रमेश धवाला ने रखा पक्ष, अब सीएम करेंगे दोनों धड़ों की सुनवाई
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सूबे के सबसे बड़े जिले कांगड़ा में भाजपा की अंदरूनी खींचतान को खत्म करने के लिए अब मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के सामने सभी पक्षों की ‘पंचायत’ होगी। किसी उपयुक्त स्थान पर बैठक आयोजित होगी, जिसमें मुख्यमंत्री के अलावा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती, संगठन महामंत्री पवन राणा, ज्वालाजी से विधायक रमेश ध्वाला के अलावा गिने चुने लोग होंगे।
इस बैठक में कथित तौर पर चल रही अंदरूनी अनबन को खत्म करने के लिए रास्ता निकाला जाएगा। इससे पहले विरोधियों के शिकायत करने के बाद शनिवार को धवाला ने ओक ओवर में मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इस दौरान उनके साथ मंडल भाजपा के अलावा भाजपा के घटक व सहयोगी संगठनों के पदाधिकारी भी पहुंचे।
एकांत में हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री के सामने धवाला समर्थकों ने संगठन के प्रदेश के एक बड़े नेता के खिलाफ कई बड़े आरोप लगाए। कहा गया कि जो लोग धवाला पर गलत बयानी कर रहे हैं उन्हें उन्हीं कथित वरिष्ठ नेता का समर्थन प्राप्त है। यही नहीं, पार्टी विरोधी गतिविधि करने वालों को भी उन्हीं नेता का समर्थन हासिल है और विधायक के काम काटकर उनके काम कराए जा रहे हैं।
पदाधिकारियों ने कहा कि ठेकों से लेकर तबादलों तक में विधायक के डीओ से ज्यादा प्रदेश के नेताजी दखल देकर अपने दबाव में काम करा रहे हैं। इसकी वजह से पार्टी की साख पर बट्टा लग रहा है। इसके बाद मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि वह जल्द ही ज्वालाजी का आधिकारिक दौरा करेंगे और उस दौरान कई महत्वपूर्ण योजनाओं की घोषणा और शिलान्यास करेंगे।
रामलाल तक पहुंच चुकी है शिकायत
सूत्रों की मानें तो इस वरिष्ठ पदाधिकारी की पार्टी के पूर्व संगठन महामंत्री रामलाल से भी शिकायत की गई थी। जिसके बाद रामलाल ने सख्त निर्देश दिए और उसके बाद विरोधी गुट की गुटबाजी की धार कुछ कुंद हो गई। लेकिन रामलाल के हटने के साथ ही यह गुट फिर सक्रिय हो गया है जिसकी वजह से पार्टी के अंदर की गुटबाजी प्रदेश की सत्ता के गलियारों तक पहुंच रही है। हाल यह है कि धवाला को अपनी बात कहने के लिए संगठन के बजाय मुख्यमंत्री के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। जाहिर है संगठन के अंदर से शुरू हुए इस सियासी घमासान का असर विधानसभा उपचुनाव पर भी पड़ सकता है।
कांग्रेस की राह पर भाजपा
भाजपा के ताजा हालत देखकर तो यही लग रहा है कि वह भी कांग्रेस की ही राह पर चल पड़ी है। प्रदेश के पदाधिकारी गुटबाजी को खत्म करने के बजाय उसे हवा दे रहे हैं। सबसे बड़े जिले कांगड़ा में हाल ही में नजरंदाज किए जाने के बाद इंदु गोस्वामी ने प्रदेश महिला भाजपा अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। धवाला मामला भी मुख्यमंत्री के दरबार तक पहुंच गया है। वहीं, सिरमौर, शिमला में भी गुटों में बंटी भाजपा के नेता एक-दूसरे को धीरे धीरे नुकसान पहुंचाने में लगे हैं। जाहिर है, मंत्रिमंडल के विस्तार के नजदीक आने के साथ ही यह गुटबाजी बढ़ती जा रही है।