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इंटरव्यू: जानिए सीएम वीरभद्र की कहानी, उन्हीं की जुबानी

Thu, 23 Jun 2016 05:12 PM IST
दयाशंकर शुक्ल सागर/सुरेश शाडिल्य/अमर उजाला, शिमला
दयाशंकर शुक्ल सागर/सुरेश शाडिल्य/अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 23 Jun 2016 05:12 PM IST
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CM Virbhadra singh Exclusive interview on his 82nd birthday.
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह आज 82 साल के हो गए। वह बनना चाहते थे दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, लेकिन नियति उन्हें राजनीति में खींच लाई। फिर वे राजनीति के मझधार में ऐसे फंसे कि आज तक बाहर नहीं निकल पाए।

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उन पर सबसे बड़ा आरोप ये लगता है कि उन्होंने हिमाचल में कांग्रेस की सेकेंड लाइन तैयार नहीं की। इस पर वीरभद्र कहते हैं-ऐसा नहीं है। मैं कोई तानाशाह नहीं। मैंने कितने युवा नेताओं को मौका दिया, लेकिन दिक्कत ये है कि ये नेता अपने चुनाव क्षेत्र से खुद बाहर नहीं निकलते।
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इससे पूरे सूबे में उनकी जनप्रिय नेता की छवि नहीं बन पाती। अपनी राजनीतिक विरासत के बारे में वीरभद्र ने पहली बार कहा कि उनका बेटा इस बार विधानसभा चुनाव लड़ेगा और जीतेगा। इसलिए नहीं कि वह मेरा बेटा है, इसलिए क्योंकि विक्रमादित्य मेहनती, परिपक्व और विनम्र है।
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उन्होंने 54 साल के राजनीतिक कॅरिअर में कई उतार चढ़ाव देखे। अपने हर जन्मदिन पर वे अपनी जिन्दगी के पन्नों को एलबम की तरह पलटते हैं। वह अपने राजनीतिक अनुभवों पर किताब लिख रहे हैं।

इसके पन्ने वह रिटायरमेंट के बाद खोलेंगे। उनका कहना है कि अभी पन्ने खोल दिए तो कई बड़ी हस्तियां आहत होंगी। इस मौके पर उनसे जुड़े तमाम विवादों पर अमर उजाला ने उनसे लंबी बात की। पेश है कुछ अंश-

सीएम ने बताया टिकट के लिए लाल बहादुर शास्त्री ने की थी बात

CM Virbhadra singh Exclusive interview on his 82nd birthday.

प्रश्न : आज आप 82 साल की आयु को पूरा कर रहे हैं। इस पूरे जीवन को किस तरह से देखते हैं?

उत्तर : विद्यार्थी जीवन से ही जो भी काम किया, उसे गंभीरता से किया। स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय जहां भी रहा वहीं ऐसा किया। मेरा कभी राजनीति में आने का विचार नहीं था। एमए करने के बाद नियति को कुछ और मंजूर था।

बनना प्राध्यापक चाहता था, लेकिन कांग्रेस ने 1962 के लोकसभा चुनाव में महासू निर्वाचन क्षेत्र से टिकट दिया। मैंने टिकट के लिए अप्लाई नहीं किया था। ये पहले ही तय कर दिया गया था। इसका किसी को पता भी नहीं था। मैंने अपने परिवार वालों तक को नहीं बताया।

प्रश्न : टिकट के लिए आपसे किसने अप्रोच किया?
उत्तर : लाल बहादुर शास्त्री जी ने। मेरा राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं था। उस समय शास्त्री जी ने कहा था कि क्या करना चाहते हो? सरकारी नौकरी चाहते हो या बिजनेस। मैंने कहा - बिजनेस का तजुर्बा नहीं है। शास्त्री जी ने कहा-छोड़ दीजिए सब।

आपको देश सेवा में होना चाहिए। लाल बहादुर शास्त्री इंदिरा गांधी के पास ले गए। इंदिरा और लाल बहादुर शास्त्री ने पंडित नेहरू से बातचीत करवाई। उन्होंने कहा कि इस बारे में अभी घरवालों को भी न बताऊं। मैं चुनकर आया। एमपी बन गया। फिर राजनीतिक जीवन की इतनी लंबी यात्रा हो गई।

कुछ ऐसा था पहली बार सीएम बनने का अनुभव

CM Virbhadra singh Exclusive interview on his 82nd birthday.

प्रश्न : जीवन में पहली बार मुख्यमंत्री बनने का अनुभव कैसा था?

उत्तर : मैं जब लोकसभा का मेंबर था तो मैं राज्यमंत्री भी था। मेरे मंत्री नारायण दत्त तिवारी थे। उस समय इंदिरा जी प्रधानमंत्री थीं। उन्हीं की वजह से राजनीति में भी आया। उस दिन लोकसभा का प्रश्नकाल मेरे लिए आखिरी प्रश्नकाल साबित हुआ। मुझे बताया गया कि मुझे हिमाचल जाना है। ये 1983 की बात है।

उससे पहले हिमाचल के सीएम रामलाल ठाकुर थे। मुझे हिमाचल का मुख्यमंत्री बनने को कहा गया। मैंने कहा इसमें मेरी कोई रुचि नहीं। इंदिरा जी ने कहा था - आप समझ नहीं रहे हैं, मैं आपको अवसर दे रही हूं। चीयर अप।

हरियाणा सरकार का हवाई जहाज खड़ा है, उसमें जाओ। मैंने कहा - अपनी कार से चला जाऊंगा। सीएम बनते ही हिमाचल में पहला काम वन माफिया के खिलाफ कार्रवाई कर किया। यहां पर वन माफिया को आर्थिक और राजनीतिक शह मिली हुई थी। इस मामले में जो किया, वह इतिहास है।

प्रश्न : इंदिरा गांधी से जुड़ी कोई और बात?
उत्तर : इंदिरा जी मुझे हमेशा वीरभद्र जी कहकर ही पुकारती थीं। जब तक वे जीवित रहीं, उन्होंने मुझे हमेशा सपोर्ट किया। मैं लाल बहादुर जी, इंदिरा जी और राजीव गांधी के वक्त भी मुख्यमंत्री रहा। इंदिरा जी की बात करूं तो वे फ्रेंड, फिलॉस्फर और गाइड थीं। वे लेफ्ट ऑफ सेंटर थीं। नेहरू भी खुद सोशलिस्टिक थे। उन्होंने उस समय भूमिहीनों को जमीन के अधिकार दिए। कई देशों में ऐसे परिवर्तन खूनी क्रांति के बाद हुए। मेरी एप्रोच भी हमेशा लेफ्ट ऑफ सेंटर की रही है।

इन सवालों का सीएम ने दिया ये जवाब

CM Virbhadra singh Exclusive interview on his 82nd birthday.
अमर उजाला - फोटो : अमर उजाला

प्रश्न : हिमाचल की सरकार चलाने में तब कांग्रेस नेतृत्व का क्या रवैया था?

उत्तर : दिल्ली से कभी प्रेशर नहीं पड़ा। इंदिरा गांधी तो पूरी आजादी देती थीं। उनके पास हर चीज की रिपोर्ट जाती थी। उन्होंने कभी भी राज्य के मामले में इंटरफेयर नहीं किया। उदाहरण बताता हूं। मुख्यमंत्री बनने के बाद मैं बंद लिफाफों में तीन पत्र लेकर इंदिरा गांधी के पास गया। एक पत्र वन माफिया के बारे में था।

दूसरी चिट्ठी मंत्रियों की नियुक्ति के बारे में थी और तीसरी मंत्रियों के पोर्टफोलियो के बारे में थी। उन्होंने  केवल वन माफिया वाला पत्र खोला। ये मैं पहले ही बता चुका था कि कौन सा पत्र किस बारे में है। उन्होंने बाकी दोनों लिफाफों को लौटाते हुए कहा - ‘ये आपका प्रेरोगेटिव है।’

इतना विश्वास करती थीं इंदिरा जी। मैंने एक मंत्री को सिरमौर से बाद में लिया था तो इसकी भी उन्हें जानकारी दे दी थी। उन्हें जब कहा कि ये एक और मंत्री के पोर्टफोलियो के बारे में है तो वे खूब हंसीं।

प्रश्न : पर आप जिस तरह से भारत माता की जय का उद्घोष करते हैं तो आपका झुकाव दक्षिणपंथी दिखता है?
उत्तर : भारत माता की जय भाजपा का प्रेरोगेटिव नहीं है। ये हमारी सभ्यता है और संस्कृति है। हम तो भाजपा से पहले भी ये कहते थे।

प्रश्न : और धर्मशाला में पाकिस्तान के साथ मैच का विरोध क्या था?
उत्तर : कांगड़ा में शहीदों और पूर्व सैनिकों के बहुत से परिवार हैं। हमने तो उस समय पूर्व सैनिकों के विरोध के बीच खिलाड़ियों की सुरक्षा का मामला उठाया था।

चुनाव लड़ेंगे या नहीं, बेटे के सवाल पर भी बोले सीएम

CM Virbhadra singh Exclusive interview on his 82nd birthday.

प्रश्न : ये भी आरोप है कि आपने हिमाचल में कांग्रेस के नेताओं की सेकेंड लाइन तैयार नहीं की?
उत्तर : हमारे पास बहुत अच्छे मंत्री हैं। वे वरिष्ठ हैं और तजुर्बेकार हैं, लेकिन वे चुनाव के समय अपने हलकों से बाहर ही नहीं जाते हैं।
ये शख्सियत पर निर्भर करता है। मैं प्रदेश के कोने-कोने के खुद बहुत दौरा करता हूं। ऐसा करने की जरूरत है

प्रश्न : आप कहां से चुनाव लड़ेंगे शिमला ग्रामीण से या अर्की, चौपाल, ठियोग या कसुम्पटी से। इस बारे में सस्पेंस ही बना हुआ है।
उत्तर : मैं जहां मर्जी से लडू़ं, जीत जाऊंगा। ये सही समय आने पर ही बताऊंगा।

प्रश्न : क्या आपके बेटे और युवा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष विक्रमादित्य सिंह भी चुनाव लड़ रहे हैं? वे क्या शिमला ग्रामीण से लड़ेंगे?
उत्तर : वह मेरा बेटा है। बात केवल यही नहीं है। वह अपनी उम्र के हिसाब से बहुत ही परिपक्व, गंभीर और समर्पित हैं। ये सही है कि उनका भी चुनाव लड़ने का समय आ गया है। कहां से लड़ेंगे, ये समय आने पर ही तय होगा। इतना जरूर है कि वह चुनाव जीतेगा।
 
प्रश्न : कांग्रेस के भीतर जो आपके राजनीतिक विरोधी हैं, उन्हें कैसे साधेंगे?
उत्तर : मैं किसी को विरोधी नहीं समझता, भले ही कोई मुझे समझें।

प्रश्न : आपका कोई ड्रीम वर्क  ऐसा रह गया हो, जिसे आप अब करना चाहते हैं?
उत्तर : जितना काम करो, उससे लगता है कि बहुत कम हुआ है।

प्रश्न : शिमला के लिए पानी की समस्या का निराकरण क्यों नहीं हो पाया? लगता है कि जो अंग्रेजों के जमाने का सेटअप है, वही है।
उत्तर : ऐसा नहीं है। गिरि परियोजना, अश्वनी खड्ड परियोजना और अब कोल डैम परियोजना पर भी काम शुरू हो जाएगा। इस समस्या का जल्दी अंत होगा।

तो सीएम से इसलिए नाराज है जेटली

CM Virbhadra singh Exclusive interview on his 82nd birthday.

प्रश्न : आपका राजनीतिक बेदाग जीवन रहा। अब इतनी एजेंसियां आपकी जांच कर रही हैं?

उत्तर : इसके पीछे धूमल परिवार और वित्त मंत्री अरुण जेटली हैं। सीबीआई पहले ही पूरे मामले की जांच कर चुकी थी। क्लीन चिट दे चुकी है। आयकर विभाग भी जांच कर चुका है। वह कहता है इसमें कोई क्रिमिनेलिटी नहीं है। फिर जेटली के वित्त मंत्री बनने के बाद उसी केस को दोबारा से खोला जाता है। दो विभाग उनके अधीन हैं। एक ही मामले की जांच तीन तीन एजेंसियां कर रही हैं। साफ है कि पूरा मामला राजनीतिक साजिश है और कुछ नहीं।

प्रश्न: आखिर जेटली आपसे नाराज क्यों हैं?
उत्तर : अरुण जेटली विधानसभा चुनाव से पहले कैंपेन के प्रभारी थे तो उन्होंने मुझे फंसाने के लिए ये मामला उठाया। मैं भी उस समय कांग्रेस का प्रचार संभाले हुए था। राजनीतिक लड़ाई को उन्होंने व्यक्तिगत बना लिया। बाद में मैंने जेटली पर मानहानि का केस भी किया। वे वित्त मंत्री बने तो पद की गरिमा का सम्मान करते हुए उसे वापस लिया कि झगड़ा खत्म करें।

प्रश्न : धूमल के निशाने पर भी सिर्फ आप हैं?
उत्तर : भाजपा नेता शांताकुमार भी हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, मगर उन्होंने राजनीति में शालीनता बरती। प्रेमकुमार धूमल ने तो सत्ता में आने के बाद मुझ पर सागर कत्था मामला चलाया। मेरे खिलाफ विजिलेंस केस चला। मैं इससे बरी हुआ।

जब दूसरी बार मुख्यमंत्री बने तो मुझ पर सीडी केस चलाया। तब मैं केंद्र में स्टील मंत्री था। मैं उससे भी बाइज्जत बरी हुआ। अब ये नई साजिश रची गई है। मुझे न्याय प्रणाली पर भरोसा है। कोई गलत काम नहीं किया है। इसलिए मुझे इसका भी कोई भय नहीं है।

राजनीति से रिटायरमेंट पर छापूंगा किताब, होंगे कई खुलासे

CM Virbhadra singh Exclusive interview on his 82nd birthday.

प्रश्न : इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री मोदी का क्या रुख रहा?
उत्तर : मैंने मोदी जी से सिर्फ एक बार बात की। अब मैं उनसे बात नहीं करूंगा। मुझे और मेरे परिवार को तंग किया जा रहा है। लेकिन इससे मेरे काम में कोई फर्क  नहीं आया है। मैं आठ घंटे काम करता हूं। पूरे प्रदेश के दौरे करता हूं। मैं रात में ठीक से सोता हूं।

प्रश्न : आप कई बार कह चुके हैं कि आप किताब लिख रहे हैं। ये कब तक प्रकाशित होगी?
उत्तर : मैं लिख रहा हूं, मगर इसे छापूंगा तभी जब राजनीति से रिटायर हो जाऊंगा। इसमें कई खुलासे होंगे जो अभी करने ठीक नहीं। इससे कई बड़ी हस्तियां आहत हो सकती हैं। इसमें एकदम सच होगा, जो कुछ जीवन में घटित हुआ, वह सब।

प्रश्न : जन्मदिन कैसे मनाएंगे?
उत्तर : सुबह पूजा-पाठ करेंगे। उसके बाद लोगों से मिलूंगा। ओक ओवर जाऊंगा। शाम को स्नोडन में कैंसर अस्पताल जाकर मरीजों को खाना खिलाऊंगा।

आठ घंटे काम करता हूं, सूबे का दौरा करता हूं और रात में चैन की नींद सोता हूं
वीरभद्र राजनीतिक जीवन में अपना विरोधी किसी को नहीं मानते। लेकिन उन्हें विपक्ष की राजनीति पर सख्त एतराज है। वे कहते हैं उन्हें सीबीआई जांच में फंसाया गया। एक ही मामले में तीन-तीन एजेंसियां जांच कर रही हैं। ऐसा किसी देश में नहीं होता।

वे कहते हैं प्रेम कुमार धूमल पहले ही दिन से उन्हें किसी न किसी मामले में फंसाने की कोशिश करते आए हैं। पर वे कभी सफल नहीं हुए। राजनीतिक लाड़ाई सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर नहीं लड़ी जाती। जनता सब समझती है। मैं इन जांचों से जरा भी परेशान नहीं। मेरी आत्मा साफ है। आठ घंटे काम करता हूं, सूबे का दौरा करता हूं और रात में चैन की नींद सोता हूं

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