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एक माह में पकड़ी डेढ़ लाख लीटर अवैध शराब
Updated Fri, 03 Nov 2017 11:10 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। प्रदेश में विधानसभा चुनावों के बीच शराब के अवैध कारोबार पर शिकंजा कसते हुए प्रदेश आबकारी एवं कराधान विभाग ने एक महीने के अंदर छापामारी कर 157000 लीटर शराब पकड़ कर अपने कब्जे में ली। इसमें मुख्य तौर पर देसी और इंगलिश शराब शामिल है। विभाग ने शराब माफिया पर लगाम कसने के लिए 52 टास्क फोर्सों का गठन किया है। विभाग ने शराब माफिया और इनके सरगनों पर नजर रखने के लिए प्रदेश की हर शराब फैक्टरी सीसीटीवी से कैद की है। वहीं, शराब ढोने वाले वाहनों पर भी जीपीएस सिस्टम से नजर बना रखी है। प्रदेश के इतिहास में पहली बार चुनावों के दौरान इतनी बढ़ी तादाद में शराब पकड़ी गई है। चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत विभाग ने प्रदेश में जगह-जगह नाके लगाकर बार, ढाबों और ठेकों में दबिश दी। शराब का उत्पाद करने वाली फैक्टरियों पर अपनी निगरानी बनाई रखी। साथ ही शराब को तैयार करने के लिए कच्चे माल का ब्योरा लिया और उसी के मुताबिक फैक्टरियों में शराब के उत्पाद पर नजर रखी।
पिछले चुनाव में पकड़ी थी 2100 लीटर शराब
साल 2012 में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान पूरे प्रदेश में आबकारी एवं कराधान विभाग ने मात्र 2100 लीटर गैरकानूनी शराब पकड़ी थी। वहीं, बीते लोकसभा चुनावों के दौरान महज 200 लीटर शराब पकड़ी थी। इस बार के विधानसभा चुनावों में अवैध शराब का आंकड़ा लाखों में पहुंच गया है।
कच्चे माल से लेकर उत्पादन तक नजर
प्रदेश आबकारी एवं कराधान विभाग के अतिरिक्त आयुक्त केके शर्मा ने बताया कि चुनावों में अवैध रूप से शराब की तस्करी रोकने के लिए शराब के कच्चे माल से लेकर उसके उत्पादन तक कड़ी नजर रखी जा रही है।
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शिमला। प्रदेश में विधानसभा चुनावों के बीच शराब के अवैध कारोबार पर शिकंजा कसते हुए प्रदेश आबकारी एवं कराधान विभाग ने एक महीने के अंदर छापामारी कर 157000 लीटर शराब पकड़ कर अपने कब्जे में ली। इसमें मुख्य तौर पर देसी और इंगलिश शराब शामिल है। विभाग ने शराब माफिया पर लगाम कसने के लिए 52 टास्क फोर्सों का गठन किया है। विभाग ने शराब माफिया और इनके सरगनों पर नजर रखने के लिए प्रदेश की हर शराब फैक्टरी सीसीटीवी से कैद की है। वहीं, शराब ढोने वाले वाहनों पर भी जीपीएस सिस्टम से नजर बना रखी है। प्रदेश के इतिहास में पहली बार चुनावों के दौरान इतनी बढ़ी तादाद में शराब पकड़ी गई है। चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत विभाग ने प्रदेश में जगह-जगह नाके लगाकर बार, ढाबों और ठेकों में दबिश दी। शराब का उत्पाद करने वाली फैक्टरियों पर अपनी निगरानी बनाई रखी। साथ ही शराब को तैयार करने के लिए कच्चे माल का ब्योरा लिया और उसी के मुताबिक फैक्टरियों में शराब के उत्पाद पर नजर रखी।
पिछले चुनाव में पकड़ी थी 2100 लीटर शराब
साल 2012 में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान पूरे प्रदेश में आबकारी एवं कराधान विभाग ने मात्र 2100 लीटर गैरकानूनी शराब पकड़ी थी। वहीं, बीते लोकसभा चुनावों के दौरान महज 200 लीटर शराब पकड़ी थी। इस बार के विधानसभा चुनावों में अवैध शराब का आंकड़ा लाखों में पहुंच गया है।
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कच्चे माल से लेकर उत्पादन तक नजर
प्रदेश आबकारी एवं कराधान विभाग के अतिरिक्त आयुक्त केके शर्मा ने बताया कि चुनावों में अवैध रूप से शराब की तस्करी रोकने के लिए शराब के कच्चे माल से लेकर उसके उत्पादन तक कड़ी नजर रखी जा रही है।
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