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20 साल में तीन शिलान्यास, पुल के नाम पर बना पाए एक पिल्लर

Tue, 19 Sep 2017 03:53 PM IST
बलविंंद्र सोढी/कमलेश रत्न भारद्वाज, सुंदरनगर (मंडी)
बलविंंद्र सोढी/कमलेश रत्न भारद्वाज, सुंदरनगर (मंडी) Updated Tue, 19 Sep 2017 03:53 PM IST
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construction of bridge is pending from last three years at sundernagar

पहले पैदल, फिर जीप योग्य और अंत में बस योग्य पुल बनाने की घोषणाओं के साथ तीन मर्तबा शिलान्यास। आठ गावों की लाइफलाइन सरीखे इस पुल के नाम पर बीस साल गुजर जाने के बाद महज एक पिल्लर ही मिल पाया है। यह मामला विस क्षेत्र सुंदरनगर में अलसू पुल का है। 

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डैहर तहसील में अलसीहड़ खड्ड पर पुल निर्माण की सियासत के शिकार लोगों को कांगू से अलसू की 200 मीटर की दूरी के बजाय 5 किमी का फासला तय करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि पिछले चार विस चुनावों में यह चुनावी मुद्दा बना है। इस दफा भी यह पुल चुनावी रण के लिए तैयार है, लेकिन पुल का निर्माण करने में सारा तंत्र नाकाम साबित हो रहा है।  
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कभी पैदल पुल, कभी जीप योग्य और कभी बस योग्य पुल की आस बंधाने वालों ने सुंदरनगर विधानसभा क्षेत्र से वादे किए। लेकिन अलसू पुल का काम एक पिल्लर के निर्माण से आगे नहीं बढ़ पाया। नतीजतन 20 साल पहले 24 लाख की लागत वाले पुल की वर्तमान अनुमानित लागत बढ़कर ढाई करोड़ पार कर गई है। 70 मीटर लंबे पुल का इंतजार लगातार लंबा खिंचता जा रहा है।  
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नेताओं से मांगेंगे जवाब
बीस साल से पुल की बाट जोह रहे ग्रामीण नेताओं से हिसाब चाहते हैं। स्थानीय निवासी परस राम, रमेश कुमार, सुनीता देवी, बेली राम व पंकज का कहना है कि जब-जब भी इस पुल का शिलान्यास हुआ, हर बार इसका एक साल में निर्माण पूरा करने का दावा होता रहा। लेकिन पुल धरातल पर नहीं उतर पाया। चुनाव के समय नेताओं से वे इन वादों का पूरा हिसाब मांगेंगे। 

लोक निर्माण विभाग के डैहर में तैनात सहायक अभियंता इंजीनियर हितेश शर्मा ने कहा कि बरसात के कारण पुल के निर्माण कार्य में ठहराव आ गया था। विभाग ने ठेकेदार को शीघ्र ही इसका निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

दिसंबर 1997 में हुआ था पहला शिलान्यास

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सुंदरनगर की डैहर तहसील में अलसेहड़ खड्ड पर सबसे पहले 19  दिसंबर 1997 को तत्कालीन विधायक स्व. शेर सिंह ने ग्रामीणों की मांग पर पैदल पुल के लिए शिलान्यास किया था। इस पर उस समय करीब 24 लाख रुपये का खर्च प्रस्तावित किया गया था।

कुछ ही माह में सत्ता बदल जाने के बाद धूमल सरकार के समय में भाजपा विधायक ने इस पुल को पैदल योग्य न बनाने के बजाय जीप योग्य बनाने की घोषणा कर इसका शिलान्यास भी कर दिया।

उस समय बजट करीब एक करोड़ रुपये आंका गया था। लेकिन निर्माण पर फूटी कौड़ी भी खर्च नहीं हुई। सत्ता परिवर्तन से कांग्रेस सरकार आई और इस पुल को बस योग्य बनाने का वादा कर फिर से शिलान्यास कर दिया गया। 20 साल बाद न तो पैदल पुल बना, न जीप योग्य और न ही बसों की आवाजाही के लायक।

शुरू करवाया निर्माण: सोहन लाल 
विधायक व सीपीएस सोहन लाल ने कहा कि भाजपा ने इसमें राजनीति की है। काम शुरू नहीं करवाया जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। अब जाकर मामला ध्यान में आने के बाद इस पुल का निर्माण शुरू करवाया गया है।  

निर्माण की कवायद हुई तेज: रूप सिंह 
भाजपा के पूर्व मंत्री रूप सिंह ने कहा कि उनके कार्यकाल में पुल के निर्माण की कवायद तेज हुई थी। लेकिन उसके बाद कांग्रेस के कार्यकाल में काम शुरू नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि सरकार आते ही इस पुल का निर्माण युद्घस्तर पर किया जाएगा।
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