हाईकोर्ट ने तारादेवी गोलीकांड के दिए सीबीआई जांच के आदेश
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाते हुए तारादेवी गोलीकांड की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए हैं।
न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने मृतक की माता कमला पंवर की ओर से याचिका निपटारा करते हुए उक्त आदेश पारित किए है।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि जिन पुलिस कर्मियों ने गोली चलाई थी उन्हें बचाने के लिए पुलिस ने भरसक प्रयास किया और उनके खिलाफ क्रास एफआईआर होने के बावजूद कैंसलेशन रिपोर्ट पेश कर दी।
ज्ञात रहे कि 9 जनवरी 2013 को तारादेवी के समीप अपनी जब्त गाड़ी को देखने के लिए उदयवीर सिंह अपने एक दोस्त के साथ गया था। दोनों दोस्तों की पुलिस से कहासुनी हो गई और उसके बाद दो पुलिस कर्मियों ने उदय वीर सिंह पर गोली चला दी थी जिससे उसकी मौत हो गई थी।
दूसरा युवक इस घटना में घायल हो गया था। मामले में दो पुलिस कर्मियों के खिलाफ 10 जनवरी 2013 को धारा 304 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
14 नवंबर 2013 को अभियोजन पक्ष ने दोनों पुलिस कर्मियों के खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई को सौंपी है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे थे सवाल
तारादेवी -टुटू बाईपास रोड पर स्थित पुलिस पार्किंग में यह वारदात नौ जनवरी 2013 की रात को हुई थी। वारदात के अगले दिन पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए गए, शहर में जगह-जगह प्रदर्शन कर लोगों ने अपना विरोध जताया।
पुलिस महकमे की ओर से थाना बालूगंज में क्रास एफआईआर दर्ज की गई थी। यही नहीं अब कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखी प्रतिक्रिया जताई है। अब इस मामले को सीबीआई खंगालेगी।
अगर मामले में मृतक की मां के अनुसार सच्चाई सामने आती है तो यह शिमला पुलिस के लिए परेशानी भरी होगी। रात करीब ग्यारह बजे तीन युवक उदयवीर सिंह पंवर, हर्ष शर्मा और नितिन पुलिस पार्किंग में पहुंचे।
यहां हर्ष शर्मा की एक गाड़ी पुलिस ने जब्त कर रखी थी। युवकों ने दावा किया था कि वह अपनी इसी कार को देखने आए थे।