सीबीआई पहुंची शिक्षा निदेशालय, कब्जे में लिया छात्रवृत्ति घोटाले से संबंधित रिकॉर्ड
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
करीब 250 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले में एफआईआर दर्ज करने के साथ ही सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है। सीबीआई ने मामले से संबंधित सभी तरह के दस्तावेज उच्च शिक्षा निदेशालय से अपने कब्जे में ले लिए हैं।
इन दस्तावेजों में सभी शिक्षण संस्थानों को जारी की गई राशि से लेकर वहां पढ़ने वाले छात्र छात्राओं का डेटा व विभाग की प्रारंभिक जांच की रिपोर्ट शामिल हैं। जांच टीम ने इसके अलावा अधिकारियों को भी संपर्क में रहने के लिए निर्देश दिए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर किसी दस्तावेज को हासिल करने में परेशानी न हो।
सीबीआई की इस कवायद के साथ ही निजी शिक्षण संस्थानों के संचालकों के अलावा शिक्षा विभाग के पूर्व व वर्तमान अधिकारियों की धड़कने तेज हो गई हैं।
बता दें, सरकार बनने के बाद जयराम सरकार ने अपने ही एक मंत्री की शिकायत के बाद विभागीय जांच कराई थी।
यहां जानिए पूरा मामला
शिक्षा विभाग की उस रिपोर्ट के मुताबिक साल 2013-14 से लेकर 2016-17 तक 2.38 लाख अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति जारी की गई।
इसी अवधि के दौरान 2772 शिक्षण संस्थानों को छात्रवृत्ति भी वितरित की गई जिसमें 266 निजी शिक्षण संस्थान शामिल थे। निजी संस्थानों को 210 करोड़ और सरकारी संस्थानों को 56 करोड़ की राशि दी गई।
जांच रिपोर्ट के अनुसार इसी राशि के वितरण में भारी घालमेल हुआ है। क्योंकि मामला कई बड़े शिक्षण संस्थानों व दूसरे राज्यों में स्थित संस्थानों से जुड़ा था, ऐसे में प्रदेश सरकार ने इसकी सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी।
जांच के लिए प्रदेश में मामला दर्ज होना जरूरी था, इसलिए सीबीआई को मामला देने से पहले राज्य सरकार ने पुलिस से मामले की जांच करवाई। छोटा शिमला पुलिस ने मामले में प्रारंभिक जांच भी शुरू की लेकिन अब सीबीआई ने मामला पूरी तरह अपने हाथों में ले लिया है।