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Shimla News: मृतक की पत्नी को 9.50 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश
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एक्सक्लूसिव खबर
न्यायमूर्ति इंदर सिंह मेहता ने जिला आयोग हमीरपुर के फैसले को रखा बरकरार
बीमा कंपनी ने मृतक के मुआवजे के दावे को किया था खारिज, पत्नी ने आयोग में लगाई थी गुहार
साल 2015 में पीएनबी मेट लाइफ इंडिया इंश्योरेंस कंपनी का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक फैसले की सुनवाई में टिप्पणी की कि जब मृतक सोमदत्त शर्मा ने बीमा पॉलिसी खरीदते समय अपनी बीमारी के बारे में इनकार कर दिया था, तो बीमा कंपनी को उस समय उसकी चिकित्सा जांच करानी चाहिए थी, लेकिन बीमा कंपनी यह साबित करने में विफल रही कि सोमदत्त शर्मा पॉलिसी प्राप्त करने से पूर्व किसी बीमारी से ग्रसित थे।
राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंदर सिंह मेहता ने पीएनबी मेट लाइफ इंडिया इंश्योरेंस कंपनी (बीमाकर्ता) की अपील का निपटारा करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग हमीरपुर के पारित फैसले को बरकरार रखा है। इस फैसले में मृतक की पत्नी निर्मला देवी को शिकायत की तिथि से वसूली तक नौ प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज सहित 9,50,742 रुपये की राशि का भुगतान करने के आदेश दिए थे। साथ ही मुआवजा और मुकदमेबाजी खर्च के रूप में 30 हजार रुपये देने के भी निर्देश दिए थे। दरअसल, 22 जून, 2015 को शिकायतकर्ता के पति सोमदत्त शर्मा (मृतक बीमित व्यक्ति) ने बीमा कंपनी से 10 लाख रुपये की बीमा पॉलिसी खरीदी और 99,999 का वार्षिक प्रीमियम अदा किया। 12 जनवरी, 2017 को सोमदत्त शर्मा की मृत्यु हो गई। मृतक की पत्नी ने पति की मौत पर मुआवजे के लिए संबंधित दस्तावेजों के साथ विपक्षी पक्ष के समक्ष दावा पेश किया। लेकिन, विपक्षी पक्ष ने दावे को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि मृतक व्यक्ति पहले से ही गुर्दे की बीमारी (क्रोनिक किडनी रोग) और टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित था। बीमित व्यक्ति ने बीमा पॉलिसी लेते समय अपनी पिछली बीमारी के बारे में छुपाया था। इससे परेशान होकर 11 जनवरी, 2018 को शिकायतकर्ता ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दायर की थी। उधर, राज्य उपभोक्ता आयोग ने हमीरपुर आयोग के 25 अप्रैल 2024 के फैसले के विरुद्ध अपील को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि जिला आयोग के पारित आदेश में कोई त्रुटि नहीं है और इसमें किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
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न्यायमूर्ति इंदर सिंह मेहता ने जिला आयोग हमीरपुर के फैसले को रखा बरकरार
बीमा कंपनी ने मृतक के मुआवजे के दावे को किया था खारिज, पत्नी ने आयोग में लगाई थी गुहार
साल 2015 में पीएनबी मेट लाइफ इंडिया इंश्योरेंस कंपनी का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक फैसले की सुनवाई में टिप्पणी की कि जब मृतक सोमदत्त शर्मा ने बीमा पॉलिसी खरीदते समय अपनी बीमारी के बारे में इनकार कर दिया था, तो बीमा कंपनी को उस समय उसकी चिकित्सा जांच करानी चाहिए थी, लेकिन बीमा कंपनी यह साबित करने में विफल रही कि सोमदत्त शर्मा पॉलिसी प्राप्त करने से पूर्व किसी बीमारी से ग्रसित थे।
राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंदर सिंह मेहता ने पीएनबी मेट लाइफ इंडिया इंश्योरेंस कंपनी (बीमाकर्ता) की अपील का निपटारा करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग हमीरपुर के पारित फैसले को बरकरार रखा है। इस फैसले में मृतक की पत्नी निर्मला देवी को शिकायत की तिथि से वसूली तक नौ प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज सहित 9,50,742 रुपये की राशि का भुगतान करने के आदेश दिए थे। साथ ही मुआवजा और मुकदमेबाजी खर्च के रूप में 30 हजार रुपये देने के भी निर्देश दिए थे। दरअसल, 22 जून, 2015 को शिकायतकर्ता के पति सोमदत्त शर्मा (मृतक बीमित व्यक्ति) ने बीमा कंपनी से 10 लाख रुपये की बीमा पॉलिसी खरीदी और 99,999 का वार्षिक प्रीमियम अदा किया। 12 जनवरी, 2017 को सोमदत्त शर्मा की मृत्यु हो गई। मृतक की पत्नी ने पति की मौत पर मुआवजे के लिए संबंधित दस्तावेजों के साथ विपक्षी पक्ष के समक्ष दावा पेश किया। लेकिन, विपक्षी पक्ष ने दावे को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि मृतक व्यक्ति पहले से ही गुर्दे की बीमारी (क्रोनिक किडनी रोग) और टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित था। बीमित व्यक्ति ने बीमा पॉलिसी लेते समय अपनी पिछली बीमारी के बारे में छुपाया था। इससे परेशान होकर 11 जनवरी, 2018 को शिकायतकर्ता ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दायर की थी। उधर, राज्य उपभोक्ता आयोग ने हमीरपुर आयोग के 25 अप्रैल 2024 के फैसले के विरुद्ध अपील को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि जिला आयोग के पारित आदेश में कोई त्रुटि नहीं है और इसमें किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
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