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नेपाल तबाही से सबक: हिमालयी टनल- बांध परियोजनाओं की होगी कड़ी निगरानी, पीएमओ ने मांगा ब्योरा
Sat, 29 Aug 2026 08:15 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Krishan Singh
Updated Sat, 29 Aug 2026 08:15 PM IST
सार
प्रधानमंत्री कार्यालय ने हिमाचल प्रदेश समेत हिमालयी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में निर्माणाधीन जल विद्युत परियोजनाओं तथा सड़क सुरंगों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है।
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बांध।
- फोटो : संवाद
विस्तार
नेपाल में प्राकृतिक आपदा के दौरान टनल और बांध क्षेत्रों में हुए नुकसान ने हिमालयी राज्यों में बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्टों की सुरक्षा को लेकर केंद्र की चिंता बढ़ा दी है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने हिमाचल प्रदेश समेत हिमालयी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में निर्माणाधीन जल विद्युत परियोजनाओं तथा सड़क सुरंगों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है। पीएमओ ने राज्यों से विशेष तौर पर यह जानकारी मांगी है कि पहाड़ों की खोदाई के दौरान दुर्घटनाओं और प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए कौन-कौन से सुरक्षा प्रोटोकाल अपनाए जा रहे हैं।
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प्रधानमंत्री कार्यालय के सलाहकार तरुण कपूर की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक में संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में चल रहे टनल निर्माण की स्थिति पर चर्चा हुई। हिमाचल की ओर से अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी नजीम और प्रधान सचिव देवेश कुमार ने शिमला से बैठक में हिस्सा लिया। नेपाल की घटना के संदर्भ में निर्माण के दौरान जोखिम कम करने और आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने को लेकर राज्य से फीडबैक लिया गया। हिमाचल में सतलुज, ब्यास और रावी नदी बेसिन में करीब एक दर्जन छोटे-बड़े बांध और जल विद्युत प्रोजेक्ट हैं। कई परियोजनाओं में पानी की आवाजाही सुरंगों के माध्यम से होती है, जबकि कुछ परियोजनाओं में टनल निर्माण अभी जारी है।
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इसी तरह चंडीगढ़-शिमला और कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर कई सुरंगें बन चुकी हैं और कुछ हिस्सों में निर्माण चल रहा है। मटौर-शिमला और पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी एनएचएआई टनल परियोजनाओं पर काम कर रहा है। पीएमओ ने स्पष्ट किया है कि हिमालय की जटिल भूगर्भीय परिस्थितियों में टनल निर्माण को सामान्य निर्माण गतिविधि के तौर पर नहीं लिया जा सकता। खोदाई से पहले और निर्माण के दौरान विस्तृत जियोलॉजिकल सर्वे, आधुनिक रॉक सपोर्ट सिस्टम, पानी के रिसाव की निगरानी और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसे उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करना होगा। उद्देश्य यह है कि किसी भी भूगर्भीय हलचल, जल रिसाव या ढांचागत कमजोरी के संकेत समय रहते मिल सकें और बड़ी दुर्घटना से पहले आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
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