फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Lahaul: Ghepan Ghat Lake has expanded by 176 percent in 33 years, an early warning system will be installed.

लाहौल: 33 साल में 176 प्रतिशत बढ़ी घेपन घाट झील, घाटी के लोगों की चिंता बढ़ी, लगेगा अर्ली वार्निंग सिस्टम

Sat, 29 Aug 2026 06:30 AM IST
Krishan Singh अशोक राणा, संवाद न्यूज एजेंसी, केलांग (लाहौल-स्पीति)।
अशोक राणा, संवाद न्यूज एजेंसी, केलांग (लाहौल-स्पीति)। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 29 Aug 2026 06:30 AM IST
सार

सैटेलाइट अध्ययन में सामने आया है कि पिछले 33 वर्षों में इस हिमनदीय घेपन झील का दायरा करीब 176 फीसदी बढ़ चुका है। वर्तमान में झील का क्षेत्रफल 101.30 हेक्टेयर, लंबाई 2.464 किलोमीटर और अधिकतम चौड़ाई करीब 625 मीटर है। 

विज्ञापन
Lahaul: Ghepan Ghat Lake has expanded by 176 percent in 33 years, an early warning system will be installed.
घेपन घाट झील। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

 नेपाल में बाढ़ से हुई तबाही के बाद लाहौल घाटी की संवेदनशील घेपन घाट लेक एक बार फिर चर्चा में है। सैटेलाइट अध्ययन में सामने आया है कि पिछले 33 वर्षों में इस हिमनदीय घेपन झील का दायरा करीब 176 फीसदी बढ़ चुका है। वर्तमान में झील का क्षेत्रफल 101.30 हेक्टेयर, लंबाई 2.464 किलोमीटर और अधिकतम चौड़ाई करीब 625 मीटर है। झील में करीब 35.08 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी होने का अनुमान है। ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने के कारण झील के लगातार बढ़ते आकार को देखते हुए केंद्र सरकार यहां पहली बार अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने की तैयारी कर रही है। तकनीक का ट्रायल सिस्सू झील के समीप किया जा रहा है। सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, केंद्रीय जल आयोग और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सीडैक) समेत विभिन्न संस्थान लंबे समय से क्षेत्र की हिमनदीय झीलों और ग्लेशियरों का अध्ययन कर रहे हैं।

विज्ञापन

चिनाब घाटी के लिए गंभीर खतरा
नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार घेपन घाट झील के टूटने की स्थिति में चिनाब घाटी के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि झील का आकार बढ़ने और ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से पानी का स्तर लगातार बढ़ता रहा तो हिमनदी झील विस्फोट बाढ़ (ग्लोफ) का खतरा भी बढ़ सकता है। झील टूटने की स्थिति में इसका प्रभाव केवल लाहौल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि चिनाब नदी के साथ जम्मू-कश्मीर के कई क्षेत्रों और आगे पाकिस्तान तक पड़ सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

सैटेलाइट से मिलेगी आपदा की पूर्व सूचना
लाहौल-स्पीति की उपायुक्त किरण भड़ाना ने बताया कि विशेषज्ञों और तकनीकी टीम ने दो बार घेपन झील का निरीक्षण किया है। जल्द ही यहां हिमाचल का पहला अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा। यह प्रणाली सैटेलाइट आधारित तकनीक से झील के जलस्तर और संभावित बदलावों पर नजर रखने में मदद करेगी और खतरे की स्थिति में मौसम विभाग तथा जिला प्रशासन को पहले ही सूचना मिल सकेगी। झील में अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने के लिए सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग को पत्र लिखा गया है।

विज्ञापन

सिस्सू झील के समीप चल रहा सिस्टम का ट्रायल
सीडैक के वैज्ञानिक डॉ. अनीश सत्यान ने बताया कि फिलहाल सिस्सू झील के समीप अर्ली वार्निंग सिस्टम को ट्रायल के तौर पर स्थापित किया गया है। ट्रायल के परिणामों का अध्ययन किया जा रहा है। केंद्र सरकार से अनुमति मिलते ही इसी तकनीक को घेपन घाट लेक में स्थापित किया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed