंट के बाद भूमि मालिक गुड़गांव लौट गए।
घटना के समय फॉरेस्ट गार्ड अवकाश पर था
अब तक की छानबीन में कई तथ्य सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि जिस समय वारदात को अंजाम दिया गया उस वक्त इस बीट में तैनात महिला वन गार्ड प्रसूति अवकाश पर थीं। इसका अतिरिक्त कार्यभार खलीनी बीट में कार्यरत गार्ड को दे रखा था।
लिहाजा आरोपियों को इसकी पक्की खबर थी कि पेड़ काटने से रोकने के लिए यहां कोई नहीं आएगा। पेड़ कटान के पीछे जिसका भी हाथ है क्या उसकी वन महकमे में भीतर तक काफी पैठ है। यह जांच का विषय है।
जहां पेड़ कटे वो जमीन परमिंद्र के नाम
राजस्व रिकार्ड में यह जमीन परमिंद्र के नाम से है। यह तब से है जब यह जगह पंजाब में होती थी। हिमाचल अलग राज्य बनने के बाद भी इस जमीन का मालिकाना हक राजस्व में परमिंद्र के नाम है। यह जमीन पुश्तैनी है। मौजूदा समय में यह परिवार गुड़गांव में रहता है। जमीन की सौदेबाजी को लेकर अमरीक सिंह नागपाल के साथ एग्रीमेंट हुआ है। यह चंडीगढ़ के एक होटल और रिजार्ट कंपनी के निदेशक बताए जा रहे हैं।
पेड़ काटने के बाद आरोपियों ने बान की लकड़ी को बाकायदा तारादेवी मंदिर में दान दिया है। अब यहां कौन लकड़ी के यह ढेर लगा गया इसका पुलिस पता लगा रही है। मंदिर में रसोई गैस सिलेंडर का ही अधिकांश तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।
छह कर्मचारी हो चुके हैं निलंबित
इस मामले में सहायक अरण्यपाल, डीएफओ, आरओ समेत पांच लोगों को वन महकमे ने सस्पेंड किया है। कानूनगो को भी इस मामले में निलंबित किया हैं।