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तीसरी डेड लाइन आज खत्म, कटवाल ने नहीं किया सरेंडर
ब्यूरो/अमर उजाला, हमीरपुर
Updated Tue, 15 Nov 2016 09:28 AM IST
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हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड की भर्तियों में धांधली के बहुचर्चित मामले में दोषी बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन एसएम कटवाल ने तीसरी डेडलाइन मंगलवार को खत्म हो रही है। सोमवार शाम तक एसएम कटवाल ने आत्मसमर्पण नहीं किया।
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इससे पहले कटवाल को 26 सितंबर तक सरेंडर करना था, लेकिन सरेंडर नहीं करने के बाद और विजिलेंस द्वारा गिरफ्तार नहीं किए जाने के बाद कोर्ट ने 18 अक्तूबर तक सरेंडर करने के लिए वारंट जारी किया था।
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18 अक्तूबर को भी एसएम कटवाल ने सरेंडर नहीं किया तो विजिलेंस ने दोबारा कोर्ट में अपना पक्ष रखा। इसके बाद हमीरपुर कोर्ट ने 15 नवंबर तक एसएम कटवाल को वारंट जारी कर सरेंडर करने के आदेश दिए हैं, लेकिन तीसरी डेड लाइन खत्म होने पर भी कटवाल का विजीलेंस कोई सुराग नहीं लगा पाई है।
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हाल ही में कोर्ट ने लुक आउट नोटिस भी जारी किया है, ताकि एसएम कटवाल विदेश न भाग पाए। भर्तियों के धांधली मामले में न्यायालय ने चारों दोषियों को 26 सितंबर तक सरेंडर करने के आदेश दिए थे, लेकिन एसएम कटवाल ने अभी तक सरेंडर नहीं किया है। जबकि इस मामले से जुड़े दो शिक्षकों और बोर्ड के एक सदस्य को पुलिस जेल भेज चुकी है।
बोर्ड की भर्तियों में धांधली के दोषी तत्कालीन बोर्ड सदस्य डा. विद्यानाथ ने 24 सितंबर को कोर्ट में सरंडर किया था। वहीं दोषी शारीरिक शिक्षक राकेश छाबड़ा को विजिलेंस ने चंबा और टीजीटी के लिए चयनित मदन गोपाल को विजिलेंस ने ऊना से गिरफ्तार किया था। तीनों को न्यायालय में पेश कर जेल में भेज दिया गया है, जबकि मामले का चौथा दोषी अब तक पुलिस गिरफ्त से बाहर है।
उधर, एएसपी विजीलेंस बलबीर सिंह का कहना है कि दोषी एसएम कटवाल का अब तक कोई सुराग नहीं लग पाया है। दोषी की धरपकड़ को जगह जगह छापेमारी की जा रही है।
भर्तियों में धांधली का मामला
हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड हमीरपुर(अब हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग) में वर्ष 2001-02 में सरकारी पदों पर नियुक्तियां के दौरान गड़बड़ी के आरोप लगे थे। भाजपा सरकार के समय यह भर्तियां हुई थीं और एसएम कटवाल उस समय बोर्ड के चेयरमैन थे, जबकि डा. विद्यानाथ बोर्ड के सदस्य के पद पर नियुक्त थे। वर्ष 2004 में सत्ता बदलते ही मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इस भर्ती मामले की जांच करवाई।
विजीलेंस ने मामले की जांच कर कोर्ट में चालान पेश किया। जिसके बाद सेशन कोर्ट हमीरपुर ने इस मामले में चार लोगों बोर्ड के चेयरमैन एसएम कटवाल, सदस्य डा. विद्यानाथ, शारीरिक शिक्षक राकेश छाबड़ा और टीजीटी शिक्षक मदन गोपाल को दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी। इस फैसले को आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन जुलाई 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिका को खारिज करते हुए सेशन कोर्ट का फैसले को सही मानते हुए एक साल कैद की सजा बरकरार रखी।