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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   RVNL to build highways, ports, and metro lines in addition to railway tracks; seeks partnership proposals.

हिमाचल: रेल पटरियां ही नहीं; हाईवे, पोर्ट और मेट्रो भी बनाएगा आरवीएनएल, साझेदारी प्रस्ताव मांगे

Sat, 29 Aug 2026 11:00 AM IST
Krishan Singh सरोज पाठक, संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर।
सरोज पाठक, संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 29 Aug 2026 11:00 AM IST
सार

आरवीएनएल अब केवल रेल परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा। यह कंपनी अब हाईवे, एयरपोर्ट भवन, पोर्ट, मेट्रो, सुरंग और सौर ऊर्जा जैसे बड़े बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में भी कदम बढ़ाएगी

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RVNL to build highways, ports, and metro lines in addition to railway tracks; seeks partnership proposals.
रेल विकास निगम लिमिटेड। - फोटो : आरवीएनएल

विस्तार

रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) अब केवल रेल परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा। यह कंपनी अब हाईवे, एयरपोर्ट भवन, पोर्ट, मेट्रो, सुरंग और सौर ऊर्जा जैसे बड़े बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में भी कदम बढ़ाएगी। रेल मंत्रालय के अधीन नवरत्न कंपनी ने देश-विदेश की आगामी बड़ी परियोजनाओं के लिए भारतीय कंपनियों से साझेदारी प्रस्ताव मांगे हैं। इस पहल से आरवीएनएल का कारोबारी दायरा रेलवे से आगे बढ़ेगा। आरवीएनएल संयुक्त उद्यम और कंसोर्टियम के माध्यम से इन नए क्षेत्रों में प्रवेश करेगा। कंपनी बड़े निर्माण या तकनीकी कार्यों का अनुभव रखने वाले भारतीय साझेदारों की तलाश में है।

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आरवीएनएल अपनी तकनीकी क्षमता और परियोजना प्रबंधन अनुभव का उपयोग सड़क, पोर्ट, मेट्रो और ऊर्जा क्षेत्रों में करेगी। कंपनी परिवहन, ऊर्जा और तकनीकी बुनियादी ढांचे के कई क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इनमें एक्सप्रेसवे, बड़े पुल, समुद्री कार्य, सिंचाई-नहर, रेलवे विद्युतीकरण और पावर ट्रांसमिशन शामिल हैं। कंपनी 500 करोड़ रुपये से 1000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की परियोजनाओं के लिए साझेदारी करेगी। यह विस्तार स्थानीय रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि करेगा। आरवीएनएल ने साझेदारी के लिए कुछ पात्रता मानदंड निर्धारित किए हैं।

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संबंधित कंपनी का निर्माण या तकनीकी क्षेत्र में कम से कम पांच वर्ष का अनुभव होना चाहिए। पिछले पांच वर्षों की औसत नेट वर्थ सकारात्मक होनी चाहिए। साथ ही, पिछले तीन वित्तीय वर्षों का औसत कर-पूर्व लाभ भी सकारात्मक होना अनिवार्य है। 31 मार्च 2026 तक डेट-इक्विटी अनुपात 2 से अधिक नहीं होना चाहिए। आकस्मिक देनदारियां नेट वर्थ के 2.5 गुना से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। विभिन्न क्षेत्रों के लिए अनुभव और टर्नओवर की अलग-अलग शर्तें हैं।

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मेट्रो, सुरंग और सिविल कार्यों की श्रेणी ए के लिए 500 करोड़ रुपये से अधिक के एकल काम का अनुभव चाहिए। इसके लिए पांच साल का औसत टर्नओवर कम से कम 750 करोड़ रुपये होना जरूरी है। सड़क, एक्सप्रेसवे और पोर्ट कार्यों की श्रेणी ए के लिए 1000 करोड़ रुपये से अधिक के एकल काम का अनुभव मांगा गया है। इस श्रेणी में 1500 करोड़ रुपये से अधिक का औसत टर्नओवर आवश्यक है। रेलवे विद्युतीकरण, सौर ऊर्जा जैसे कार्यों की श्रेणी ए के लिए 100 करोड़ रुपये से अधिक के काम का अनुभव और 150 करोड़ रुपये का औसत टर्नओवर मांगा गया है।

आरवीएनएल का अंतरराष्ट्रीय बुनियादी ढांचा बाजार में भी विस्तार हो रहा है। कंपनी मालदीव, उज्बेकिस्तान और सऊदी अरब में बुनियादी ढांचा और सौर ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाओं पर काम कर रही है। वर्ष 2003 में स्थापित आरवीएनएल ने 31 मार्च 2026 तक 17,171 किलोमीटर से अधिक रेलवे अवसंरचना का निर्माण पूरा किया है। सार्वजनिक उद्यम विभाग ने कंपनी को लगातार 14वें वर्ष "उत्कृष्ट" रेटिंग दी है। यह विस्तार कंपनी की तकनीकी क्षमता और अनुभव का प्रमाण है।

बताते चलें कि आरवीएनएल के इस विस्तार से स्थानीय रोजगार में भी बढ़ोत्तरी होगी। जहां भी निगम किसी कंपनी के साथ साझेदारी करेगी, वहां पर परियोजना के लिए सबलैटिंग पर अधिकतर स्थानीय ठेकेदारों को ही छोटे छोटे काम आवंटित होते हैं, उनके जरिये रोजगार स्किल और अनस्किल युवाओं तक पहुंचता है। आरवीएनएल ने साझेदारी के लिए शर्त रखी है कि संबंधित कंपनी का निर्माण या तकनीकी क्षेत्र में कम से कम पांच वर्ष का अनुभव जरूरी है।

पिछले पांच वर्षों की औसत नेट वर्थ सकारात्मक और पिछले तीन वित्तीय वर्षों का औसत कर-पूर्व लाभ भी सकारात्मक होना चाहिए। 31 मार्च 2026 को डेट-इक्विटी अनुपात 2 से अधिक नहीं और आकस्मिक देनदारियां नेट वर्थ के 2.5 गुना से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। कंपनी किसी सरकारी विभाग, पीएसयू या विदेशी निकाय से ब्लैकलिस्ट नहीं होनी चाहिए और उसके खिलाफ एनसीएलटी में दिवालिया प्रक्रिया लंबित नहीं होनी चाहिए। 2 दिसंबर 2025 के ईओआई के तहत पहले से एम्पेनल एजेंसियों को उन्हीं क्षेत्रों के लिए दोबारा आवेदन नहीं करना होगा। हालांकि नई श्रेणी या नए क्षेत्र में शामिल होने की इच्छा रखने वाली एजेंसियां इस प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगी। 

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